भारत के क्विक-कॉमर्स सेक्टर में एक बड़े युग का अंत हो गया है। मार्केट लीडर Blinkit ने आधिकारिक तौर पर अपनी सबसे बड़ी पहचान यानी “10 मिनट डिलीवरी” के वादे को अपनी ब्रांडिंग और ऐप से हटा दिया है। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और गिग वर्कर्स के भारी विरोध के बाद कंपनी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।
सरकार का सख्त आदेश और Blinkit का यू-टर्न
मंगलवार को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार ने कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ’10-मिनट’ जैसे सख्त टाइम-लिमिट वाले विज्ञापनों को तुरंत हटाया जाए क्योंकि इससे डिलीवरी पार्टनर्स पर मानसिक दबाव और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।
निर्देश मिलते ही Blinkit ने अपनी टैगलाइन बदल दी है। अब कंपनी का नया नारा “30,000+ products delivered at your doorstep” है, जिसमें समय का कोई जिक्र नहीं है।
क्यों हटाया गया 10 मिनट का वादा?
इस बदलाव के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
- सरकार का दखल: श्रम मंत्रालय का मानना है कि ’10 मिनट’ का दावा गिग वर्कर्स की सुरक्षा और वेलफेयर के खिलाफ है।
- राइडर्स की हड़ताल: दिसंबर 2025 के अंत में करीब 2 लाख से ज्यादा राइडर्स ने सुरक्षा और कम वेतन को लेकर देशभर में हड़ताल की थी।
- संसद में गूंजा मुद्दा: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत कई नेताओं ने संसद में इन डिलीवरी पार्टनर्स की “पीड़ा और मजबूरी” का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया।
राइडर्स, सड़क सुरक्षा और ग्राहक – किसे क्या फायदा होगा?
- डिलीवरी राइडर्स: सबसे बड़ा फायदा उन लाखों राइडर्स को होगा जो घड़ी की सुइयों के साथ रेस लगाने को मजबूर थे। अब ऐप पर ‘काउंटडाउन टाइमर’ न होने से वे सुरक्षित तरीके से ड्राइविंग कर सकेंगे।
- सड़क सुरक्षा: विशेषज्ञों का मानना है कि समय का दबाव हटने से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों में कमी आएगी।
- ग्राहक: ग्राहकों को अब सटीक समय (ETA) दिखाया जाएगा, न कि कोई फर्जी वादा। हालांकि, डार्क स्टोर्स पास होने पर डिलीवरी अभी भी 10-15 मिनट में ही मिल सकती है, बस अब इसकी कोई लिखित गारंटी नहीं होगी।
क्या अब डिलीवरी धीमी हो जाएगी?
सरकारी रिपोर्ट बताती है कि इस बदलाव से ऑपरेशंस पर असर नहीं पड़ेगा। कंपनियों का तर्क है कि वे अपने ‘Dark Store’ नेटवर्क को इतना मजबूत कर चुके हैं कि पास के इलाकों में डिलीवरी अपने आप ही जल्दी हो जाती है। यानी, आपको सामान अभी भी जल्दी ही मिलेगा, लेकिन कंपनी अब ‘स्पीड’ की जगह ‘वैरायटी’ (प्रोडक्ट्स की संख्या) पर मार्केटिंग करेगी।
बड़ा सवाल – क्या इससे ब्लिंकिट या जेप्टो की सेल गिर जाएगी?
जवाब है: शायद नहीं।
- सुविधा (Convenience) ही राजा है: भारतीय ग्राहकों को 10 मिनट की जगह अगर 15 या 20 मिनट में भी सामान मिलता है, तो वे एप डिलीट नहीं करेंगे। असली वैल्यू “घर बैठे सामान मिलना” है, न कि उसे “सुपरमैन की रफ़्तार” से पाना।
- स्केल बनाम स्पीड: अब कंपनियों का फोकस “कितनी जल्दी” से हटकर “क्या-क्या मिल सकता है” पर शिफ्ट होगा। यही वजह है कि ब्लिंकिट अब 10,000 की जगह 30,000 प्रोडक्ट्स की बात कर रहा है। यह बिजनेस के परिपक्व (Mature) होने की निशानी है।










