GST 2.0 Scrutiny: इन 5 गलतियों से छोटे बिजनेस को मिल सकता है नोटिस

February 5, 2026 10:40 PM
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अगर आप एक छोटे व्यापारी या स्टार्टअप ओनर हैं, तो पुराने दिन भूल जाइए जब माना जाता था कि “छोटा बिजनेस है, तो टैक्स विभाग की नजर नहीं पड़ेगी।” GST 2.0 के इस दौर में अब ‘आदमी’ नहीं, बल्कि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) आपकी फाइलों की जांच कर रहा है।

अब विभाग आपकी टर्नओवर नहीं देखता, बल्कि आपके डेटा में छिपी ‘लाल झंडियां’ (Red Flags) देखता है। यानी अगर आपका टर्नओवर ₹10 लाख भी है, तो भी आपके पास स्क्रूटनी नोटिस आ सकता है।

यहाँ उन 5 गलतियों का विश्लेषण है जो आपके लिए विभाग का नोटिस (Scrutiny Notice) ला सकती हैं:

GST 2.0 में इन 5 गलतियों से बचें: वरना तुरंत आएगा नोटिस

अब ‘स्कैन’ करने वाला कोई अधिकारी नहीं, बल्कि ‘एडवैत’ (ADVAIT) और ‘बिफा’ (BIFA) जैसे एआई सिस्टम हैं, जो सेकंडों में गड़बड़ी पकड़ लेते हैं।

1. ITC का ‘लालच’ और बेमेल डेटा

GST में सबसे ज्यादा नोटिस इसी वजह से आते हैं। आपके सप्लायर ने जो बिल पोर्टल पर चढ़ाया है (GSTR-2B) और जो आप अपनी रिटर्न (GSTR-3B) में क्लेम कर रहे हैं, उनमें जरा सा भी अंतर अब सिस्टम तुरंत पकड़ लेता है।

जोखिम: अगर सप्लायर ने टैक्स नहीं भरा या वह ‘फर्जी’ निकला, तो विभाग आपका ITC ब्लॉक कर सकता है और ब्याज समेत वसूली का नोटिस भेज सकता है।

2. डेटा में विरोधाभास: GSTR-1 और 3B की लड़ाई

कई व्यापारी GSTR-1 (बिक्री की जानकारी) में कुछ और दिखाते हैं और GSTR-3B (टैक्स भुगतान) में कुछ और।

  • विश्लेषण: GST 2.0 का स्मार्ट इंजन इन दोनों फॉर्म की तुलना सेकंडों में कर लेता है। अगर आपकी घोषित सेल और चुकाए गए टैक्स में अंतर मिलता है, तो इसे ‘टैक्स चोरी’ के संदेह में डालकर ASMT-10 नोटिस जारी कर दिया जाता है।

3. कारोबार में अचानक ‘उछाल’ या भारी रिफंड

बिजनेस बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन अगर आपकी सेल अचानक ₹5 लाख से बढ़कर ₹50 लाख हो जाए, तो सिस्टम इसे ‘संदिग्ध’ मानता है।

  • भविष्य का संकेत: इसी तरह, अगर आप लगातार रिफंड क्लेम कर रहे हैं, तो याद रखें कि रिफंड मिलने से पहले अब AI-आधारित गहरी जांच (Detailed Scrutiny) अनिवार्य हो गई है। आपके स्टॉक और इनवॉइस का मिलान मैन्युअल न होकर डिजिटल तरीके से होगा।

4. ई-वे बिल और HSN कोड की अनदेखी

सिर्फ बिल काटना काफी नहीं है। अगर आपके E-Way Bill की वैल्यू और आपकी रिटर्न की वैल्यू में अंतर है, या आप गलत HSN Code (सामान की श्रेणी) का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर फील्ड वेरिफिकेशन (दुकान या गोदाम की जांच) का न्योता है।

5. पर्सनल और बिजनेस ट्रांजैक्शन का घालमेल

आजकल हर छोटा दुकानदार UPI से पेमेंट ले रहा है। लेकिन बड़ी गलती तब होती है जब व्यापारी अपने पर्सनल UPI पर बिजनेस का पैसा मंगाते हैं।

  • एक्सपर्ट टिप: अगर आपकी बैंक स्टेटमेंट में बहुत ज्यादा डिजिटल रिसीप्ट्स दिख रही हैं लेकिन GST रिटर्न में सेल कम दिखाई गई है, तो इसे ‘अघोषित आय’ माना जाएगा। डिजिटल युग में आपका बैंक अकाउंट ही आपकी सबसे बड़ी गवाही है।

व्यापारियों के लिए सर्वाइवल मंत्र:

“GST 2.0 में ‘बचाव’ ही ‘इलाज’ है। अब टैक्स फाइलिंग केवल एक फॉर्म भरना नहीं, बल्कि अपने डेटा को साफ-सुथरा (Data Hygiene) रखने की प्रक्रिया है।”

आगे क्या करें?

  • महीने के अंत में नहीं, बल्कि हर हफ्ते अपने GSTR-2B को चेक करें।
  • सप्लायर का चुनाव सावधानी से करें; चेक करें कि क्या वे अपनी रिटर्न समय पर भर रहे हैं।
  • बिजनेस के लिए अलग बैंक अकाउंट और UPI ID रखें।

Lakshay Pratap

मैं लगभग 4 सालो से ऑनलाइन बिज़नेस और ऑफलाइन बिज़नेस पर काम कर रहा हूँ, और में ऑफलाइन बिज़नेस की सबसे बड़ी समस्या यानी बिज़नेस के लिए जरुरी प्रोसेस और मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा फोकस्ड हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको बहुत फायदा मिलेगा।

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