Business Loan Guide: बिना गिरवी लोन कैसे लें? डॉक्यूमेंट्स, प्रोसेस और सरकारी स्कीम्स की A-to-Z जानकारी

December 24, 2025 8:27 AM
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क्या आपके पास एक शानदार बिजनेस आइडिया है, लेकिन जेब में पूंजी की कमी आड़े आ रही है? या फिर आपका मौजूदा कारोबार रफ़्तार पकड़ रहा है, लेकिन इन्वेंट्री और मशीनों के लिए एक्स्ट्रा फंड्स की जरूरत है?

भारत में हर छोटे-बड़े व्यापारी की कहानी कहीं न कहीं ‘कैश फ्लो’ और ‘फंडिंग’ पर आकर अटक जाती है। अच्छी खबर यह है कि आज का भारत बदल रहा है। अब बिजनेस लोन लेना उतना मुश्किल नहीं रहा जितना एक दशक पहले था, बशर्ते आपको सही प्रोसेस और सही स्कीम की जानकारी हो।

आरबीआई की रिपोर्ट और एमएसएमई मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में छोटे व्यवसायों को ऋण देने की दर में भारी उछाल आया है। चाहे वह ‘मुद्रा योजना’ हो या ‘CGTMSE’ के तहत मिलने वाला बिना गारंटी का लोन, सरकार और बैंक दोनों ही आपकी मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं।

लेकिन, लोन रिजेक्ट क्यों होता है? अक्सर अधूरी जानकारी और गलत कागजी कार्रवाई के कारण।

इस विस्तृत गाइड में, हम एक बैंकर के नजरिए से समझेंगे कि लोन की तैयारी से लेकर पैसा खाते में आने तक—आपको किन 6 चरणों से गुजरना पड़ता है और कैसे आप अपनी फाइल को मंजूरी दिलवा सकते हैं।

लोन लेने से पहले खुद से पूछें ये 3 सवाल

बैंक जाने से पहले, आपको अपने बिजनेस मॉडल को आईने में देखना होगा। वित्तीय विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि लोन आवेदन करने से पहले अपनी जरूरत को स्पष्ट करें। बैंक यह नहीं जानना चाहता कि आपको पैसा चाहिए, वे जानना चाहते हैं कि आप उस पैसे का क्या करेंगे और उसे वापस कैसे करेंगे।

1. पूंजी की जरूरत और उद्देश्य (Purpose): क्या आपको मशीनरी खरीदनी है या दुकान का रिनोवेशन कराना है? इसके लिए ‘Term Loan’ सही रहता है, जिसकी ईएमआई फिक्स होती है। वहीं, अगर आपको माल खरीदने, स्टाफ की सैलरी या सीज़नल डिमांड पूरी करने के लिए पैसा चाहिए, तो आपको ‘Working Capital Loan’ या ‘Overdraft (OD)’ की तरफ जाना चाहिए।

2. राशि (Amount): उतनी ही राशि का आवेदन करें जितनी आपकी बैलेंस शीट सपोर्ट करती है। बहुत अधिक लोन मांगना रिजेक्शन का कारण बन सकता है, और बहुत कम मांगना आपके बिजनेस को बीच में ही अटका सकता है।

3. वापसी की क्षमता (Repayment Capacity): बैंक आपके पिछले 2-3 साल के मुनाफे को देखेगा। क्या आपके बिजनेस में इतना मार्जिन है कि आप ब्याज चुकाने के बाद भी प्रॉफिट में रहें?

बैंक आखिर देखता क्या है? मंजूरी के 5 बड़े पैमाने

जब आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक का क्रेडिट मैनेजर आपकी फाइल में कुछ खास चीजें ढूंढता है। इसे बैंकिंग भाषा में ‘Credit Appraisal’ कहते हैं। अगर आप इन 5 पैमानों पर खरे उतरते हैं, तो लोन मिलना तय है।

उम्र और अनुभव (Age & Vintage): आमतौर पर आवेदनकर्ता की उम्र 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है ‘बिजनेस विंटेज’—यानी आपका धंधा कितना पुराना है। पुराने व्यवसायों (कम से कम 3 साल) पर बैंकों का भरोसा ज्यादा होता है। हालांकि, स्टार्टअप्स के लिए अब विशेष स्कीम्स मौजूद हैं।

क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score): यह आपकी वित्तीय कुंडली है। 750 से ऊपर का सिबिल स्कोर लोन मिलने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। अगर आपका स्कोर कम है, तो बैंक या तो लोन मना कर देगा या बहुत ऊंची ब्याज दर वसूलेगा।

टर्नओवर और प्रॉफिटेबिलिटी: सिर्फ बिक्री (Sales) काफी नहीं है। बैंक यह देखता है कि टैक्स चुकाने के बाद आपकी जेब में कितना शुद्ध मुनाफा (Net Profit) बच रहा है। साथ ही, साल-दर-साल आपके टर्नओवर में कितनी बढ़ोतरी हो रही है, यह भी मायने रखता है।

एमएसएमई रजिस्ट्रेशन (Udyam): अगर आपके पास ‘उद्यम आधार’ (Udyam Registration) है, तो आपको सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में आसानी होती है। यह एक दस्तावेज आपको सामान्य व्यापारी से ‘पंजीकृत एमएसएमई’ बना देता है।

दस्तावेजों की चेकलिस्ट: फाइल में क्या-क्या होना जरूरी है?

अक्सर लोन प्रोसेस में देरी का कारण अधूरे दस्तावेज होते हैं। एक स्मार्ट बिजनेसमैन होने के नाते, आपको अपनी फाइल पहले से तैयार रखनी चाहिए। चाहे आप सरकारी बैंक (PSU) जाएं या प्राइवेट एनबीएफसी (NBFC), ये कागजात हर जगह मांगे जाएंगे:

  • केवाईसी (KYC): पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट।
  • बिजनेस का पता: गुमास्ता (Shop Act), रेंट एग्रीमेंट, या बिजली का बिल जो फर्म के नाम पर हो।
  • रजिस्ट्रेशन प्रूफ: उद्यम सर्टिफिकेट, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, पार्टनरशिप डीड (अगर पार्टनरशिप है) या कंपनी के MoA/AoA।
  • वित्तीय दस्तावेज (Financials):
    • पिछले 2-3 साल का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) – (Computation of Income के साथ)।
    • ऑडिटेड बैलेंस शीट और प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट।
    • पिछले 12 महीनों का बैंक स्टेटमेंट (करंट अकाउंट)।
    • जीएसटी रिटर्न (पिछले 1 साल का)।
  • प्रोजेक्ट रिपोर्ट: अगर आप नया बिजनेस शुरू कर रहे हैं या बड़ा विस्तार कर रहे हैं, तो आपको एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट देनी होगी कि आने वाले 3-5 सालों में आप कितनी कमाई की उम्मीद कर रहे हैं।

अर्जी से लेकर खाते में पैसे आने तक का पूरा सफर

आजकल डिजिटल लेंडिंग का जमाना है। ’59 मिनट लोन’ जैसी सुविधाओं ने चीजों को बहुत तेज कर दिया है। फिर भी, एक स्टैंडर्ड लोन प्रक्रिया इन चरणों से गुजरती है:

1. आवेदन (Application): आप ऑनलाइन या बैंक शाखा में जाकर फॉर्म भरते हैं। यहाँ आप अपनी सारी जानकारी और लोन राशि बताते हैं।

2. दस्तावेजों की जांच (Verification): बैंक आपके द्वारा दिए गए दस्तावेजों की सत्यता जांचता है। इसमें आपके घर और ऑफिस का ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ (Site Visit) शामिल हो सकता है। एक बैंक अधिकारी आपकी दुकान पर आकर देखेगा कि बिजनेस वाकई चल रहा है या नहीं।

3. क्रेडिट एनालिसिस (Credit Analysis): यहाँ आपकी फाइलों की गहराई से जांच होती है। बैंक आपके बैंक स्टेटमेंट का विश्लेषण करता है—क्या चेक बाउंस तो नहीं हुए? क्या खाते में पर्याप्त बैलेंस रहता है? क्या आप पर पहले से बहुत ज्यादा कर्ज है?

4. सैंक्शन लेटर (Sanction Letter): जब बैंक संतुष्ट हो जाता है, तो वह एक ‘सैंक्शन लेटर’ जारी करता है। इसमें ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन की अवधि और अन्य शर्तें लिखी होती हैं। इसे ध्यान से पढ़ना बहुत जरूरी है।

5. एग्रीमेंट और डिस्बर्सल (Disbursal): आखिर में, आप लोन एग्रीमेंट पर साइन करते हैं। अगर कोई प्रॉपर्टी गिरवी रखी जा रही है, तो उसके कागजात जमा होते हैं। इसके बाद, लोन की राशि सीधे आपके करंट अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

बिना गिरवी लोन: छोटे कारोबारियों के लिए सरकार का ‘सुरक्षा कवच’

बहुत से नए उद्यमियों के पास गिरवी रखने के लिए जमीन या मकान नहीं होता। ऐसे में क्या करें? यहाँ सरकार की भूमिका आती है। भारत सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जो ‘Collateral-free’ (बिना गिरवी) लोन को बढ़ावा देती हैं।

CGTMSE (क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट): यह एमएसएमई (MSME) जगत के लिए एक वरदान है। इस योजना के तहत, सरकार बैंक को गारंटी देती है कि “आप इस व्यापारी को लोन दें, अगर यह पैसा नहीं चुका पाया, तो 75% से 85% तक की भरपाई हम करेंगे।” इस योजना के तहत आप 5 करोड़ रुपये तक का लोन बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको एक छोटी सी सालाना ‘गारंटी फीस’ चुकानी पड़ती है।

पीएम मुद्रा योजना (PMEGP & Mudra): छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है।

  • शिशु: 50,000 रुपये तक।
  • किशोर: 50,000 से 5 लाख रुपये तक।
  • तरुण: 5 लाख से 10 लाख रुपये तक। यह लोन भी बिना किसी कोलेटरल के मिलता है और नए स्टार्टअप्स के लिए काफी मददगार है।

रिजेक्शन से कैसे बचें? स्मार्ट बैंकिंग के कुछ सीक्रेट्स

लोन मिलना सिर्फ लक की बात नहीं है, यह एक रणनीति है। बैंकिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर आप इन बातों का ध्यान रखें, तो आपका लोन पास होने के चांस 90% तक बढ़ जाते हैं:

  1. बैंक स्टेटमेंट को साफ रखें: चेक बाउंस होना एक बड़ा रेड फ्लैग है। कोशिश करें कि आपके खाते में महीने की कुछ तारीखों पर अच्छा बैलेंस दिखाई दे।
  2. आईटीआर जरूर भरें: भले ही आपकी आय टैक्स स्लैब से कम हो, लेकिन ‘Nil ITR’ भरना भी आपके रिकॉर्ड को मजबूत करता है। बैंक कच्ची रसीदों पर भरोसा नहीं करते, उन्हें पक्के सबूत चाहिए।
  3. उद्यम रजिस्ट्रेशन: यह फ्री है और ऑनलाइन हो जाता है। इसे आज ही बनवा लें। इससे आपको बैंक में प्राथमिकता मिलती है।
  4. छोटे लोन से शुरुआत करें: अगर आपका बिजनेस नया है, तो सीधे 50 लाख का लोन न मांगें। पहले छोटा लोन लें, उसे समय पर चुकाएं और अपनी ‘क्रेडिट हिस्ट्री’ बनाएं।

आगे क्या करें? अगर आप जयपुर, दिल्ली या किसी भी शहर में अपना बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने सीए (CA) के साथ बैठकर अपनी बैलेंस शीट को लोन के लिए तैयार करें। याद रखें, बैंक उसी को पैसा देता है जो यह साबित कर सके कि उसे पैसे की जरूरत तो है, लेकिन वह पैसे को डबल करने की काबिलियत भी रखता है।

Lakshay Pratap

मैं लगभग 4 सालो से ऑनलाइन बिज़नेस और ऑफलाइन बिज़नेस पर काम कर रहा हूँ, और में ऑफलाइन बिज़नेस की सबसे बड़ी समस्या यानी बिज़नेस के लिए जरुरी प्रोसेस और मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा फोकस्ड हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको बहुत फायदा मिलेगा।

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