Reliance पर Supreme Court का डंडा: 30 लाख का जुर्माना बरकरार, कहा- “बड़ी कंपनी, तो जिम्मेदारी भी बड़ी!”

December 8, 2025 9:01 PM
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रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और उसके अधिकारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बुरी खबर आई है। 2 दिसंबर 2025 को एक ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस पर सेबी (SEBI) द्वारा लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने को सही ठहराया है। कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि कंपनी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, नियमों का पालन सबको करना होगा।

यह मामला 2020 के उस ऐतिहासिक फेसबुक-जियो डील से जुड़ा है, जिसने भारतीय बाजार में तहलका मचा दिया था। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ा सबक है।

क्या है पूरा मामला?

बात अप्रैल 2020 की है, जब दुनिया कोविड लॉकडाउन में थी। उस वक्त खबर आई कि फेसबुक (अब Meta) रिलायंस के जियो प्लेटफॉर्म्स में 43,574 करोड़ रुपये का निवेश करने वाला है। यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा टेक एफडीआई (FDI) था।

लेकिन समस्या डील से नहीं, बल्कि उसकी ‘टाइमिंग’ और ‘लीक’ से थी:

  • मार्च 24-25, 2020: मीडिया में खबरें आने लगीं कि फेसबुक और जियो के बीच डील होने वाली है। शेयर बाजार में रिलायंस के शेयर प्राइस बढ़ने लगे।
  • 28 दिन की चुप्पी: रिलायंस ने इन खबरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
  • 22 अप्रैल 2020: रिलायंस ने आधिकारिक तौर पर डील की घोषणा की।

SEBI का कहना था कि जब मीडिया में खबर लीक हो गई थी, तो रिलायंस को तुरंत (Promptly) स्थिति साफ करनी चाहिए थी ताकि निवेशकों को सही जानकारी मिले और बाजार में अफवाहों पर ट्रेडिंग न हो।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमलिया बागची की बेंच ने रिलायंस की दलीलों को खारिज कर दिया। रिलायंस का तर्क था कि उन्हें “बाजार की अफवाहों” पर सफाई देने की कानूनी बाध्यता नहीं थी।

लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना और एक बहुत बड़ी बात कही:

“कंपनी जितनी बड़ी होगी, जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होगी। आपको नियमों का पालन बारीकी से (Meticulously) करना होगा।”

कोर्ट ने कहा कि जब इतनी बड़ी खबर बाहर आती है, तो शेयर प्राइस पर असर पड़ता है। ऐसे में कंपनी की जिम्मेदारी है कि वो तुरंत बताए कि खबर सच है या झूठ।

किसे देना होगा जुर्माना?

यह 30 लाख का जुर्माना तीन हिस्सों में बंटा है:

  1. रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL): ₹10 लाख
  2. सावित्री पारेख (Compliance Officer): ₹10 लाख
  3. के. सेतुरमन (Compliance Officer): ₹10 लाख

यह फैसला कॉर्पोरेट जगत के लिए एक चेतावनी है कि कंप्लायंस ऑफिसर्स (Compliance Officers) भी अब बच नहीं सकते। अगर नियमों की अनदेखी हुई, तो उनकी जेब पर भी असर पड़ेगा।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

यह फैसला आम निवेशकों के लिए एक जीत की तरह है। इसका मतलब है:

  • पारदर्शिता (Transparency): अब बड़ी कंपनियों को मीडिया रिपोर्ट्स पर चुप्पी साधने के बजाय सच बताना होगा।
  • फेयर प्ले: इनसाइडर ट्रेडिंग और अफवाहों से होने वाले नुकसान से छोटे निवेशक बच सकेंगे।
  • भरोसा: सेबी और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों का भरोसा और बढ़ेगा।

रिलायंस जियो (Jio) जल्द ही अपना आईपीओ (IPO) लाने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में यह फैसला कंपनी को अपने गवर्नेंस को और सख्त करने पर मजबूर करेगा।

Lakshay Pratap

मैं लगभग 4 सालो से ऑनलाइन बिज़नेस और ऑफलाइन बिज़नेस पर काम कर रहा हूँ, और में ऑफलाइन बिज़नेस की सबसे बड़ी समस्या यानी बिज़नेस के लिए जरुरी प्रोसेस और मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा फोकस्ड हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको बहुत फायदा मिलेगा।

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