भारत-अमेरिका व्यापार युद्ध: क्या PM मोदी और ट्रंप टैरिफ की दीवार तोड़ पाएंगे?

November 6, 2025 11:37 PM
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भारत और अमेरिका के बीच चल रहा व्यापार तनाव अब एक नया मोड़ ले चुका है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय निर्यात पर 50% तक ऊंचे टैरिफ लगा दिए गए हैं। हालाँकि, इस खींचतान के बीच भी, व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच लगातार बातचीत हो रही है, जिससे एक बड़े व्यापार समझौते की उम्मीदें अभी भी ज़िंदा हैं।

यह जटिल ड्रामा ग्लोबल एनर्जी की बदलती शिफ्टों और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह साझेदारी इतनी महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष इसे टूटने नहीं देंगे।

अमेरिका ने भारत पर बढ़ाया दबाव: रूसी तेल खरीद पर 50% टैरिफ से निर्यात में 37% गिरावट

भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा व्यापारिक रिश्तों में टैरिफ और रूसी तेल आयात मुख्य विवाद का कारण बने हुए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने का दबाव बनाया है, उनका तर्क है कि इससे मॉस्को के युद्ध प्रयासों को फंडिंग मिल रही है। इस दबाव के चलते अमेरिका ने भारतीय निर्यात जैसे कि रत्न, वस्त्र और समुद्री उत्पादों पर 50% तक का भारी शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है। इसमें रूसी तेल खरीद के कारण लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।

सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच, इस टैरिफ के कारण अमेरिका को भारत का निर्यात 37.5% तक गिर गया है। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है, जबकि चीन और वियतनाम जैसे देशों को इसका फायदा मिल रहा है।

क्यों बढ़ रहा है इतना तनाव?

तनाव का मुख्य केंद्र भारत की ऊर्जा नीति और टैरिफ की पारस्परिक मांग है।

  • रूसी तेल बनाम राष्ट्रीय हित: भारत ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि उसकी ऊर्जा खरीद का निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों और उपभोक्ताओं के कल्याण पर आधारित है। भारत को रूस से सस्ता कच्चा तेल मिल रहा है, जो देश की भारी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • टैरिफ पर ट्रंप का दबाव: राष्ट्रपति ट्रंप टैरिफ को एक सौदेबाजी के उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि भारत, रूस से तेल आयात कम करे और बदले में अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम करे।
  • रणनीतिक संतुलन: एक तरफ व्यापार में खटास है, तो दूसरी तरफ दोनों देश रक्षा और भू-राजनीतिक मोर्चे पर एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। हाल ही में, टैरिफ विवाद के बावजूद, भारत और अमेरिका ने अगले 10 साल के लिए एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उनकी रणनीतिक साझेदारी की मज़बूती को दर्शाता है।

मोदी-ट्रंप की हॉटलाइन क्या कर रही है?

व्यापारिक आक्रामकता और सार्वजनिक आलोचना के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को लगातार फोन कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने हाल ही में पुष्टि की है कि ट्रंप, भारत-अमेरिका के संबंधों को “बहुत मजबूती” से महत्व देते हैं और वह पीएम मोदी का “बहुत सम्मान” करते हैं।

  • बातचीत का माहौल: दिवाली के मौके पर भी ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन किया था, जो बताता है कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत जुड़ाव मजबूत है।
  • “गंभीर चर्चाएं”: व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट के अनुसार, ट्रंप की व्यापार टीम भारतीय समकक्षों के साथ “बहुत गंभीर चर्चाओं” में लगी हुई है।
  • टैरिफ कटौती की उम्मीद: इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत अमेरिका भारतीय निर्यात पर लगे 50% टैरिफ को घटाकर 15% तक कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय निर्यातकों को 35% की बड़ी राहत मिलेगी।

किसे होगा फायदा?

अगर यह व्यापार समझौता होता है, तो सबसे ज्यादा फायदा भारतीय निर्यातकों और उपभोक्ताओं को होगा।

  • भारतीय निर्यातकों को राहत: टैरिफ में 35% तक की कटौती होने से भारतीय जेम्स, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और समुद्री खाद्य उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी। इससे निर्यात में आई भारी गिरावट रुक सकती है।
  • कम होंगी कीमतें: भारत अगर अमेरिका से तेल आयात बढ़ाता है (जैसा कि अक्टूबर 2025 में हुआ है) और ट्रेड डील होती है, तो कई अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाला शुल्क भी कम होगा।
  • निवेशकों में उत्साह: व्यापारियों और निवेशकों में उत्साह है क्योंकि एक सफल डील से निर्यात, आयात और भारत में विदेशी निवेश (FDI) में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तनाव अंततः एक बड़े समझौते का रास्ता तैयार कर सकता है। दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक महत्व को समझते हैं, इसलिए उम्मीद है कि 2025 के अंत तक एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) पर मुहर लग सकती है।

जितेन्द्र सिंह

मैं पिछले 3 सालों से बिज़नेस न्यूज़ और मार्केट अपडेट्स पर लिख रहा हूँ। मैं नई नीतियों, नियमों और ताज़ा बिज़नेस घटनाओं पर गहराई से रिसर्च करता हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको सही और ताज़ी जानकारी मिलेगी।

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