राजस्थान की वित्त मंत्री दीया कुमारी ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है। इस बजट में सरकार ने ‘विकसित राजस्थान 2047’ के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते हुए छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए तिजोरी खोल दी है।
स्टैम्प ड्यूटी में कटौती: बिजनेस डील्स अब होंगी सस्ती
राजस्थान सरकार ने मध्यम वर्ग और बिजनेस इंवेस्टर्स को बड़ी राहत देते हुए स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में भारी कटौती की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, लोन रजिस्ट्री और प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन पर लगने वाले शुल्क को तर्कसंगत बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रियल एस्टेट और बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की लागत कम होगी, जिससे नए स्टार्टअप्स के लिए ऑफिस स्पेस और जमीन लेना किफायती हो जाएगा।
RIPS के दायरे में सर्विस सेक्टर: IT और लॉजिस्टिक्स की चांदी
अब तक राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) का मुख्य फोकस मैन्युफैक्चरिंग पर रहता था। लेकिन बजट 2026-27 में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए सर्विस सेक्टर को भी इसके दायरे में लाया गया है। इसका मतलब है कि अब IT, कंसल्टिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले MSMEs को भी भारी सब्सिडी और इंसेंटिव मिलेंगे।
वर्क ऑर्डर पर फाइनेंस: कैश फ्लो की टेंशन खत्म
अक्सर छोटे ठेकेदारों और उद्यमियों को सरकारी वर्क ऑर्डर मिलने के बाद काम शुरू करने के लिए पैसों की किल्लत होती है। इसे दूर करने के लिए सरकार ने बैंकों और NBFCs के माध्यम से वर्किंग कैपिटल लोन उपलब्ध कराने की नई व्यवस्था की घोषणा की है। अब वर्क ऑर्डर के आधार पर उचित दरों पर लोन मिल सकेगा, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी नहीं होगी।
सौर ऊर्जा और EV इकोसिस्टम में निवेश के मौके
रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में राजस्थान को ग्लोबल हब बनाने के लिए बीकानेर और जैसलमेर में 3,000 करोड़ रुपये की लागत से नए सोलर पार्क बनेंगे। इसके साथ ही प्रदेश में 60 नए CNG स्टेशन और 250 EV चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जाएंगे। यह कदम उन स्टार्टअप्स के लिए बड़ा अवसर है जो क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल मेंटेनेंस के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
Jan Vishwas Act 2.0: खत्म होगा कानूनी डर
व्यापारियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ और फालतू के कंप्लायंस से बचाने के लिए राजस्थान जन विश्वास एक्ट 2.0 लाया जा रहा है। इसमें कई छोटे बिजनेस अपराधों को डीक्रिमिनलाइज (Decriminalize) किया जाएगा। सरकारी रिपोर्ट बताती है कि इस कानून के आने से लगभग 300 से ज्यादा प्रावधानों में सुधार होगा, जिससे उद्यमियों को जेल का डर नहीं बल्कि सुधार का मौका मिलेगा।












