International Logistics – इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स से सामान कैसे मंगवाएं और भेजें (2025)

August 27, 2025 8:19 PM
इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया का फ्लोचार्ट

2025 में भारत का इंटरनेशनल ट्रेड और ई-कॉमर्स सेक्टर ₹50 लाख करोड़ से अधिक का अनुमानित आकार छू रहा है। ऐसे में अगर आप कोई ऐसा प्रोडक्ट बना रहे हैं जिसकी विदेशों में अच्छी मांग है, जैसे कि हैंडलूम, आयुर्वेदिक उत्पाद, मसाले, टेक्सटाइल, जूते या इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, और अभी भी केवल भारत में ही सीमित व्यापार कर रहे हैं, तो आप वैश्विक स्तर पर एक बड़ा अवसर गंवा रहे हैं।

International Logistics से जुड़े सभी पहलुओं को समझना आवश्यक है, ताकि आप व्यापार में सफलता प्राप्त कर सकें।

International Logistics की मदद से अब विदेशों में सामान भेजना या मंगवाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इसके लिए बस कुछ जरूरी दस्तावेज़, प्रक्रियाएं और सरकारी नियमों की जानकारी होनी चाहिए। इस ब्लॉग में हम 2025 के अनुसार International Logistics से जुड़ी पूरी जानकारी साझा करेंगे, जैसे:

• जरूरी दस्तावेज़ जैसे IEC और Certificate of Origin
• कस्टम और कार्गो से जुड़े नियम
• भारत से बाहर माल भेजने और मंगवाने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
• और व्यापारियों के लिए उपयोगी सुझाव

International Logistics: सामान मंगवाने की पूरी जानकारी

अगर आप विदेश से भारत में कोई सामान मंगवाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको उस उत्पाद का HS Code जानना होता है। यह एक यूनिक कोड होता है, जो किसी भी प्रोडक्ट की पहचान, वर्गीकरण और उस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी तय करने में मदद करता है।

इसके बाद जरूरी होता है IEC (Importer Exporter Code) बनवाना, जो DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय) द्वारा जारी किया जाता है। यह कोड आपके व्यवसाय को आधिकारिक रूप से आयात-निर्यात के योग्य बनाता है।

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सामान मंगवाने पर सरकार द्वारा कई प्रकार की कस्टम ड्यूटी लगाई जाती है, जैसे:

  • बेसिक कस्टम ड्यूटी
  • IGST (इंटीग्रेटेड GST)
  • अन्य सेस और चार्जेज

इन ड्यूटीज़ की गणना पहले से कर लेना लाभकारी होता है ताकि बजट में कोई गड़बड़ी न हो।

अब बारी आती है शिपमेंट की। इसके लिए आपको एक भरोसेमंद इंटरनेशनल कूरियर या कार्गो सर्विस चुननी चाहिए, जैसे:

  • DHL (Dalsey, Hillblom and Lynn)
  • FedEx (Federal Express)
  • Maersk
  • UPS (United Parcel Service)

ये कंपनियां आपके सामान को विदेश से भारत तक सुरक्षित पहुंचाने में मदद करती हैं।

शिपमेंट के साथ आपको कुछ जरूरी दस्तावेज़ तैयार रखने होते हैं, जैसे:

  • इनवॉइस (Invoice)
  • पैकिंग लिस्ट (Packing List)
  • Certificate of Origin
  • Certificate of Analysis (अगर जरूरी हो)
  • Purchase Licence (कुछ खास उत्पादों के लिए)

जब आपका सामान भारत पहुंचता है, तब कस्टम विभाग उसकी जांच करता है। इसके लिए आपको ICEGATE पोर्टल के जरिए कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सभी दस्तावेज़ सही पाए जाने पर सामान को आपके पते तक पहुंचाने की अनुमति मिल जाती है।

विदेश से भारत में सामान मंगवाने के लिए कुछ जरूरी स्टेप्स होते हैं:

Import करने की Step-by-Step प्रक्रिया:

  1. HS Code खोजें
    हर उत्पाद का एक यूनिक कोड होता है जिसे HSN (Harmonized System Nomenclature) कहते हैं। यह कस्टम ड्यूटी और क्लासिफिकेशन के लिए जरूरी है।
  2. IEC (Importer Exporter Code) बनवाएं
    DGFT (Directorate General of Foreign Trade) से IEC Code बनवाना अनिवार्य है।
  3. Custom Duty की गणना करें
    आयात किए गए सामान पर विभिन्न प्रकार की कस्टम ड्यूटी लगती है, जैसे:
    • Basic Custom Duty
    • IGST
    • Cess या अन्य शुल्क
  4. शिपिंग पार्टनर का चयन करें
    विश्वसनीय International Courier & Cargo Services चुनें जैसे:
    • DHL
    • FedEx
    • Maersk (Sea Cargo)
    • UPS
  5. जरूरी डॉक्युमेंट तैयार करें
    • Invoice
    • Packing List
    • Certificate of Origin
    • Purchase Licence (अगर जरूरत हो)
    • Certificate of Analysis (COA)
  6. Custom Clearance और ट्रैकिंग
    शिपमेंट के भारत पहुंचने के बाद, ICEGATE पर कस्टम क्लीयरेंस फाइल किया जाता है।
    👉 ICEGATE पोर्टल

इंटरनेशनल लॉजिस्टिक से सामान भेजने की पूरी जानकारी

अगर आप भारत में कोई ऐसा उत्पाद बनाते हैं जिसकी विदेशों में अच्छी डिमांड है, तो उसे एक्सपोर्ट करना एक बहुत ही लाभकारी विकल्प हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले आपको यह तय करना होता है कि आप किन देशों को उत्पाद भेजना चाहते हैं और वहाँ के आयात नियम क्या हैं।

एक्सपोर्ट करने की शुरुआती प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है:

  1. अपने प्रोडक्ट के लिए HS Code तय करें।
  2. DGFT से IEC कोड प्राप्त करें।
  3. उत्पाद के लिए ज़रूरत हो तो रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लें (जैसे APEDA, FSSAI)।
  4. बायर से कॉन्ट्रैक्ट और भुगतान की शर्तें सुनिश्चित करें।
  5. शिपमेंट के लिए Incoterms चुनें (जैसे FOB, CIF, EXW)।
  6. इंटरनेशनल कूरियर/कार्गो कंपनी के साथ बुकिंग करें।
  7. सभी डॉक्युमेंट तैयार करें:
    • Commercial Invoice
    • Packing List
    • Shipping Bill
    • Certificate of Origin
    • Purchase Order या Letter of Credit
    • Insurance Document (यदि लागू हो)

एक बार शिपमेंट तैयार हो जाए, तो आपको भारत के कस्टम विभाग से क्लीयरेंस लेनी होती है। इसके बाद सामान विदेश रवाना कर दिया जाता है, और ट्रैकिंग के ज़रिए ग्राहक तक पहुंचने तक की पूरी निगरानी रखी जाती है।

एक्सपोर्ट प्रक्रिया को सरल और समय पर पूरा करने के लिए एक अनुभवी CHA (Customs House Agent) की मदद लेना फायदेमंद होता है।

भारत से या बाहर से सामान मंगाने या भेजने के लिए जरूरी डाक्यूमेंट्स

📋 डॉक्युमेंट📝 उद्देश्य
IEC Codeआयात-निर्यात की अनुमति
Commercial Invoiceप्रोडक्ट की वैल्यू का प्रमाण
Packing Listपैकिंग डिटेल्स का विवरण
Bill of Lading / Airway Billशिपिंग डॉक्युमेंट
Certificate of Originउत्पाद किस देश में बना है
Certificate of Analysisगुणवत्ता और टेस्ट रिपोर्ट
Purchase Licenceनियंत्रित वस्तुओं के लिए अनुमति

कार्गो के द्वारा सामान मंगवाने के लिए जरूरी कानून

भारत में आयात-निर्यात से जुड़े प्रमुख कानून और गाइडलाइंस:

  • Customs Act, 1962
    भारत में कस्टम ड्यूटी और क्लीयरेंस की मूलभूत कानूनी रूपरेखा।
  • Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992
    DGFT द्वारा व्यापार लाइसेंस, निर्यात-आयात नीति नियंत्रित की जाती है।
  • Export Import Policy (FTP)
    Foreign Trade Policy हर 5 साल में जारी होती है – 2023-28 नीति सक्रिय है।
  • INCOTERMS® 2020
    इंटरनेशनल ट्रेड में इस्तेमाल होने वाले मानक शर्तें।

Certificate of Origin क्या है?

यह दस्तावेज़ यह बताता है कि उत्पाद किस देश में बनाया गया है। कई बार Free Trade Agreements (FTA) में यह छूट दिलाने में मदद करता है।

यह कहां से बनवाएं?

  • FIEO (https://fieo.org)
  • Indian Chamber of Commerce
  • APEDA (Food Products के लिए)

Certificate of Analysis क्या है?

COA उत्पाद की scientific analysis report होती है। यह खासतौर पर जरूरी है:

  • फार्मा प्रोडक्ट्स
  • खाद्य उत्पाद
  • केमिकल्स
  • हर्बल/कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स

👉 यह लैब टेस्ट रिपोर्ट होती है जो प्रोडक्ट की Quality, Composition और Purity बताती है।

Purchase Licence क्या होता है?

कुछ विशेष उत्पाद जैसे –

  • Rare Chemicals
  • Weapons
  • Pharmaceuticals
  • Seeds और Biotechnology उत्पाद – इनके लिए Purchase Licence की आवश्यकता होती है।

आप इसे DGFT, CDSCO, या Agriculture Ministry से प्राप्त कर सकते हैं।

अन्य लेख : GST रजिस्ट्रेशन कैसे करें: स्टेप‑बाय‑स्टेप गाइड (2025)

Lakshay Pratap

मैं लगभग 4 सालो से ऑनलाइन बिज़नेस और ऑफलाइन बिज़नेस पर काम कर रहा हूँ, और में ऑफलाइन बिज़नेस की सबसे बड़ी समस्या यानी बिज़नेस के लिए जरुरी प्रोसेस और मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा फोकस्ड हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको बहुत फायदा मिलेगा।

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