SEBI का बड़ा बदलाव: Custodian की Networth लिमिट अब ₹75 करोड़, Risk Controls होंगे और कड़े (2025)

October 15, 2025 10:08 PM
sebi custodian networth rule 2025

भारतीय पूंजी बाज़ार नियामक SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने कस्टोडियन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कस्टोडियन को अपना व्यवसाय जारी रखने के लिए कम से कम ₹75 करोड़ की नेटवर्थ बनाए रखनी होगी। साथ ही, उन्हें और कड़े risk management और internal control systems लागू करने होंगे।

Custodian क्या करते हैं?

कस्टोडियन ऐसे संस्थान होते हैं जो आपके शेयर, बॉन्ड या निवेश को आपके लिए सुरक्षित रखते हैं। जैसे बैंक आपका पैसा संभालता है, वैसे ही कस्टोडियन आपकी सिक्योरिटीज़ को सुरक्षित रखने और उनका हिसाब रखने का काम करता है।

  • IPO, म्यूचुअल फंड और बड़े कॉरपोरेट निवेशों में इनकी अहम भूमिका होती है।
  • ये न सिर्फ सिक्योरिटी होल्डिंग्स का रिकॉर्ड रखते हैं बल्कि settlement और transaction की निगरानी भी करते हैं।

नया नियम: Networth बढ़कर ₹75 करोड़

SEBI ने कहा है कि अब हर Custodian के पास कम से कम ₹75 करोड़ की नेटवर्थ (पूंजी) होनी चाहिए।

  • मतलब, जिनके पास इतनी पूंजी नहीं होगी, वे Custodian का काम नहीं कर पाएँगे।
  • इससे यह तय होगा कि केवल मजबूत और भरोसेमंद कंपनियाँ ही Custodian बनें।

Risk Control पर जोर

SEBI ने Custodian से कहा है कि उन्हें और कड़े सुरक्षा नियम (Risk Controls) अपनाने होंगे।

  • हर लेन-देन (transaction) का रिकॉर्ड साफ रखना होगा।
  • धोखाधड़ी और साइबर अटैक से बचाव करना होगा।
  • हर सेवा (activity) के लिए अलग नियम और निगरानी सिस्टम बनाना होगा।

क्यों किया गया यह बदलाव?

  • हाल के वर्षों में capital market बहुत बड़ा हुआ है और विदेशी/घरेलू दोनों तरह के निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है।
  • इतने बड़े transaction volume को संभालने के लिए financial safeguards जरूरी हैं।
  • international best practices के अनुरूप भारत का regulatory framework मजबूत करने का लक्ष्य है।

आप SEBI की ऑफिसियल वेबसाइट पर नए नियम को पढ़ सकते हैं।

निवेशकों और मार्केट पर असर

निवेशकों के लिए

  • उनकी सिक्योरिटीज़ और ज्यादा सुरक्षित रहेंगी।
  • operational failure या fraud का खतरा कम होगा।

मार्केट के लिए

  • Custodian सेक्टर में consolidation देखने को मिलेगा — छोटे खिलाड़ी बाहर हो सकते हैं।
  • बड़े और financially strong custodians का dominance बढ़ेगा।

SMEs और नई कंपनियों पर इस बदलाव का क्या असर पड़ेगा?

  • IPO या listing process के दौरान उन्हें बड़े custodians पर निर्भर रहना होगा।
  • Cost थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन trust और transparency भी बढ़ेगी।

हम SEBI के इस कदम से क्या अंदाजा लगा सकते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम short-term में कुछ players को बाहर कर देगा लेकिन long-term में यह भारतीय कैपिटल मार्केट को global standards के करीब ले जाएगा। इससे foreign investors का भरोसा भी मजबूत होगा।

SEBI का यह कदम साफ संकेत देता है कि भारत का पूंजी बाजार अब केवल growth नहीं बल्कि सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी उतना ही जोर देगा। ₹75 करोड़ की नेटवर्थ लिमिट और stronger risk controls से निवेशकों की सुरक्षा तो होगी ही, साथ ही भारत का financial ecosystem और resilient बनेगा।

आपकी SEBI के इस कदम के बारे में क्या राय हैं? आप निचे कमेंट करके जरूर बताये और अगर आप बिजनेसमैन हैं, और बिज़नेस की दुनिया में हमेशा अपडेट रहना चाहते हैं, तो हमारा व्हाट्सप्प ग्रुप जरूर ज्वाइन कीजिये।

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जितेन्द्र सिंह

मैं पिछले 3 सालों से बिज़नेस न्यूज़ और मार्केट अपडेट्स पर लिख रहा हूँ। मैं नई नीतियों, नियमों और ताज़ा बिज़नेस घटनाओं पर गहराई से रिसर्च करता हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको सही और ताज़ी जानकारी मिलेगी।

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