Zerodha Success Story: कॉल सेंटर की नौकरी से अरबों का साम्राज्य तक – कामत ब्रदर्स की पूरी कहानी

December 5, 2025 11:41 PM
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भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में अक्सर यह चर्चा होती है कि बिना भारी-भरकम फंडिंग और विदेशी डिग्री के एक बड़ी कंपनी बनाना लगभग नामुमकिन है। लेकिन बैंगलोर के दो भाइयों, नितिन कामत और निखिल कामत ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है।

‘ज़ेरोधा’ (Zerodha) की कहानी सिर्फ एक फिनटेक कंपनी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह धैर्य, समझदारी और भारतीय शेयर बाजार में आए एक क्रांतिकारी बदलाव का दस्तावेज है। एक वक्त था जब ये भाई कॉल सेंटर में रात की शिफ्ट में काम करते थे और आज वे भारत के सबसे अमीर सेल्फ-मेड अरबपतियों की सूची में शामिल हैं।

आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर कैसे एक मिडिल क्लास परिवार के लड़कों ने बिना किसी बाहरी फंडिंग (Bootstrapping) के भारत की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म खड़ी कर दी।

स्कूल ड्रॉपआउट और शुरुआती संघर्ष: जब ट्रेडिंग ही एकमात्र सहारा था

सफलता की चमक देखने से पहले हमें उस संघर्ष को देखना होगा जहां से इसकी नींव पड़ी। नितिन कामत (जन्म 1979) और निखिल कामत (जन्म 1986) का बचपन शिमोगा, कर्नाटक में बीता। उनके पिता केनरा बैंक में अधिकारी थे, जिससे घर में मध्यमवर्गीय माहौल था।

नितिन कामत की कहानी में पहला बड़ा मोड़ 2001 में आया। वे इंजीनियरिंग कॉलेज (Bangalore Institute of Technology) में पढ़ाई के साथ-साथ ट्रेडिंग कर रहे थे। लेकिन 2001 में बाजार बुरी तरह क्रैश हुआ और उनका पूरा ट्रेडिंग अकाउंट साफ हो गया। उनके पास न केवल पैसे खत्म हुए, बल्कि वे कर्ज में भी डूब गए।

इस कर्ज को चुकाने के लिए नितिन ने एक कॉल सेंटर में नौकरी शुरू की। वे दिन में ट्रेडिंग करते और रात में कॉल सेंटर में काम करते। यह सिलसिला करीब चार साल तक चला। यही वह दौर था जिसने उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव और अनुशासन का असली पाठ पढ़ाया।

निखिल का अलग रास्ता: दूसरी ओर, छोटे भाई निखिल कामत का रास्ता और भी ज्यादा unconventional (अपरंपरागत) था। उन्हें किताबी पढ़ाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। 14 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और 10वीं के बाद फॉर्मल एजुकेशन को अलविदा कह दिया। महज 17 साल की उम्र में निखिल ने भी कॉल सेंटर में नौकरी शुरू की, जहां उनकी सैलरी लगभग 8,000 रुपये थी।

निखिल की शिफ्ट यूके (UK) के समय के हिसाब से होती थी, जिससे उन्हें दिन में भारतीय बाजार में ट्रेडिंग करने का मौका मिल जाता था। उनकी ट्रेडिंग स्किल्स इतनी शानदार थीं कि जल्द ही वे अपने कॉल सेंटर मैनेजर और सहकर्मियों का पैसा भी मैनेज करने लगे।

ब्रोकरेज इंडस्ट्री की वो तीन कमियां जिन्होंने ‘Zerodha’ को जन्म दिया

2006 के आसपास, निखिल ने कॉल सेंटर छोड़ दिया और नितिन के साथ मिलकर ‘कामत एसोसिएट्स’ (Kamath Associates) की शुरुआत की। रिलायंस मनी के साथ सब-ब्रोकर के तौर पर काम करते हुए नितिन ने बाजार की नब्ज को पहचाना। उन्हें समझ आया कि आम आदमी शेयर बाजार से क्यों डरता है।

उस समय तीन बड़ी समस्याएं थीं:

  1. भारी ब्रोकरेज फीस: हर ट्रेड पर ब्रोकर एक प्रतिशत हिस्सा मांगते थे, जिससे छोटे ट्रेडर का मुनाफा खत्म हो जाता था।
  2. पारदर्शिता की कमी: कई छिपे हुए चार्ज (Hidden Charges) होते थे जो निवेशक को बाद में पता चलते थे।
  3. तकनीक का अभाव: ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पुराने थे और इस्तेमाल करने में बहुत कठिन थे।

नितिन और निखिल ने महसूस किया कि अगर वे तकनीक का सही इस्तेमाल करें और फीस को पारदर्शी बना दें, तो वे पूरे बाजार को बदल सकते हैं। इसी विचार के साथ “ज़ेरोधा” का जन्म हुआ।

15 अगस्त 2010: जब ‘जीरो बाधा’ के साथ हुई नई शुरुआत

15 अगस्त 2010 को कामत ब्रदर्स ने अपनी कंपनी लॉन्च की। नाम रखा गया ‘Zerodha’ — जो दो शब्दों से मिलकर बना था: ‘Zero’ और ‘Rodha’ (संस्कृत में रोध का मतलब है बाधा या रुकावट)। यानी एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां निवेश के बीच कोई बाधा न हो।

डिस्काउंट ब्रोकिंग का मॉडल: जब पूरी इंडस्ट्री ट्रेड वैल्यू पर परसेंटेज चार्ज करती थी, ज़ेरोधा ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया। उन्होंने ‘फ्लैट फीस मॉडल’ (Flat Fee Model) पेश किया—हर ट्रेड पर अधिकतम 20 रुपये। चाहे आप 1 लाख का शेयर खरीदें या 1 करोड़ का, फीस सिर्फ 20 रुपये ही लगेगी। इतना ही नहीं, डिलीवरी ट्रेड (लंबे समय के निवेश) को उन्होंने पूरी तरह फ्री कर दिया।

यह मॉडल इतना रिस्की था कि इंडस्ट्री के दिग्गजों ने कहा कि यह कंपनी कुछ महीनों में बंद हो जाएगी। लेकिन कामत ब्रदर्स जानते थे कि वॉल्यूम (ज्यादा ट्रेडर्स) ही असली गेम-चेंजर होगा।

बिना फंडिंग के यूनिकॉर्न: बूटस्ट्रैपिंग का जादुई फॉर्मूला

स्टार्टअप्स की दुनिया में जहां ‘कैश बर्न’ (पैसा फूंकना) एक फैशन बन गया है, ज़ेरोधा की कहानी बिल्कुल अलग है। नितिन और निखिल ने तय किया था कि वे किसी भी वेंचर कैपिटलिस्ट (VC) से पैसा नहीं लेंगे।

इसके पीछे दो मुख्य कारण थे:

  1. आजादी: वे नहीं चाहते थे कि कोई बाहरी निवेशक उन पर दबाव डाले कि “जल्दी मुनाफा कमाओ” या “गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचो”।
  2. ग्राहकों का हित: बाहरी फंडिंग अक्सर कंपनियों को ग्राहक के फायदे की जगह अपनी वैल्यूएशन बढ़ाने पर मजबूर कर देती है।

नतीजा यह हुआ कि ज़ेरोधा पहले साल से ही प्रॉफिटेबल रही। उन्होंने अपनी कमाई को ही वापस बिजनेस में लगाया।

  • दिसंबर 2011 तक उनके पास 7,000 क्लाइंट थे।
  • 2013 तक बिना विज्ञापन पर एक रुपया खर्च किए, क्लाइंट्स की संख्या 30,000 हो गई।
  • 2020 में कंपनी ने ‘यूनिकॉर्न’ (1 बिलियन डॉलर वैल्यूएशन) का दर्जा हासिल किया—वो भी बिना किसी बाहरी निवेश के।

तकनीक और शिक्षा: सफलता के असली हथियार

ज़ेरोधा की सफलता सिर्फ सस्ती ब्रोकरेज तक सीमित नहीं थी। उनका असली हथियार था, टेक्नोलॉजी और एजुकेशन।

Kite ऐप की क्रांति: 2015 में उन्होंने ‘Kite’ लॉन्च किया। यह इतना हल्का और यूजर-फ्रेंडली ऐप था कि इसने मोबाइल ट्रेडिंग का अनुभव बदल दिया। इसने उन लोगों को भी बाजार से जोड़ा जो भारी-भरकम ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर से डरते थे।

Varsity (वर्सिटी) – ज्ञान बांटने की पहल: कामत ब्रदर्स जानते थे कि भारत में लोग शेयर बाजार में पैसा लगाने से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने ‘Varsity’ नाम का एक फ्री एजुकेशन पोर्टल शुरू किया। आज यह दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय शिक्षा पोर्टल्स में से एक है। इस पहल ने न केवल लोगों को साक्षर बनाया, बल्कि ज़ेरोधा के लिए एक वफादार कस्टमर बेस भी तैयार किया।

आज कहां खड़े हैं कामत ब्रदर्स: दौलत और निवेश का साम्राज्य

साल 2025 तक आते-आते, ज़ेरोधा और कामत ब्रदर्स भारतीय अर्थजगत के सबसे बड़े नामों में शुमार हो चुके हैं।

आंकड़े क्या कहते हैं?

  • क्लाइंट बेस: 1.2 करोड़ (12 Million) से ज्यादा एक्टिव यूजर्स।
  • मार्केट शेयर: भारत के कुल रिटेल ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 15-20% हिस्सा ज़ेरोधा के जरिए होता है।
  • मुनाफा: वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी ने 2,900 करोड़ रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) दर्ज किया।

निखिल कामत का नया अवतार: निखिल कामत अब सिर्फ एक ब्रोकर नहीं, बल्कि एक सेलिब्रिटी इन्वेस्टर बन चुके हैं। उनकी एसेट मैनेजमेंट फर्म ‘True Beacon’ अमीरों (UHNI) के लिए निवेश को आसान बना रही है। इसके अलावा, वे पॉडकास्ट और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

जून 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, निखिल ने कई नई कंपनियों में बड़ा निवेश किया है:

  • Ather Energy (EV): इसमें उनकी बड़ी हिस्सेदारी है।
  • Nazara Technologies: गेमिंग सेक्टर में बड़ा दांव।
  • WTFund: यह एक फंड है जो 25 साल से कम उम्र के एंटरप्रेन्योर्स को बिना इक्विटी लिए मदद करता है।

निखिल कामत की कुल संपत्ति (Net Worth) लगभग $3.1 बिलियन आंकी गई है, जो उन्हें भारत के सबसे युवा अरबपतियों में रखती है। वहीं, नितिन कामत की संपत्ति भी लगभग $5.2 बिलियन के आसपास है।

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परोपकार और भविष्य की सोच

दौलत कमाने के बाद, दोनों भाई इसे समाज को लौटाने में भी पीछे नहीं हैं।

  • Rainmatter Foundation: नितिन कामत जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और पर्यावरण को लेकर बहुत गंभीर हैं। उनकी संस्था रेनमैटर उन स्टार्टअप्स और एनजीओ को फंडिंग देती है जो पर्यावरण संरक्षण और आजीविका सुधार पर काम कर रहे हैं।
  • The Giving Pledge: 2023 में निखिल कामत ‘गिविंग प्लेज’ (Giving Pledge) में शामिल होने वाले सबसे युवा भारतीय बने। उन्होंने अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा परोपकार के लिए दान करने का संकल्प लिया है।

उद्योग पर इस कहानी का असर

नितिन और निखिल कामत की यात्रा हमें सिखाती है कि बिजनेस में असली ‘डिसरप्शन’ (Disruption) सिर्फ टेक्नोलॉजी से नहीं आता, बल्कि नीयत से आता है। जब बैंक और पुराने ब्रोकर अपनी फीस कम करने को तैयार नहीं थे, तब इन दोनों भाइयों ने ग्राहक को केंद्र में रखकर सोचा।

कॉल सेंटर की रातों से लेकर दलाल स्ट्रीट के शिखर तक का उनका सफर भारतीय युवाओं के लिए एक मिसाल है। यह साबित करता है कि अगर आपका प्रोडक्ट दमदार है और आपकी नीयत साफ है, तो आपको सफल होने के लिए न तो बड़े बाप की जरूरत है और न ही विदेशी डिग्री की।

सलोनी ठाकर

मैं 3 सालों से सफल उद्यमियों और कंपनियों की कहानियाँ लिख रही हूँ। मैं हर हफ्ते नई-नई प्रेरक कहानियाँ ढूँढकर शेयर करती हूँ। मेरे आर्टिकल्स पढ़कर आप दूसरों की यात्रा से सीख और मोटिवेशन पा सकेंगे।

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