विशेषज्ञों की क्या है सलाह?
बाजार के दिग्गजों और ट्रेडिंग विशेषज्ञों का दृढ़ता से मानना है कि इंट्राडे स्क्रीनर सिर्फ ‘स्टॉक सिलेक्शन’ (Stock Selection) के लिए है। आपकी एंट्री, स्टॉप-लॉस (Stop-Loss) और टारगेट हमेशा चार्ट्स देखकर ही तय होने चाहिए।
उदाहरण के लिए, रेजिस्टेंस लेवल टूटने के बाद और कैंडल क्लोज होने पर ही एंट्री लें। अपना स्टॉप-लॉस हाल ही के स्विंग लो या VWAP के नीचे रखें ताकि रिस्क कम रहे।
चाहे आप कितना भी बेहतरीन स्क्रीनर इस्तेमाल कर लें, बिना रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) के शेयर बाजार में लंबी रेस का घोड़ा नहीं बना जा सकता।
नए ट्रेडर्स के लिए सबसे अच्छी और सुरक्षित रणनीति यह है कि Chartink या NiftyTrader से स्टॉक्स स्कैन करें और फिर TradingView पर उनका सेटअप वेरिफाई करें। अनुशासन ही बाजार में सफलता की इकलौती कुंजी है।
इंट्राडे स्क्रीनर से जुड़े कुछ जरुरी सवाल
इंट्राडे स्क्रीनर क्या होता है?
इंट्राडे स्क्रीनर एक रियल-टाइम स्टॉक फिल्टर टूल है, जो लाइव मार्केट के दौरान आपकी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी (जैसे हाई वॉल्यूम, ब्रेकआउट) के आधार पर बेस्ट स्टॉक्स खोजकर निकालता है।
भारत में सबसे अच्छा इंट्राडे स्क्रीनर कौन सा है?
भारतीय बाजार के लिए Chartink, IntradayScreener.com, NiftyTrader और Groww Intraday Screener सबसे लोकप्रिय और बेहतरीन प्लेटफॉर्म माने जाते हैं।
स्क्रीनर का इस्तेमाल किस समय करना चाहिए?
बाजार खुलने के तुरंत बाद स्क्रीनर का उपयोग करने से बचें। शुरुआती वोलैटिलिटी कम होने के बाद, सुबह 9:30 से 9:45 बजे के बीच इसे रन करना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई किसी भी रणनीति, टूल या प्लेटफॉर्म का उल्लेख निवेश की सलाह (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाजार में निवेश और इंट्राडे ट्रेडिंग उच्च जोखिम से जुड़ी होती है, जिसमें पूंजी का नुकसान संभव है। किसी भी ट्रेड या निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें और स्वयं की रिसर्च अवश्य करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी वित्तीय हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।










