Delhi Business News: दिल्ली के छोटे कारोबारियों की बल्ले-बल्ले! बिना गारंटी मिलेगा 10 करोड़ तक का लोन, सरकार उठाएगी 95% रिस्क

February 25, 2026 8:52 AM
delhi credit guarantee scheme collateral free msme loan

अब तक दिल्ली में एक छोटा मैन्युफैक्चरर या स्टार्टअप फाउंडर जब बैंक जाता था, तो सबसे पहला सवाल होता था, “सिक्योरिटी में क्या दोगे? घर के कागज हैं या कोई जमीन?” इसी सवाल पर आकर गाड़ी रुक जाती थी। लेकिन अब दिल्ली सरकार और CGTMSE (भारत सरकार का ट्रस्ट) ने हाथ मिलाया है ताकि बैंक आपसे यह सवाल न पूछें।

यह योजना ‘खास’ क्यों है? (एक्सपर्ट एनालिसिस)

ज्यादातर सरकारी योजनाएं 2 या 5 करोड़ रुपये तक की लिमिट पर सिमट जाती हैं। लेकिन इस स्कीम ने 10 करोड़ रुपये की बड़ी सीमा तय की है।

1. रिस्क का गणित (95% सुरक्षा): आमतौर पर बैंक छोटे बिजनेस को लोन देने से डरते हैं क्योंकि डूबने का खतरा रहता है। इस स्कीम में 75-90% रिस्क CGTMSE उठा रहा है और बचा हुआ हिस्सा दिल्ली सरकार। यानी अगर कोई बिजनेस फेल भी होता है, तो बैंक का सिर्फ 5% पैसा दांव पर लगा है। जब बैंक का रिस्क कम होता है, तो वह लोन बांटने में कंजूसी नहीं करता।

2. 50 करोड़ से 2500 करोड़ का जादू: सरकार ने अपनी जेब से ₹50 करोड़ का फंड (Corpus) निकाला है। फाइनेंस की भाषा में इसे ‘लेवरेज’ कहते हैं। इस छोटे से फंड के दम पर बैंक बाजार में ₹2500 करोड़ तक का लोन बांट सकेंगे। यह दिल्ली की इकोनॉमी के लिए एक बड़ा ‘बूस्टर डोज’ है।

किसे मिलेगा फायदा और कौन है रडार पर?

यह स्कीम हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल्ली में कुछ नया करना चाहता है या अपने पुराने काम को बड़ा बनाना चाहता है।

  • रिटेल और सर्विस सेक्टर: दिल्ली एक कमर्शियल हब है। यहाँ की छोटी दुकानों, ट्रेनिंग सेंटर्स, और सर्विस यूनिट्स को इसमें प्रमुखता दी गई है।
  • महिला और SC उद्यमी: पहली बार बिजनेस शुरू करने वाली महिलाओं और अनुसूचित जाति के उद्यमियों के लिए शर्तों में ढील दी गई है, ताकि समाज का हर वर्ग मुख्यधारा से जुड़ सके।
  • स्टार्टअप्स: अगर आपके पास एक ठोस बिजनेस प्लान है लेकिन बैंक को दिखाने के लिए बैलेंस शीट पुरानी नहीं है, तो भी आप इस गारंटी के हकदार बन सकते हैं।

विशेष नोट: खेती-किसानी और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को फिलहाल इस लिस्ट से बाहर रखा गया है, क्योंकि यह शुद्ध रूप से शहरी व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली स्कीम है।

भविष्य पर प्रभाव: क्या दिल्ली ‘स्टार्टअप कैपिटल’ बनी रहेगी?

इस योजना का सबसे बड़ा असर दिल्ली के ‘जॉब मार्केट’ पर पड़ेगा। जब 10 करोड़ का लोन एक छोटी यूनिट को मिलता है, तो वह कम से कम 20-50 नए लोगों को रोजगार देती है।

आने वाले समय में हम देखेंगे कि दिल्ली के ओखला, बवाना और नरेला जैसे इंडस्ट्रियल इलाकों में नई मशीनें लगेंगी और टेक्नोलॉजी अपग्रेड होगी। बिना कोलैटरल के लोन मिलने से व्यापारियों की ‘बार्गेनिंग पावर’ बढ़ेगी और वे ऊंचे ब्याज वाले प्राइवेट लोन के चंगुल से बच सकेंगे।

आप इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

अगर आप भी इस स्कीम का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यह रास्ता अपनाएं:

  1. बैंक का चुनाव: दिल्ली में किसी भी CGTMSE-रजिस्टर्ड बैंक या NBFC (जैसे SBI, PNB या प्रमुख प्राइवेट बैंक) से संपर्क करें।
  2. प्रोजेक्ट रिपोर्ट: एक शानदार बिजनेस प्लान तैयार करें। बैंक आपकी प्रॉपर्टी नहीं, आपका ‘कैश-फ्लो’ देखेगा कि आप पैसा कमाकर लोन कैसे लौटाएंगे।
  3. MSME रजिस्ट्रेशन: सुनिश्चित करें कि आपका उद्यम ‘उद्यम पोर्टल’ पर रजिस्टर्ड है।

Lakshay Pratap

मैं लगभग 4 सालो से ऑनलाइन बिज़नेस और ऑफलाइन बिज़नेस पर काम कर रहा हूँ, और में ऑफलाइन बिज़नेस की सबसे बड़ी समस्या यानी बिज़नेस के लिए जरुरी प्रोसेस और मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा फोकस्ड हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको बहुत फायदा मिलेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment