भारतीय मूल के दिग्गज सीईओ अरविंद कृष्णा (Arvind Krishna) आज ग्लोबल टेक जगत में सबसे प्रभावशाली नामों में से एक हैं। IBM की कमान संभालने वाले अरविंद कृष्णा न सिर्फ अपनी लीडरशिप के लिए जाने जाते हैं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नौकरियों (Jobs) पर उनकी बेबाक राय अक्सर चर्चा का विषय बनती है।
दिसंबर 2025 की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने टेक इंडिस्ट्री में चल रही छंटनी और एआई (AI) पर अंधाधुंध खर्च को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आइए जानते हैं उनकी सैलरी, नेट वर्थ और भविष्य की चेतावनी के बारे में।
क्या है खबर? (Latest Updates 2025)
हाल ही में एक इंटरव्यू में अरविंद कृष्णा ने ‘AI डेटा सेंटर्स‘ पर हो रहे खरबों डॉलर के खर्च पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर $8 ट्रिलियन (लगभग ₹670 लाख करोड़) खर्च कर रही हैं, जिसका रिटर्न मिलना मुश्किल है।
उनका कहना है कि “बिना किसी बड़े तकनीकी चमत्कार के, मौजूदा एआई से AGI (सुपर इंटेलिजेंस) हासिल करने की संभावना फिलहाल 0-1% ही है।” यह बयान उन निवेशकों के लिए एक खतरे की घंटी है जो एआई की दौड़ में आंख मूंदकर पैसा लगा रहे हैं।
कितनी है सैलरी और नेट वर्थ?
अरविंद कृष्णा की कमाई के आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं। 2024-25 के वित्तीय वर्ष के लिए उनकी कुल कंपेनसेशन (Compensation) लगभग $25 मिलियन (करीब ₹210 करोड़) आंकी गई है।
- सैलरी में बढ़ोतरी: उनके वेतन में पिछले साल के मुकाबले करीब 23% का इजाफा हुआ है।
- नेट वर्थ: रिपोर्ट्स के अनुसार, अरविंद कृष्णा की कुल संपत्ति (Net Worth) $100 मिलियन (करीब ₹840 करोड़) से ज्यादा बताई जाती है। इसमें IBM के शेयरों की बड़ी हिस्सेदारी शामिल है।
टेक नौकरियों और छंटनी पर क्या कहा?
जहां पूरी दुनिया मान रही है कि नौकरियां AI खा रहा है, वहीं अरविंद कृष्णा का नजरिया अलग है। उन्होंने साफ कहा कि टेक सेक्टर में हालिया छंटनी (Layoffs) का मुख्य कारण AI नहीं, बल्कि महामारी (Covid) के दौरान हुई “जरूरत से ज्यादा हायरिंग” है।
उन्होंने कहा, “कंपनियों ने 2020-23 के बीच अपनी क्षमता से ज्यादा लोगों को भर्ती कर लिया था, और अब यह एक ‘नेचुरल करेक्शन’ हो रहा है।”
फ्रेशर्स और भारतीय टैलेंट के लिए सलाह
अरविंद कृष्णा खुद आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के एलुमनी हैं और भारतीय टैलेंट पर उनका भरोसा अटूट है। युवाओं के लिए उनकी सलाह स्पष्ट है:
- AI से डरें नहीं: एआई आपकी नौकरी नहीं लेगा, लेकिन “एआई का इस्तेमाल करने वाला शख्स” आपकी जगह जरूर ले सकता है।
- स्किल अपग्रेड: सिर्फ कोडिंग काफी नहीं है, आपको बिजनेस और स्ट्रैटेजी को समझना होगा।
- हायरिंग आउटलुक: उन्होंने संकेत दिया है कि IBM अगले 12 महीनों में कॉलेज ग्रेजुएट्स की भर्ती बढ़ाने वाली है, जो फ्रेशर्स के लिए राहत की खबर है।
भारत और IBM का रिश्ता
अरविंद कृष्णा के नेतृत्व में IBM ने हाइब्रिड क्लाउड और क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing) की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। रेड हैट (Red Hat) की 34 अरब डॉलर की डील उनके सबसे बड़े फैसलों में से एक मानी जाती है। भारत उनके लिए सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि टैलेंट का पावरहाउस है, जहां IBM की रिसर्च और डेवलपमेंट टीमें लगातार नए आयाम गढ़ रही हैं।










