कर्ज़ के भारी बोझ से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea (Vi) के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का हालिया स्पष्टीकरण एक बड़ा ‘गेम-चेंजर’ साबित हुआ है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार को समायोजित सकल राजस्व (Adjusted Gross Revenue – AGR) से जुड़े कंपनी के सभी लंबित बकायों पर पुनर्विचार करने की पूरी स्वतंत्रता है।
Supreme Court का बड़ा फैसला: Vi के ₹83,000 करोड़ AGR बकाये पर सरकार को मिली छूट!
सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर के अपने आदेश में हुई तकनीकी त्रुटि को अब सुधार दिया है। पहले यह भ्रम था कि सरकार केवल ₹9,450 करोड़ की अतिरिक्त एजीआर मांग पर ही विचार कर सकती है।
लेकिन अब अदालत ने साफ़ किया है कि सरकार Vi के संपूर्ण AGR बकाये पर पुनर्विचार करने के लिए स्वतंत्र है, जो मार्च 2025 तक ₹83,000 करोड़ से अधिक है। इस संपूर्ण बकाये में मूलधन के साथ-साथ ब्याज और जुर्माने (Penalty) की राशि भी शामिल है।
कोर्ट ने कहा है कि कंपनी में केंद्र सरकार की 49% हिस्सेदारी और 20 करोड़ ग्राहकों के हितों को देखते हुए, सरकार को इस मामले में आवश्यक कदम उठाने से रोका नहीं जा सकता।
Adjusted Gross Revenue (AGR) बकाये में कितनी मिलेगी राहत?
चूँकि अब सरकार को सभी बकायों पर पुनर्विचार करने की अनुमति मिल गई है, इससे Vi को वित्तीय तौर पर बहुत बड़ी राहत मिल सकती है।
- देनदारी में कमी: Vi लंबे समय से दावा कर रही है कि उसके AGR कैलकुलेशन में कई ग़लतियाँ (Calculation Errors) और डुप्लीकेट एंट्रीज़ हैं। पुनर्विचार से इन ग़लतियों को सुधारा जा सकता है, जिससे कंपनी की देनदारी हज़ारों करोड़ रुपये कम हो सकती है।
- ब्याज और जुर्माना माफ़: सबसे बड़ी राहत ब्याज और जुर्माना (Interest and Penalty) को लेकर मिल सकती है। यदि सरकार इस हिस्से को आंशिक या पूर्ण रूप से माफ़ करने का फैसला करती है, तो कंपनी के तत्काल नकद प्रवाह (Cash Flow) पर दबाव कम होगा।
- भुगतान की समय-सीमा: मार्च 2026 से Vi को AGR की बड़ी किश्तें (लगभग ₹18,000 करोड़ सालाना) चुकानी शुरू करनी हैं। सरकार राहत पैकेज के तहत इन भुगतानों के लिए समय-सीमा बढ़ा (Extended Timeline) सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि AGR देनदारी में 20-25% की भी कमी आती है, तो यह Vi के पुनरुद्धार (Revival) के लिए पर्याप्त पूँजी उपलब्ध कराएगा।
किसे होगा फायदा?
सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण से तीन मुख्य पक्षों को सीधा फायदा होगा:
- Vodafone Idea: कंपनी को अपने डूबते हुए बैलेंस शीट को स्थिर करने के लिए साँस लेने की जगह (Breathing Room) मिलेगी। इससे वह 5G नेटवर्क के विस्तार और ग्राहक प्रतिधारण (Customer Retention) पर ध्यान केंद्रित कर पाएगी।
- निवेशक और बैंक: AGR देनदारी की तलवार लटकने से बैंक और निवेशक कंपनी में पैसा लगाने से हिचकिचा रहे थे। अब देनदारी कम होने की संभावना से निवेशक का भरोसा बहाल हुआ है। ख़बर आते ही Vi के शेयरों में 10% तक की तेज़ी देखी गई। अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फर्म टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स (TGH) जैसी बड़ी विदेशी कंपनियाँ भी अब निवेश पर विचार कर सकती हैं।
- आम उपभोक्ता: अगर Vi बच जाती है, तो भारतीय दूरसंचार बाज़ार दो कंपनियों (Jio और Airtel) के एकाधिकार (Duopoly) से बचा रहेगा। प्रतिस्पर्धा (Competition) बनी रहेगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएँ और उचित टैरिफ मिलते रहेंगे।
सरकार की क्या है भूमिका?
कोर्ट ने इस मामले को अब पूरी तरह से केंद्र सरकार के नीतिगत दायरे (Policy Domain) में छोड़ दिया है।
सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) ने कोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि सरकार Vi में अपनी 49% इक्विटी हिस्सेदारी और लाखों उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए कंपनी के सभी मुद्दों पर पुनर्विचार करने को तैयार है।
यह आदेश सरकार को दूरसंचार क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष पैकेज (Special Package) तैयार करने का कानूनी अधिकार देता है। अब सबकी निगाहें दूरसंचार विभाग (DoT) पर टिकी हैं कि वह इस बड़े AGR बकाया विवाद को सुलझाने के लिए क्या व्यावहारिक और निर्णायक कदम उठाता है।











