आपके फोन में आएगा AI! $10 ट्रिलियन के डेटा सेंटर्स क्यों खत्म हो सकते हैं?

January 10, 2026 8:56 PM
aravind srinivas perplexity ai disruption warning data centers

AI की दुनिया में तहलका मचाने वाले Perplexity AI के CEO अरविंद श्रीनिवास (Aravind Srinivas) ने एक ऐसी चेतावनी दी है जिसने दुनिया के बड़े टेक दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। जहां एक तरफ Google और Microsoft जैसे दिग्गज अरबों डॉलर खर्च करके बड़े-बड़े डेटा सेंटर बना रहे हैं, वहीं अरविंद का मानना है कि ये विशालकाय इमारतें जल्द ही ‘कबाड़’ साबित हो सकती हैं।

जनवरी 2026 में दिए एक ताजा इंटरव्यू में उन्होंने इसे “On-Device AI Shift” का नाम दिया है। आइए समझते हैं कि कैसे आपके हाथ में मौजूद एक छोटा सा फोन पूरी दुनिया के इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को बदल सकता है।

क्या है खबर?

अरविंद श्रीनिवास के अनुसार, भविष्य क्लाउड (Cloud) का नहीं, बल्कि On-Device AI का है। फिलहाल, जब आप ChatGPT या Perplexity से कुछ पूछते हैं, तो आपका सवाल दूर बैठे किसी विशाल डेटा सेंटर (Data Center) में जाता है, वहां प्रोसेस होता है और फिर वापस आता है। इसमें बिजली, पानी और अरबों की मशीनरी लगती है।

लेकिन अब ऐसी चिप्स आ रही हैं जो AI मॉडल्स को सीधे आपके फोन या लैपटॉप पर चला सकेंगी। अरविंद ने इसे डेटा सेंटर इंडस्ट्री के लिए $10 ट्रिलियन का सवाल बताया है। अगर इंटेलिजेंस सीधे चिप पर पैक हो गई, तो किसी को महंगे सेंटर्स की जरूरत नहीं पड़ेगी।

किसे होगा फायदा?

इस बदलाव से सबसे बड़ा फायदा आम यूजर्स को होगा:

  • प्राइवेसी (Privacy): आपका डेटा कभी आपका डिवाइस छोड़कर बाहर नहीं जाएगा। सब कुछ आपके फोन के अंदर ही प्रोसेस होगा।
  • स्पीड: डेटा सेंटर तक रिक्वेस्ट भेजने और वापस आने का समय (Latency) खत्म हो जाएगा, जिससे AI पलक झपकते ही जवाब देगा।
  • पर्सनलाइजेशन: आपका AI आपका ‘डिजिटल ब्रेन’ बन जाएगा, जो आपकी आदतों को लोकल लेवल पर सीखेगा और सुरक्षित रहेगा।

क्या है Perplexity का ‘India Plan’?

भारत अब Perplexity के लिए पूरी दुनिया में सबसे बड़ा यूजर बेस बन चुका है। अरविंद ने खुलासा किया कि वे भारत में एक लोकल स्टार्टअप फंड लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

  • Airtel के साथ पार्टनरशिप: एयरटेल के साथ मिलकर परप्लेक्सिटी ने भारत के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बनाई है।
  • लोकल टैलेंट: अरविंद भारत में एक बड़ी टीम तैयार करना चाहते हैं ताकि भारतीय भाषाओं और कॉन्टेक्स्ट को समझने वाला AI बनाया जा सके।

क्यों खास है Comet ब्राउज़र?

टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार, Perplexity का नया Comet Browser गूगल के क्रोम (Chrome) के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। यह सिर्फ एक ब्राउज़र नहीं, बल्कि एक ‘एजेंट’ है। यह आपके लिए ईमेल लिख सकता है, शॉपिंग रिसर्च कर सकता है और आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री को एक ‘वेक्टर डेटाबेस’ में बदलकर आपको पुरानी चीजें याद दिलाने में मदद करता है।

Lakshay Pratap

मैं लगभग 4 सालो से ऑनलाइन बिज़नेस और ऑफलाइन बिज़नेस पर काम कर रहा हूँ, और में ऑफलाइन बिज़नेस की सबसे बड़ी समस्या यानी बिज़नेस के लिए जरुरी प्रोसेस और मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा फोकस्ड हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको बहुत फायदा मिलेगा।

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