नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नवंबर 2025 का महीना बेहद हलचल भरा रहा है। एक तरफ जहां केंद्रीय कैबिनेट ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है, वहीं दूसरी तरफ ‘फिटमेंट फैक्टर’ और ‘पेंशन रिविजन’ को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
सबसे ताजा अपडेट यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2 दिसंबर, 2025 को राज्यसभा में वेतन आयोग से जुड़े तीन बेहद अहम सवालों का जवाब देने वाली हैं। क्या पुरानी पेंशन वालों को फायदा मिलेगा? क्या DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाएगा? इन सवालों ने 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
आइए, इस पूरे मामले की गहराई में जाते हैं और समझते हैं कि 2026 में आपकी सैलरी स्लिप और बैंक खाते में क्या बदलाव देखने को मिल सकता है।
संसद में गूंजेंगे ये तीखे सवाल
राज्यसभा सांसद जावेद अली खान और रामजीलाल सुमन ने वित्त मंत्रालय से सीधा सवाल पूछा है। दरअसल, 3 नवंबर 2025 को जारी हुए वेतन आयोग के ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन समीक्षा का स्पष्ट जिक्र नहीं था। इसने पेंशनर्स के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
संसद के शीतकालीन सत्र में वित्त मंत्री से उम्मीद की जा रही है कि वे स्पष्ट करेंगी कि:
- क्या 8वां वेतन आयोग पुराने पेंशनर्स की पेंशन को भी रिवाइज करेगा?
- क्या कर्मचारियों को तत्काल राहत (Interim Relief) देने के लिए DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाएगा?
यह स्पष्टीकरण इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर पेंशन समीक्षा को ToR में शामिल नहीं किया गया, तो लाखों बुजुर्ग पेंशनर्स को नए आयोग का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
18 महीने की डेडलाइन और एरियर का सच
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बना यह आयोग अब काम करना शुरू कर चुका है। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
कागजी तौर पर देखें तो सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएंगी। लेकिन, व्यावहारिक रूप से रिपोर्ट तैयार होने और कैबिनेट की अंतिम मुहर लगने में 2027 का अंत या 2028 की शुरुआत हो सकती है।
कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर: इतिहास गवाह है कि वेतन आयोग की सिफारिशें हमेशा पिछली तारीख (Retrospective Effect) से लागू होती हैं।
- उदाहरण: अगर सरकार 2028 में नोटिफिकेशन जारी करती है, तो भी आपको बढ़ा हुआ वेतन जनवरी 2026 से जोड़कर ‘एरियर’ (Arrears) के रूप में मिलेगा। इसलिए, देरी से आपकी जेब को नुकसान नहीं होगा, बल्कि एक साथ बड़ी रकम हाथ आएगी।
फिटमेंट फैक्टर: 2.28 का जादुई आंकड़ा या 1.92 की हकीकत?
कर्मचारी यूनियनों और सरकार के बीच असली रस्साकशी ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) को लेकर है। यह वह मल्टीप्लायर है जिससे आपकी बेसिक सैलरी गुणा होती है।
वर्तमान स्थिति (7वां वेतन आयोग): फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे न्यूनतम वेतन ₹18,000 तय हुआ था।
8वें वेतन आयोग के संभावित सिनेरियो:
- विश्लेषकों का अनुमान (1.92 से 2.08): कई वित्तीय फर्म्स, जैसे कि कोटक और एंबिट कैपिटल, का मानना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 1.92 के आसपास रह सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो न्यूनतम वेतन ₹34,560 के करीब होगा।
- सरकार का संभावित रुख (2.28): सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार 2.28 के फिटमेंट फैक्टर पर विचार कर सकती है। यह कर्मचारियों के लिए एक संतुलित आंकड़ा होगा।
- न्यूनतम वेतन: ₹18,000 x 2.28 = ₹41,040 (लगभग)
- वेतन वृद्धि: यह मौजूदा सैलरी में करीब 34% का उछाल होगा।
- यूनियनों की मांग (3.68): कर्मचारी संगठन 3.68 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम वेतन ₹26,000 (पुरानी बेसिक पर) से बढ़कर सीधे ₹95,000 के पार जा सकता है, लेकिन राजकोषीय घाटे को देखते हुए सरकार के लिए इसे मानना मुश्किल लगता है।
आपकी सैलरी पर सीधा असर (कैलकुलेशन उदाहरण)
अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी, तो इस उदाहरण को देखिए। मान लीजिए, अभी आपकी बेसिक सैलरी (7th CPC के तहत) ₹30,000 है।
- परिदृश्य A (2.28 फिटमेंट फैक्टर): नई बेसिक सैलरी = ₹30,000 x 2.28 = ₹68,400
- परिदृश्य B (1.92 फिटमेंट फैक्टर): नई बेसिक सैलरी = ₹30,000 x 1.92 = ₹57,600
इसके साथ ही HRA (मकान किराया भत्ता) और TA (यात्रा भत्ता) भी नई बेसिक सैलरी के हिसाब से रिवाइज होंगे, जिससे ‘इन-हैंड सैलरी’ में जबरदस्त इजाफा होगा।
शेयर बाजार पर इसका असर: जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट
सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार के निवेशकों को भी 8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीदें हैं। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट के अनुसार, वेतन आयोग लागू होने से:
- बाजार में खपत (Consumption) बढ़ेगी।
- टू-व्हीलर, कार, एफएमसीजी (FMCG) और रियल एस्टेट सेक्टर में बूम आएगा।
- जब लाखों कर्मचारियों को एरियर का पैसा एक साथ मिलेगा, तो बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी, जो भारतीय शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।
विशेषज्ञ इसे “कंजम्पशन स्टोरी” का अगला बड़ा ट्रिगर मान रहे हैं।
महंगाई भत्ता (DA) मर्ज होने की प्रक्रिया
कर्मचारियों के मन में एक बड़ा डर यह है कि क्या नए आयोग के लागू होने तक उनका DA रुक जाएगा? जवाब है: नहीं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक 8वां वेतन आयोग पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक हर 6 महीने (जनवरी और जुलाई) में DA बढ़ता रहेगा।
बदलाव कैसे होगा? जिस दिन 8वां वेतन आयोग लागू होगा (मान लीजिए 1 जनवरी 2026), उस दिन तक जितना भी DA जमा होगा (संभावित 55-60%), उसे आपकी बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद DA का मीटर फिर से 0% (शून्य) से शुरू होगा। इसे ‘DA मर्जर’ कहते हैं, जिससे आपकी बेसिक सैलरी का बेस बड़ा हो जाता है और भविष्य के इंक्रीमेंट बड़ी रकम पर लगते हैं।
पेंशनर्स के लिए क्या बदलेगा?
बुजुर्गों के लिए यह आयोग जीवन रक्षक साबित हो सकता है। 80 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनर्स के लिए अतिरिक्त पेंशन (Additional Pension) की उम्र सीमा घटाने की मांग भी जोरों पर है।
- न्यूनतम पेंशन: मौजूदा ₹9,000 से बढ़कर ₹20,500 से ₹25,000 के बीच होने की उम्मीद है।
- मेडिकल सुविधा: फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) में भी बढ़ोतरी की सिफारिश की जा सकती है, जो फिलहाल काफी कम है।
आगे की राह: अब आपको क्या करना चाहिए?
अगले 12 से 18 महीने खबरों और अफवाहों से भरे रहेंगे। एक जागरूक कर्मचारी के तौर पर आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करें: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले “फेक पे मैट्रिक्स” से बचें। केवल वित्त मंत्रालय या पीआईबी (PIB) की विज्ञप्तियों पर ही विश्वास करें।
- 2 दिसंबर की तारीख नोट करें: राज्यसभा में वित्त मंत्री का जवाब पेंशन और एरियर की तस्वीर साफ कर देगा।
- वित्तीय प्लानिंग शुरू करें: चूंकि 2026-27 में एक बड़ी रकम (एरियर) मिलने की संभावना है, इसलिए अभी से अपने लोन प्री-पेमेंट या निवेश की योजना बनाना शुरू कर दें।
8वां वेतन आयोग केवल वेतन वृद्धि का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत में सरकारी सेवा के आर्थिक ढांचे को नया रूप देने वाला है। गेंद अब सरकार और आयोग के पाले में है, और उम्मीद है कि फैसला कर्मचारियों के हित में ही होगा।










