भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘को-लेंडिंग अरेंजमेंट’ (CLA) के लिए नए और सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकों की कम लागत वाली पूंजी (Cheap Capital) और एनबीएफसी (NBFC) की जमीनी पहुंच का मेल कराकर छोटे कारोबारियों तक सस्ता कर्ज पहुंचाना है।
लोन सस्ता होगा या महंगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर ‘मिलेजुले’ रूप में दिखेगा। अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले MSMEs के लिए लोन की दरें कम हो सकती हैं, क्योंकि अब बैंक और NBFC मिलकर एक ‘Blended Interest Rate’ (भारित औसत दर) तय करेंगे।
- फायदा: चूंकि बैंकों के पास फंड सस्ता होता है, इसलिए जब वे NBFC के साथ जुड़ेंगे, तो ग्राहकों को मिलने वाले लोन की कुल ब्याज दर NBFC के अकेले लोन की तुलना में कम हो जाएगी।
- चुनौती: जोखिम वाले (High-risk) या नए कारोबारियों के लिए दरें स्थिर रह सकती हैं या थोड़ी बढ़ सकती हैं, क्योंकि अब बैंकों को भी प्रत्येक लोन का कम से कम 10% हिस्सा अपनी बैलेंस शीट पर रखना अनिवार्य होगा।
10% रिटेंशन और 5% गारंटी का नया गणित
सरल शब्दों में, को-लेंडिंग वह व्यवस्था है जहाँ एक बड़ा बैंक और एक NBFC (जैसे बजाज फाइनेंस या मुथूट) मिलकर आपको लोन देते हैं। बैंक के पास सस्ता पैसा है, और NBFC के पास आप तक पहुँचने का नेटवर्क।
नए नियमों की 3 मुख्य बातें:
- 10% की हिस्सेदारी अनिवार्य: अब लोन देने वाले दोनों संस्थानों को कम से कम 10-10% रिस्क अपने सिर लेना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बैंक सिर्फ पैसा नहीं लगा रहे, बल्कि वे लोन की गुणवत्ता पर भी नजर रख रहे हैं।
- Blended Interest Rate (मिला-जुला ब्याज): अब आपको दो अलग-अलग ब्याज दरें नहीं देखनी होंगी। बैंक और NBFC की दरों को मिलाकर एक ‘सिंगल रेट’ तय होगा, जो आपको पहले ही बता दिया जाएगा।
- एक ही जगह सुनवाई: अब आपको शिकायत के लिए दो दरवाजों पर नहीं भटकना होगा। लोन एग्रीमेंट में एक ‘सिंगल पॉइंट ऑफ कांटेक्ट’ तय होगा।
क्या आपका लोन सस्ता होगा?
यह सबसे जरूरी सवाल है। इसका जवाब आपके बिजनेस की प्रोफाइल पर निर्भर करता है:
किनके लिए लोन सस्ता होगा? (The Good News)
अगर आपका बिजनेस ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है और आपके पास पक्के दस्तावेज हैं, तो आपके लिए दरें 0.5% से 1% तक कम हो सकती हैं।
- वजह: बैंक अब NBFC के साथ मिलकर ज्यादा आक्रामक तरीके से लोन बांटेंगे। सस्ता फंड बैंकों से आएगा, जिससे ओवरऑल ब्याज दर नीचे गिरेगी।
किनके लिए लोन महंगा हो सकता है? (The Reality Check)
अगर आपका बिजनेस नया है या आपके पास पर्याप्त सिक्योरिटी (Collateral) नहीं है, तो आपको शायद राहत न मिले।
- वजह: नए नियमों में ‘डिफ़ॉल्ट’ होने पर दोनों संस्थानों को सख्त रिपोर्टिंग करनी होगी। इस बढ़ते जोखिम और कागजी कार्यवाही (Compliance) के खर्च को बैंक ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
एक्सपर्ट इनसाइट: स्टार्टअप्स और व्यापारियों के लिए क्या बदला?
को-लेंडिंग का यह नया अवतार MSMEs के लिए एक ‘प्राइसिंग फिल्टर’ की तरह काम करेगा।
“अब बैंक केवल ‘पार्टनर’ नहीं हैं, वे ‘रिस्क पार्टनर’ हैं। इसका मतलब है कि अगर आप एक जगह डिफ़ॉल्ट करते हैं, तो दूसरे संस्थान को भी तुरंत पता चल जाएगा। पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन अनुशासन भी जरूरी होगा।”
भविष्य की राह: आपको क्या करना चाहिए?
अगर आप आने वाले समय में बिजनेस लोन लेने की सोच रहे हैं, तो इन 3 सुझावों पर अमल करें:
- बैलेंस शीट सुधारें: चूंकि बैंक अब गहराई से जांच करेंगे, इसलिए अपने बिजनेस के डिजिटल लेन-देन को बढ़ाएं।
- KFS (Key Facts Statement) मांगें: लोन लेते समय बैंक से ‘की फैक्ट्स स्टेटमेंट’ जरूर मांगें। इसमें सभी छिपे हुए चार्ज और सही ब्याज दर (APR) लिखी होती है।
- NBFC का चुनाव सोच-समझकर करें: देखें कि आपकी NBFC का किस बड़े बैंक के साथ टाई-अप है। बड़े बैंकों के साथ जुड़ाव का मतलब है बेहतर सर्विस और शायद कम ब्याज।









