ब्रह्मांड के रहस्यों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खबर है। हमारे सौर मंडल में एक ऐसा ‘मेहमान’ आया है जो हमारा नहीं है। नासा (NASA) ने पुष्टि की है कि कॉमेट 3I/ATLAS एक इंटरस्टेलर (Interstellar) वस्तु है, यानी यह किसी दूसरे तारे के सिस्टम से आया है।
‘ओमुआमुआ’ (‘Oumuamua) और ‘2I/Borisov’ के बाद यह इतिहास का मात्र तीसरा ऐसा ऑब्जेक्ट है जिसे इंसानों ने डिटेक्ट किया है। 19 दिसंबर को यह पृथ्वी के सबसे करीब से गुजरने वाला है। आइए जानते हैं क्या यह पृथ्वी के लिए खतरनाक है और नासा को इसमें क्या खास मिला है।
क्या है खबर?
जुलाई 2025 में चिली स्थित एटलस (ATLAS) सर्वे टेलीस्कोप ने इस धूमकेतु को खोजा था। वैज्ञानिकों ने तुरंत पाया कि इसकी कक्षा (Orbit) सूर्य से बंधी हुई नहीं है, बल्कि यह एक ‘हाइपरबोलिक पथ’ पर है। इसका सीधा मतलब है कि यह सौर मंडल के बाहर से आया है और एक बार गुजरने के बाद यह कभी वापस नहीं आएगा।
नासा इसे एक “कॉस्मिक टाइम कैप्सूल” मान रही है, जो अरबों साल पहले किसी दूरस्थ तारे के सिस्टम में बना था और अब हमारे घर (सौर मंडल) से गुजर रहा है।
कितनी है स्पीड और कब आएगा पास?
इस ‘एलियन’ कॉमेट की स्पीड जानकर आप हैरान रह जाएंगे। जब इसे पहली बार ट्रैक किया गया, तो यह लगभग 1,37,000 मील प्रति घंटा (करीब 2.2 लाख किमी/घंटा) की रफ्तार से चल रहा था। यह सौर मंडल में प्रवेश करने वाले सबसे तेज प्राकृतिक ऑब्जेक्ट्स में से एक है।
- सूर्य के करीब: यह 30 अक्टूबर 2025 को सूर्य के सबसे करीब (Perihelion) होकर निकल चुका है।
- पृथ्वी के करीब: अब यह पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है और 19 दिसंबर 2025 को हमारे सबसे नजदीक होगा।
क्या पृथ्वी को है कोई खतरा?
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे धूमकेतुओं को लेकर डर का माहौल बन जाता है, लेकिन नासा ने स्पष्ट कर दिया है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
जब यह 19 दिसंबर को पृथ्वी के सबसे करीब होगा, तब भी इसकी दूरी लगभग 167 से 170 मिलियन मील होगी। यह दूरी पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से भी दोगुनी है। नासा के मुताबिक, इसका रास्ता मार्स (मंगल) की कक्षा से भी काफी दूर है, इसलिए टक्कर का कोई सवाल ही नहीं उठता।
नासा को क्या मिला इसमें खास?
जेम्स वेब (James Webb) और हबल (Hubble) जैसे पावरफुल टेलीस्कोप इस पर नजर गड़ाए हुए हैं। वैज्ञानिकों को इसमें कुछ अनोखी चीजें मिली हैं:
- बर्फ का ज्वालामुखी: स्पेसक्राफ्ट ने इस पर “आइस वॉल्केनो” जैसी गतिविधि देखी है, जहां सतह के नीचे से गैस और बर्फ तेजी से बाहर निकल रही है।
- अलग बनावट: इसकी गैस और धूल में जो रसायनों के संकेत मिले हैं, वे हमारे सौर मंडल के धूमकेतुओं से काफी अलग हैं। यह वैज्ञानिकों को बिना किसी दूसरे तारे पर जाए, वहां के “एलियन” मटीरियल को स्टडी करने का मौका दे रहा है।
हालांकि, यह इतना दूर है कि इसे नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स इसे टेलीस्कोप की मदद से देख सकते हैं।











