महाराष्ट्र की गन्ना पट्टी में एक बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है।
अब खेतों में सिर्फ़ अनुभव नहीं, डेटा भी काम कर रहा है। पुणे स्थित वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (VSI) ने AI सक्षम खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों को मिलने वाली सब्सिडी ₹9,250 से बढ़ाकर ₹18,250 प्रति हेक्टेयर कर दी है।
यह पहल दिखाती है कि AI अब प्रयोगशाला से निकलकर खेत की मिट्टी तक पहुँच चुका है।
पायलट चरण में सैकड़ों किसानों ने इस योजना में रजिस्ट्रेशन कराया था। इस साल लक्ष्य है की पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने खेत इस तकनीक से जुड़ें।
खेती में सेंसर और डेटा का नया युग
AI खेती का मकसद तकनीक को सरल बनाना है, ताकि किसान खुद इसका फायदा उठा सके।
खेतों में अब मृदा-नमी सेंसर, लीफ-हेल्थ इमेजिंग और ड्रोन-आधारित स्प्रे का उपयोग किया जा रहा है।
ये उपकरण हर फसल की स्थिति का डेटा इकट्ठा करते हैं और AI मॉडल उस डेटा को पढ़कर तय करता है कि सिंचाई कब होनी चाहिए, कितनी खाद दी जाए और स्प्रे का सही समय क्या है।
संस्थान ने बीज सेट्स की कीमत भी ₹3 से घटाकर ₹2 कर दी है।
एक हेक्टेयर में लगभग 12,000 सेट्स लगते हैं, जिससे किसानों की लागत अब ₹24 से 25 हजार तक सिमट गई है।
यह सीधे शुरुआती निवेश को घटाता है और किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
सब्सिडी से बढ़ी अपनाने की रफ्तार
VSI का लक्ष्य है कि 2025-26 तक यह योजना पूरे महाराष्ट्र की गन्ना पट्टी में फैल जाए।
राज्य सरकार भी इस मॉडल को “स्मार्ट शुगरकेन फार्मिंग” योजना में शामिल करने पर विचार कर रही है।
नीतिगत स्तर पर इसे उत्पादन-स्थिरता और जल-प्रबंधन का समाधान माना जा रहा है।
VSI के अधिकारियों के मुताबिक, खेतों से मिल रहे नतीजे उम्मीद से बेहतर हैं।
जहाँ पहले सिंचाई और पोषण पर अनुमान लगाया जाता था, वहीं अब किसान डेटा-आधारित निर्णय ले पा रहे हैं।
ड्रोन तकनीक ने घटाई मेहनत
AI खेती में ड्रोन का इस्तेमाल सबसे बड़ा बदलाव लाया है।
ड्रोन से स्प्रे एकसमान होता है, रसायन की बचत होती है और बड़े खेतों में काम तेज़ी से पूरा होता है।
निजी एग्रीटेक कंपनियाँ अब इन सेवाओं को “फार्म पैकेज” के रूप में दे रही हैं, जिसमें खेत की मैपिंग, मौसमी निगरानी और सलाह शामिल होती है।
भले शुरुआती निवेश (₹4–12 लाख प्रति कृषि ड्रोन) कुछ किसानों के लिए चुनौती है,लेकिन FPO और कस्टम हायरिंग मॉडल से यह लागत साझा की जा सकती है।
सरकार के अनुसार, ड्रोन पंजीकरण अब “Digital Sky” पोर्टल पर अनिवार्य है, जिससे किसानों को प्रशिक्षण और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होती है।
उपज में सुधार और भविष्य की दिशा
गन्ना उत्पादन में पानी की उपलब्धता और समय पर पोषण प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियाँ रही हैं। AI मॉडल का लक्ष्य इन्हीं अस्थिरताओं को घटाना है।
अब खेतों में “पानी कब दें” और “स्प्रे कब करें” जैसे फैसले अनुमान पर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि रियल-टाइम सूचकांकों का इस्तेमाल करके सही जानकारी के अनुसार दे पाएंगे।
अगर यह मॉडल अगले दो सीज़न में ब्लॉक स्तर तक पहुँच गया,तो इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी बल्कि चीनी मिलों की सप्लाई चेन भी अधिक स्थिर हो जाएगी।
यह योजना भारतीय कृषि के लिए एक नया अध्याय खोल सकती है, जहाँ तकनीक, परंपरा और नीति एक साथ काम कर रही हैं।












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