इंडिगो एयरलाइंस (IndiGo Airlines), जिसने पिछले दो दशकों में भारतीय एविएशन की तस्वीर बदल दी, आज अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है। ‘ऑन-टाइम’ और ‘हसल-फ्री’ (परेशानी मुक्त) उड़ानों का वादा करने वाली देश की सबसे बड़ी एयरलाइन का सिस्टम दिसंबर 2025 में बुरी तरह लड़खड़ा गया है।
ताजा खबरों के मुताबिक, तकनीकी खामियों और ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते एक ही दिन में 1000 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। आइए जानते हैं आखिर इंडिगो के साथ क्या हुआ और यह यात्रियों व निवेशकों के लिए क्यों चिंता का विषय है।
क्या है ताज़ा मामला? (Recent Crisis)
दिसंबर 2025 की शुरुआत इंडिगो और उसके यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही।
- बड़ा झटका: 5 दिसंबर को इंडिगो ने अपनी कुल उड़ानों में से आधे से ज्यादा यानी 1000 से अधिक फ्लाइट्स कैंसिल कर दीं। इससे पहले भी लगातार कई दिनों तक सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं।
- वजह क्या थी: कंपनी ने इसके पीछे टेक्नोलॉजी ग्लिच, स्टाफ की कमी, खराब मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की पाबंदियों का हवाला दिया।
- असर: हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे। कंपनी के सीईओ पीटर एल्बर्स (Pieter Elbers) को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। शेयर बाजार में इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo की पैरेंट कंपनी) का शेयर 6% तक टूट गया।
IndiGo का उदय: एक रिस्क जिसने इतिहास रच दिया
आज संकट जरूर है, लेकिन इंडिगो की कहानी एक ‘मास्टरक्लास’ है। इसकी शुरुआत 2006 में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने की थी। उन्होंने पहली फ्लाइट उड़ाने से पहले ही एयरबस को 100 विमानों का ऑर्डर देकर सबको चौंका दिया था।
- सफलता का मंत्र: इंडिगो ने सिर्फ एक तरह के विमान (Airbus A320) उड़ाने का फैसला किया। इससे ट्रेनिंग और मेंटेनेंस का खर्च कम हुआ।
- सेल-एंड-लीज मॉडल: विमान खरीदो, उसे बेचो और फिर किराए पर ले लो। इससे कंपनी के पास कैश की कमी नहीं हुई और बैलेंस शीट मजबूत रही।
बाजार का बेताज बादशाह
आंकड़े बताते हैं कि इंडिगो भारत की ही नहीं, दुनिया की सबसे अहम एयरलाइंस में से एक बन चुकी है:
- मार्केट शेयर: भारत के घरेलू बाजार में इंडिगो का कब्जा 62% से ज्यादा है। यानी हर 10 में से 6 यात्री इंडिगो से सफर करते हैं।
- वैैल्यूएशन: हाल ही में इंडिगो का मार्केट कैप ₹2 लाख करोड़ के पार चला गया था, जिससे यह कुछ समय के लिए दुनिया की सबसे वैल्युएबल एयरलाइन भी बनी।
अब ‘लो-कॉस्ट’ से ‘प्रीमियम’ की ओर
सिर्फ सस्ता टिकट बेचना ही अब इंडिगो का मकसद नहीं है। कंपनी अब बिजनेस क्लास (Business Class) की ओर भी कदम बढ़ा रही है।
- चुनिंदा रूट्स पर नई बिजनेस क्लास सीटें शुरू की जा रही हैं।
- कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 तक उसकी 40% क्षमता इंटरनेशनल रूट्स पर इस्तेमाल हो।
- जून 2023 में 500 विमानों का ऐतिहासिक ऑर्डर देकर इंडिगो ने साफ कर दिया है कि वह अगले 10 साल तक रुकने वाली नहीं है।










