भारतीय आईटी सेक्टर में जहाँ दिग्गज कंपनियां अभी घाटो से जूझ रही हैं, वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर से निकली InfoBeans Technologies ने बाजार में तहलका मचा रखा है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाउड सॉल्यूशंस पर फोकस करने वाली इस कंपनी ने हालिया वित्तीय परिणामों में निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स को चौंका दिया है।
शानदार कमाई और मुनाफे का गणित
कंपनी के ताजा वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो इसकी ग्रोथ की कहानी काफी प्रभावशाली है। वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही (Q2) में कंपनी का रेवेन्यू ₹102 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹95 करोड़ से 8% अधिक है।
सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला आंकड़ा कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) है, जिसमें 201% की सालाना (YoY) बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भी कंपनी ने ₹124.24 करोड़ का रेवेन्यू हासिल कर अपनी कंसिस्टेंसी साबित की है।
AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर बड़ा दांव
InfoBeans खुद को ‘AI-First’ डिजाइन और सॉफ्टवेयर समाधान कंपनी के रूप में स्थापित कर रही है। कंपनी का मुख्य फोकस बड़ी कंपनियों के लिए जटिल बिजनेस समस्याओं को सुलझाना है।
यह कंपनी Salesforce, ServiceNow, Microsoft और UiPath जैसे बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर काम करती है। यही कारण है कि अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व (Middle East) के बाजारों में इसकी पकड़ मजबूत हो रही है। इंदौर जैसे शहर से निकलकर ग्लोबल लेवल पर 1,700 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम खड़ी करना इसकी सफलता का बड़ा प्रमाण है।
निवेशकों के लिए क्यों है चर्चा में?
शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार, InfoBeans का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन काफी बेहतर हुआ है। हालिया तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट मार्जिन लगभग 18-19% के आसपास रहा है। NSE (INFOBEAN) पर लिस्टेड इस स्टॉक में ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेशकों की दिलचस्पी इसलिए बढ़ रही है क्योंकि कंपनी का सालाना रेवेन्यू अब ₹280 करोड़ के आंकड़े को पार कर रहा है।
सरकारी रिपोर्टों और मार्केट सेंटीमेंट्स की मानें तो मिड-कैप आईटी कंपनियों में अब वैल्यू बाइंग दिख रही है। InfoBeans की “Design, Build and Sustain” की रणनीति उसे लंबे समय तक रेवेन्यू जेनरेट करने में मदद करती है, जिससे भविष्य में भी ग्रोथ की संभावनाएं बनी हुई हैं।
इन्फोबिअन्स का बिज़नेस मॉडल
इन्फोबीन्स (InfoBeans) एक ऐसी आईटी कंपनी है जो “पर्दे के पीछे” रहकर दुनिया की दिग्गज कंपनियों को डिजिटल शक्ति देती है। अगर आप इसे समझना चाहते हैं, तो इसे एक ऐसी कंपनी के रूप में देखें जो खुद तो लाइमलाइट में नहीं रहती, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी फॉर्च्यून 500 (Fortune 500) कंपनियों का तकनीकी ढांचा संभालती है।
यहाँ इन्फोबीन्स के बिजनेस मॉडल और उसकी ताकत का एक आसान विश्लेषण है:
1. बड़े नाम, लेकिन ‘सीक्रेट’ रिश्ते
इन्फोबीन्स के साथ सबसे दिलचस्प बात यह है कि वे अपने ग्राहकों के नाम सार्वजनिक नहीं करते। इसका कारण NDA (Confidentiality Agreements) है। बड़ी कंपनियां नहीं चाहतीं कि दुनिया को पता चले कि उनका सॉफ्टवेयर कौन बना रहा है।
- मेटा (Meta/Facebook) के साथ काम: कंपनी के केस-स्टडीज से पता चलता है कि उन्होंने मेटा के साथ मिलकर कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों में इंटरनेट स्पीड सुधारने पर काम किया है।
- वफादार ग्राहक: इनके पास लगभग 80+ बड़े क्लाइंट्स हैं। खास बात यह है कि इनका रिपीट बिजनेस 95% है। यानी, एक बार जो कंपनी इनके पास आती है, वो कहीं और नहीं जाती। इनके टॉप 20 ग्राहकों के साथ रिश्ते 9 साल से भी ज्यादा पुराने हैं।
2. दिग्गज टेक कंपनियों के साथ ‘पार्टनरशिप’ का खेल
इन्फोबीन्स सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं बनाती, बल्कि यह बड़ी टेक प्लेटफॉर्म्स की आधिकारिक पार्टनर भी है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी कंपनी को ‘सेल्सफोर्स’ या ‘सर्वि ServiceNow’ इस्तेमाल करना है, तो इन्फोबीन्स वह एक्सपर्ट है जो इसे सेटअप करेगा।
- Salesforce & ServiceNow: ये इनके सबसे मजबूत स्तंभ हैं। जर्मनी की बड़ी कंपनी ‘agineo’ के साथ हाथ मिलाकर ये अब यूरोप में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।
- Microsoft & UiPath: क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑटोमेशन (RPA) में इनकी विशेषज्ञता इन्हें एक ‘कम्प्लीट पैकेज’ बनाती है।
3. बिजनेस करने का खास तरीका: “छोटा कदम, बड़ी छलांग”
इन्फोबीन्स की ग्रोथ का एक तय पैटर्न है। ये किसी भी कंपनी के साथ एक छोटे से प्रोजेक्ट (जैसे एक साधारण ऐप) से शुरुआत करते हैं। धीरे-धीरे भरोसा जीतकर ये उस कंपनी के करोड़ों डॉलर के प्रोजेक्ट्स हासिल कर लेते हैं।
- AI-First एप्रोच: आज के दौर में ये सिर्फ कोडिंग नहीं कर रहे, बल्कि अपने क्लाइंट्स को खुद जाकर बताते हैं कि वे AI (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल करके अपना खर्च कैसे कम कर सकते हैं।
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InfoBeans विश्लेषण: निवेश और रिस्क के नजरिए से
इन्फोबीन्स का बिजनेस मॉडल जितना सुरक्षित है, उतना ही थोड़ा रिस्की भी:
- फायदा: 70% रेवेन्यू पुराने और भरोसेमंद ग्राहकों से आता है, जो मंदी के समय भी कंपनी को स्थिरता देता है।
- जोखिम: क्योंकि इनका ज्यादातर रेवेन्यू सिर्फ टॉप 20 क्लाइंट्स पर निर्भर है, इसलिए अगर एक भी बड़ा क्लाइंट साथ छोड़ता है, तो कंपनी की कमाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
वर्क कल्चर और सामाजिक सरोकार
सिर्फ बिजनेस ही नहीं, कंपनी अपनी ‘WOW’ वर्क कल्चर के लिए भी जानी जाती है। इंदौर स्थित Crystal IT Park में इसका ऑफिस किसी ग्लोबल टेक कंपनी जैसा अहसास देता है। साथ ही, ‘InfoBeans Foundation’ के जरिए वंचित युवाओं को फ्री आईटी ट्रेनिंग देकर रोजगार के काबिल बनाना इसे एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट इकाई बनाता है।










