नए साल के जश्न के बीच भारत की गिग इकोनॉमी (Gig Economy) में एक बड़ा उबाल देखने को मिला। एक तरफ जहां Zomato और Blinkit ने 31 दिसंबर 2025 को रिकॉर्ड 75 लाख ऑर्डर डिलीवर करने का दावा किया, वहीं दूसरी ओर देश के हजारों डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरकर चक्का जाम कर दिया।
यह हड़ताल केवल एक दिन का विरोध नहीं था, बल्कि उन ‘अद्रश्य’ हाथों की आवाज थी जो 10 मिनट की डिलीवरी के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालते हैं। आइए जानते हैं कि इस हड़ताल के पीछे की असली वजह क्या है और जोमैटो के CEO दीपिंदर गोयल का इस पर क्या तर्क है।
क्या है खबर?
क्रिसमस (25 दिसंबर) के बाद 31 दिसंबर 2025 को देशभर के डिलीवरी पार्टनर्स ने काम बंद करने का फैसला किया। IFAT (Indian Federation of App-Based Transport Workers) और TGPWU जैसे यूनियनों के नेतृत्व में हुई इस हड़ताल का असर दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में दिखा।
यूनियनों का दावा है कि करीब 2 लाख से ज्यादा गिग वर्कर्स ने इस विरोध में हिस्सा लिया। उनकी मुख्य नाराजगी 10-मिनट डिलीवरी मॉडल, गिरती कमाई और बिना किसी पूर्व सूचना के ID ब्लॉक किए जाने को लेकर है।
डिलीवरी पार्टनर्स की मुख्य मांगें:
- न्यूनतम वेतन: वर्कर्स की मांग है कि उन्हें कम से कम ₹24,000 से ₹40,000 तक का मासिक वेतन सुनिश्चित किया जाए।
- सोशल सिक्योरिटी: काम के दौरान दुर्घटना होने पर बीमा (Insurance), पेंशन और स्वास्थ्य लाभ की गारंटी मिले।
- 10-मिनट मॉडल का विरोध: वर्कर्स का कहना है कि बेहद कम समय में डिलीवरी का दबाव सड़क दुर्घटनाओं को न्योता देता है।
- ID ब्लॉकिंग पर रोक: बिना किसी ठोस कारण के प्लेटफॉर्म द्वारा उनकी आईडी बंद न की जाए।
दीपिंदर गोयल का पलटवार: “सिस्टम निष्पक्ष है”
हड़ताल के दावों के बीच, Zomato के CEO दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया पर डेटा साझा करते हुए इसे ‘रिकॉर्ड तोड़’ साल बताया। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर को 4.5 लाख से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स ने रिकॉर्ड 75 लाख ऑर्डर पहुंचाए।
गोयल ने हड़ताल को ‘सीमित’ बताते हुए कहा, “अगर हमारा सिस्टम वास्तव में गलत होता, तो लाखों लोग स्वेच्छा से हमारे साथ काम नहीं करते।” उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि 2025 में एक औसत डिलीवरी पार्टनर की प्रति घंटा कमाई (EPH) ₹102 रही, जो 2024 के मुकाबले 10.9% अधिक है।
कितनी है असल कमाई?
दीपिंदर गोयल के अनुसार, यदि कोई पार्टनर दिन में 10 घंटे और महीने में 26 दिन काम करता है, तो वह लगभग ₹26,500 (ग्रॉस) कमा सकता है। पेट्रोल और मेंटेनेंस का खर्च (करीब 20%) निकालने के बाद हाथ में लगभग ₹21,000 आते हैं। हालांकि, यूनियनों का कहना है कि यह आंकड़ा केवल कागजी है और हकीकत में महंगाई और लंबी शिफ्ट्स के कारण बचत ना के बराबर होती है।












