भारत की आर्थिक और तकनीकी नीतियाँ अब दुनिया के सामने एक मिसाल बन चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने हाल ही में भारत की “साहसिक और दूरदर्शी” आर्थिक नीतियों की खुलकर प्रशंसा की है।
उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पहचान, वित्तीय समावेशन और नवाचार के क्षेत्र में जो काम किया है, वह विकासशील देशों के लिए प्रेरणा है।
जॉर्जिएवा ने यह बयान वॉशिंगटन में आयोजित एक ग्लोबल पॉलिसी कॉन्फ्रेंस में दिया।
उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल मॉडल केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों को आर्थिक रूप से जोड़ने की क्रांति बन चुका है।
भारत का डिजिटल मॉडल कैसे बदला खेल
IMF प्रमुख ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने डिजिटल ढांचे को जिस तरह बनाया, वह किसी भी देश के लिए रोल मॉडल है।
आधार, यूपीआई और जनधन जैसी पहलों ने भारत को “सबसे बड़े डिजिटल लोकतंत्र” में बदल दिया है।
IMF की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब तक 1.4 अरब लोगों की डिजिटल पहचान तैयार हो चुकी है और लगभग 46 करोड़ लोग सीधे बैंकिंग सिस्टम से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन सिर्फ़ सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों के भरोसे और सहयोग से संभव हुआ।
“भारत ने दिखाया है कि जब सरकार, तकनीक और समाज एक दिशा में काम करते हैं, तो बदलाव असंभव नहीं रहता,” उन्होंने कहा।
महिलाओं और युवाओं की भूमिका
क्रिस्टालिना ने विशेष रूप से यह भी कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सबसे प्रेरणादायक है।
गाँवों में महिलाएँ अब सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ ले रही हैं, और लाखों युवा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का यह मॉडल “Inclusive Growth” का सटीक उदाहरण है — जिसमें तकनीक केवल शहरों तक नहीं, बल्कि हर व्यक्ति तक पहुँच रही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की छवि
IMF प्रमुख के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
जहाँ कई अर्थव्यवस्थाएँ मंदी और अस्थिरता से जूझ रही हैं, वहीं भारत ने स्थिरता और नवाचार दोनों को साथ लेकर चलने का उदाहरण दिया है।
पिछले तीन वर्षों में भारत की GDP ग्रोथ दर औसतन 7% के आसपास रही है — जो दुनिया में सबसे तेज़ मानी जा रही है।
उन्होंने कहा कि “भारत की नीतियाँ सिर्फ़ अपने देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सीख हैं कि कैसे आर्थिक प्रगति के साथ समानता और समावेशन को जोड़ा जा सकता है।”
एक सोच, जिसने दिशा बदल दी
IMF की प्रमुख का यह बयान भारत के लिए गर्व का विषय है।
यह केवल एक तारीफ नहीं, बल्कि उस सोच की मान्यता है जिसने देश के हर नागरिक को डिजिटल क्रांति से जोड़ा है।
आज भारत केवल तकनीक का उपयोग नहीं कर रहा, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
और यही वजह है कि IMF जैसे वैश्विक संस्थान अब यह मानने लगे हैं कि आने वाले दशक में आर्थिक विकास का नया रास्ता भारत से होकर गुज़रेगा।










