भारत में हर साल लाखों स्टार्टअप और स्मॉल बिजनेस शुरू होते हैं, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि उनमें से ज्यादातर पहले 2 से 3 सालों में ही बंद हो जाते हैं। इसका कारण हमेशा ‘बिजनेस आइडिया’ का खराब होना नहीं होता, बल्कि ‘बिजनेस के गणित’ का गलत होना होता है।
क्या आपको पता है कि अगले 6 महीनों में आपका खर्च कितना होगा? क्या आपके पास इतना कैश है कि अगर सेल्स कम हो जाए, तो भी आप कर्मचारियों की सैलरी दे सकें? या फिर आपको यह पता है कि आपको ‘ब्रेक-ईवन’ (Break-Even) तक पहुंचने के लिए कितने यूनिट माल बेचना होगा?
इन सभी सवालों का जवाब एक ही दस्तावेज में छिपा होता है – फाइनेंशियल मॉडल (Financial Model)। यह आपके बिजनेस का वह ‘GPS’ है जो बताता है कि आप अभी कहाँ खड़े हैं, आपको कहाँ जाना है, और वहां तक पहुँचने के लिए रास्ते में कितना पेट्रोल (पैसा) लगेगा।
आज के इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि एक स्मॉल बिजनेस ओनर अपनी कंपनी का फाइनेंशियल मॉडल कैसे तैयार कर सकता है, ताकि वह न केवल बिजनेस को डूबने से बचा सके, बल्कि निवेशकों (Investors) से फंडिंग भी हासिल कर सके।
हवा-हवाई सपने नहीं, अब आंकड़ों पर होगी बात
अक्सर नए उद्यमी जोश में बिजनेस शुरू तो कर देते हैं, लेकिन उनका पूरा प्लान सिर्फ ‘अनुमान’ पर आधारित होता है। फाइनेंशियल मॉडल उस अनुमान को ‘हकीकत’ के ढांचे में ढालने का काम करता है।
सरल शब्दों में कहें तो, फाइनेंशियल मॉडल आपके बिजनेस के प्रदर्शन का एक गणितीय प्रतिनिधित्व (Mathematical Representation) है। यह मुख्य रूप से तीन चीजों पर फोकस करता है:
- कमाई का जरिया: पैसा आएगा कहाँ से?
- जरूरतें: उन लक्ष्यों को पाने के लिए किन संसाधनों (मशीन, मैनपावर) की जरूरत होगी?
- ऑपरेटिंग बजट: बिजनेस चलाने का रोजमर्रा का खर्च क्या होगा?
वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि एक मजबूत फाइनेंशियल मॉडल सिर्फ बैंकों या निवेशकों को दिखाने के लिए नहीं होता, बल्कि यह खुद उद्यमी को यह समझने में मदद करता है कि क्या उसका बिजनेस मॉडल वास्तव में ‘व्यावहारिक’ (Viable) है या नहीं।
वो तीन दस्तावेज जो आपकी कंपनी की ‘कुंडली’ तय करते हैं

एक प्रोफेशनल फाइनेंशियल मॉडल तीन प्रमुख स्तंभों पर टिका होता है। इसे वित्तीय भाषा में ‘थ्री-स्टेटमेंट मॉडल’ कहा जाता है। आइए इन्हें आसान हिंदी में समझते हैं:
1. प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट (Income Statement)
इसे आम बोलचाल में ‘लाभ-हानि खाता’ कहते हैं। यह बताता है कि एक निश्चित अवधि (जैसे एक महीना या एक साल) में आपने कितना कमाया और कितना गंवाया।
- रेवेन्यू (Revenue): आपकी कुल बिक्री।
- COGS (Cost of Goods Sold): माल बनाने या खरीदने की सीधी लागत।
- ऑपरेटिंग खर्च: ऑफिस किराया, मार्केटिंग, सैलरी।
- नेट प्रॉफिट: सब कुछ घटाने के बाद हाथ में क्या बचा।
2. बैलेंस शीट (Balance Sheet)
यह आपकी कंपनी की वित्तीय सेहत का ‘एक्स-रे’ है। यह एक विशेष तारीख पर आपकी स्थिति बताती है:
- एसेट्स (Assets): आपके पास क्या है? (कैश, मशीनें, इन्वेंट्री)।
- लायबिलिटीज (Liabilities): आपको किसका पैसा चुकाना है? (लोन, उधारी)।
- इक्विटी (Equity): बिजनेस में आपकी खुद की वैल्यू कितनी बची है।
3. कैश फ्लो स्टेटमेंट (Cash Flow Statement)
यह सबसे महत्वपूर्ण है। याद रखें, ‘प्रॉफिट’ और ‘कैश’ एक ही चीज नहीं हैं। हो सकता है कि कागज पर आपने 5 लाख का मुनाफा कमाया हो, लेकिन अगर ग्राहकों ने पेमेंट नहीं किया, तो आपके पास बिजली का बिल भरने के लिए कैश नहीं होगा। कैश फ्लो स्टेटमेंट यह ट्रैक करता है कि वास्तव में कितना रोकड़ा (Cash) बैंक में आया और कितना गया। कई प्रॉफिटेबल बिजनेस सिर्फ इसलिए बंद हो जाते हैं क्योंकि उनके पास समय पर खर्च चलाने के लिए लिक्विड कैश नहीं होता।
मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया: शुरुआत कहाँ से करें?

अपना खुद का फाइनेंशियल मॉडल बनाने के लिए आपको CA होने की जरूरत नहीं है, बस आपको अपने बिजनेस की समझ होनी चाहिए। यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया दी गई है:
चरण 1: रणनीतिक योजना (Strategic Plan) बनाना
एक्सेल शीट खोलने से पहले एक पेपर पर अपनी रणनीति लिखें।
- अगले 1 साल में आप क्या हासिल करना चाहते हैं?
- क्या आपको नई मशीनें खरीदनी हैं?
- क्या आपको नए स्टाफ की भर्ती करनी है?इन फैसलों का सीधा असर आपके पैसे पर पड़ेगा।
चरण 2: पुराने आंकड़े इकट्ठा करें (Historical Data)
अगर आपका बिजनेस पुराना है, तो पिछले 1-3 साल के बैंक स्टेटमेंट और बही-खाते निकालें। देखें कि सीजन के हिसाब से बिक्री कब बढ़ती है और कब घटती है। अगर आप स्टार्टअप हैं, तो मार्केट रिसर्च और इंडस्ट्री बेंचमार्क (प्रतिस्पर्धियों का डेटा) का सहारा लें।
चरण 3: मान्यताओं (Assumptions) का खेल
फाइनेंशियल मॉडलिंग का सबसे ट्रिकी हिस्सा यही है—अनुमान लगाना (Assumptions)। आपका पूरा मॉडल इस बात पर निर्भर करेगा कि आप भविष्य के बारे में क्या सोच रहे हैं। इसमें शामिल करें:
- रेवेन्यू: आप हर महीने कितने ग्राहक जोड़ पाएंगे? क्या आप दाम बढ़ाएंगे?
- लागत: क्या कच्चे माल की कीमत बढ़ेगी? (महंगाई को न भूलें)।
- ग्रोथ: क्या आपकी ग्रोथ 10% होगी या 50%?
विशेषज्ञ सलाह: अपने अनुमानों को हमेशा ‘तर्क’ के साथ लिखें। अगर आप कह रहे हैं कि अगले महीने बिक्री 20% बढ़ेगी, तो उसका कारण भी लिखें (जैसे—त्योहारी सीजन या नई मार्केटिंग कैंपेन)।
चरण 4: इनकम स्टेटमेंट तैयार करना
अपने अनुमानों के आधार पर बिक्री का प्रोजेक्टशन करें। इसमें से ‘COGS’ (बनाने की लागत) घटाएं। फिर फिक्स्ड खर्च (किराया, सैलरी) घटाएं। अंत में टैक्स घटाने के बाद आपको ‘नेट इनकम’ मिलेगी।
चरण 5: बैलेंस शीट और कैश फ्लो को लिंक करना
अब अपनी इनकम स्टेटमेंट के आधार पर बैलेंस शीट अपडेट करें। जैसे, अगर आपने बिक्री तो दिखाई, लेकिन पैसा 30 दिन बाद मिलेगा, तो वह बैलेंस शीट में ‘Accounts Receivable’ (लेनी बाकी रकम) में दिखेगा। कैश फ्लो स्टेटमेंट में यह दिखाएं कि पैसा कब जेब में आएगा।
कब आपकी जेब से पैसा लगना बंद होगा? (Break-Even Analysis)
फाइनेंशियल मॉडल का एक अनिवार्य हिस्सा है—ब्रेक-ईवन एनालिसिस। यह वह जादुई आंकड़ा है जो बताता है कि आपको ‘न मुनाफा, न घाटा’ की स्थिति में आने के लिए कितना माल बेचना होगा।
फार्मूला:
{ Break Even Point = Fixed Costs / Average Price – VariableCostperUnit }
उदाहरण:
मान लीजिए आप एक सॉफ्टवेयर (SaaS) बेचते हैं।
- आपका मासिक फिक्स्ड खर्च (सैलरी, किराया): ₹72,800
- एक ग्राहक से कमाई (Price): ₹149
- एक ग्राहक पर खर्च (Variable Cost): ₹31
तो, ₹72,800 ÷ (149 – 31) = 617 ग्राहक।
यानी, जब तक आपके पास 617 पेड कस्टमर नहीं होंगे, आप अपनी जेब से पैसा भर रहे होंगे। जैसे ही 618वां ग्राहक आएगा, आप मुनाफा कमाना शुरू करेंगे। यह नंबर आपको सेल्स टारगेट सेट करने में मदद करता है।
अक्सर होने वाली गलतियां जो मॉडल बिगाड़ देती हैं
फाइनेंशियल मॉडल बनाते समय होशियार से होशियार फाउंडर भी ये गलतियां कर बैठते हैं:
- अत्यधिक आशावाद (Over-Optimism): यह सोचना कि “पूरे भारत में 100 करोड़ लोग हैं, अगर 1% ने भी मेरा प्रोडक्ट ले लिया तो मैं करोड़पति बन जाऊंगा।” यह टॉप-डाउन एप्रोच गलत है। हकीकत के धरातल पर सोचें कि आप एक महीने में कितने लोगों तक पहुँच सकते हैं।
- कैश टाइमिंग को नजरअंदाज करना: आपने आज 10 लाख का माल बेचा, लेकिन पेमेंट 90 दिन बाद मिलेगा। बीच के 3 महीनों में स्टाफ को सैलरी कैसे देंगे? इस ‘गैप’ को मॉडल में न डालना सबसे बड़ी भूल है।
- ग्राहक जोड़ने की लागत (CAC) को कम आंकना: मार्केटिंग फ्री नहीं होती। एक ग्राहक को लाने में कितना खर्च हो रहा है, इसका सही हिसाब न लगाने से प्रॉफिट मार्जिन खत्म हो जाता है।
- खर्चों को ‘सीधा’ (Linear) मानना: खर्च हमेशा सीधी रेखा में नहीं बढ़ते। कभी-कभी ग्रोथ के लिए अचानक बड़ा निवेश करना पड़ता है, जिससे कुछ समय के लिए प्रॉफिट गिर जाता है।
यह भी पढ़े : International Logistics – इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स से सामान कैसे मंगवाएं और भेजें (2025)
एक्सेल या गूगल शीट्स: किसका इस्तेमाल करें?
अब सवाल आता है कि यह मॉडल बनाएँ किस पर?
- Microsoft Excel: यह फाइनेंशियल मॉडलिंग का ‘बाहुबली’ है। अगर आपका डेटा बहुत ज्यादा है और आपको जटिल गणनाएं (Complex Calculations) करनी हैं, तो एक्सेल सबसे बेस्ट है।
- Google Sheets: यह छोटे बिजनेस और टीम सहयोग (Collaboration) के लिए शानदार है। अगर आप चाहते हैं कि आप और आपका अकाउंटेंट एक साथ काम करें, तो इसे चुनें।
- रेडीमेड टेम्प्लेट्स: इंटरनेट पर Slidebean या Ramp जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आपकी इंडस्ट्री (जैसे ई-कॉमर्स, सर्विस, या मैन्युफैक्चरिंग) के हिसाब से बने-बनाए टेम्प्लेट्स मिल जाते हैं। शुरुआत करने के लिए ये बहुत मददगार होते हैं।
भविष्य की तैयारी: सिनेरियो एनालिसिस (Scenario Analysis)
जीवन अनिश्चित है, और बिजनेस भी। इसलिए, अपना मॉडल सिर्फ एक स्थिति के लिए न बनाएं। तीन परिदृश्य (Scenarios) तैयार करें:
- Best Case: अगर सब कुछ बहुत अच्छा रहा, तो क्या होगा?
- Worst Case: अगर मार्केट गिर गया या कोई बड़ी मुसीबत आ गई, तो क्या हमारे पास सर्वाइव करने के लिए पैसा है?
- Most Likely Case: जो वास्तव में होने की सबसे ज्यादा उम्मीद है।
यह तैयारी आपको बुरे वक्त में घबराने से बचाती है।
सफलता का मंत्र: इसे अपडेट करते रहें
फाइनेंशियल मॉडल कोई स्कूल का होमवर्क नहीं है जिसे एक बार करके भूल जाना है। यह एक ‘जीवित दस्तावेज’ (Living Document) है।
- मासिक समीक्षा: हर महीने के अंत में देखें कि आपने जो सोचा था (Projection) और जो वास्तव में हुआ (Actuals), उसमें कितना अंतर है।
- तिमाही बदलाव: हर तीन महीने में अपने अनुमानों को अपडेट करें। अगर कच्चा माल महंगा हो गया है, तो उसे मॉडल में बदलें।
अंत में, एक अच्छा फाइनेंशियल मॉडल आपको अंधेरे में तीर चलाने से रोकता है। यह आपको आत्मविश्वास देता है कि आप अपने बिजनेस की हर नब्ज को पहचानते हैं। जब आप बैंकर या निवेशक के सामने यह मॉडल रखते हैं, तो वे सिर्फ आपके आईडिया में नहीं, बल्कि आपकी ‘बिजनेस समझ’ में निवेश करते हैं।







