केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और इस बार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की निगाहें सीधे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। देश की जीडीपी में करीब 30% योगदान देने वाले इस सेक्टर ने सरकार के सामने GST नियमों में सरलता, रिफंड में तेजी और वर्किंग कैपिटल तक आसान पहुंच की वकालत की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बजट में इन मांगों पर मुहर लगती है, तो छोटे उद्योगों के पास नकदी (Cash-flow) की कमी दूर होगी और वे नए निवेश के लिए सक्षम हो सकेंगे।
GST कंप्लायंस: ‘महीने-महीने का झंझट खत्म हो
छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी मांग है कि सूक्ष्म उद्योगों के लिए GST रिटर्न फाइलिंग को मासिक (Monthly) के बजाय तिमाही (Quarterly) किया जाए। अक्सर छोटे उद्यमी तकनीकी गलतियों के कारण भारी जुर्माने का शिकार हो जाते हैं। एमएसएमई संगठनों ने मांग की है कि “ईमानदार गलतियों” पर भारी पेनल्टी लगाने के बजाय नियमों को लचीला बनाया जाए। इसके अलावा, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और तेज करने की उम्मीद है ताकि नए स्टार्टअप्स को शुरुआत में ही कानूनी अड़चनों का सामना न करना पड़े।
फंसा हुआ पैसा निकालने की गुहार
MSMEs के लिए सबसे बड़ी चुनौती है Inverted Duty Structure (जहां इनपुट पर टैक्स ज्यादा और आउटपुट पर कम होता है) के कारण फंसा हुआ GST रिफंड। कई यूनिट्स का वर्किंग कैपिटल 3 से 6 महीनों तक रिफंड के इंतजार में अटका रहता है।
- मांग: रिफंड के लिए एक निश्चित समय सीमा तय हो।
- उम्मीद: सरकार ‘प्रोविजनल रिफंड’ की सुविधा दे सकती है, जिससे रिफंड का एक हिस्सा आवेदन के तुरंत बाद मिल जाए।
45 दिन में पेमेंट और आसान लोन
बिजनेस को चलाने के लिए नकदी की पाइपलाइन यानी ‘वर्किंग कैपिटल’ का सुचारू होना जरूरी है। MSMEs चाहते हैं कि सरकार 45 दिनों के भीतर भुगतान के नियम को और सख्ती से लागू करे। साथ ही, TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का दायरा बढ़ाया जाए ताकि उद्यमी अपने इनवॉइस (बिल) के बदले तुरंत बैंकों से पैसा ले सकें और उन्हें साहूकारों के पास न जाना पड़े।
बजट के बाद क्या बदल सकता है?
| सेक्टर | संभावित लाभ |
| मैन्युफैक्चरिंग | मशीनरी पर लगे GST का तुरंत रिफंड मिलने से विस्तार करना सस्ता होगा। |
| सर्विस और ट्रेडिंग | डिस्काउंट और वैल्यूएशन के नियमों में स्पष्टता से कानूनी मुकदमों (Litigation) में कमी आएगी। |
| एक्सपोर्ट | बिना किसी न्यूनतम सीमा के रिफंड मिलने से छोटे एक्सपोर्टर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला कर पाएंगे। |










