भारत में इस वक्त क्लीन एनर्जी (Clean Energy) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का बाज़ार रॉकेट की रफ्तार से भाग रहा है। सड़कों पर हर दूसरी नई स्कूटी या कार इलेक्ट्रिक दिखने लगी है, और छतों पर सोलर पैनल बिछ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों और इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2026 एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित होने वाला है। अगर आप इस साल अपना खुद का बिज़नेस या स्टार्टअप शुरू करने का प्लान कर रहे हैं, तो व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग से ज्यादा पैसा सर्विसिंग और मेंटेनेंस सेक्टर में छुपा है।
2026 में क्यों है सबसे बड़ा मौका?
भारत के ईवी मार्केट ने एक लंबी छलांग लगाई है। जहां 2016 में मात्र 50,000 गाड़ियां बिकी थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 23 लाख (2.3 मिलियन) को पार कर गया है। नीति आयोग (NITI Aayog) के रोडमैप के मुताबिक, 2030 तक हर साल 1 करोड़ EV बिकने का अनुमान है। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर/विंड) की क्षमता भी 262 GW के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
इस भारी डिमांड का सीधा मतलब है कि अब लाखों गाड़ियों और सोलर प्रोजेक्ट्स को रिपेयर, मेंटेनेंस और सपोर्ट की जरूरत पड़ने वाली है, और यहीं से जन्म होता है शानदार बिज़नेस आइडियाज का।
मैन्युफैक्चरिंग नहीं, सर्विसिंग में है असली पैसा
बाज़ार में गाड़ियां तो खूब बिक रही हैं, लेकिन उनका सर्विसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी बेहद कमजोर है। इंश्योरेंस कंपनियों के ताज़ा क्लेम डेटा के अनुसार, भले ही मोटर इंश्योरेंस में EV का हिस्सा सिर्फ 1% है, लेकिन इनमें क्लेम आने की दर सबसे ज्यादा (करीब 29%) है।
सबसे अहम बात यह है कि EV में बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स खराब होने पर रिपेयरिंग का औसत खर्च ₹39,000 प्रति क्लेम आता है। यानी एक आम पेट्रोल-डीजल गाड़ी के मुकाबले EV सर्विसिंग में गैरेज मालिकों के लिए ‘हाई मार्जिन’ और ज्यादा कमाई का मौका है।
2026 के लिए 4 सबसे बेहतरीन बिज़नेस आइडियाज
अगर आप कम निवेश में हाई-प्रॉफिट बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं, तो इन 4 सेक्टर्स पर फोकस कर सकते हैं:
1. मल्टी-ब्रांड EV सर्विस सेंटर (टियर-2 और 3 शहरों में) छोटे शहरों में ओला, एथर और टीवीएस जैसे 2-व्हीलर और 3-व्हीलर की भरमार है, लेकिन कंपनियों के सर्विस सेंटर बहुत कम हैं। आप एक ऐसा मल्टी-ब्रांड गैरेज खोल सकते हैं, जहां सभी कंपनियों की EV गाड़ियों की सर्विसिंग और पार्ट-रिप्लेसमेंट का काम हो।
2. मोबाइल EV रिपेयर और फ्लीट सपोर्ट स्विगी, ज़ोमैटो और अमेजॉन जैसी कंपनियों की डिलीवरी अब EV फ्लीट पर निर्भर है। रास्ते में गाड़ी खराब होने या रेंज खत्म होने पर इन्हें तुरंत मदद चाहिए होती है। ‘ऑन-साइट’ रिपेयरिंग और मोबाइल चार्जिंग सर्विस देकर आप तगड़ा पैसा बना सकते हैं।
3. बैटरी डायग्नोस्टिक्स और रीसाइकिलिंग सेंटर EV की आधी कीमत उसकी लिथियम-आयन बैटरी की होती है। बैटरी की हेल्थ चेक करना, उसे रिफर्बिश (Refurbish) करना और सेकंड-हैंड मार्केट के लिए सर्टिफाई करने का काम आने वाले सालों में करोड़ों की इंडस्ट्री बनेगा।
4. चार्जिंग स्टेशन O&M (ऑपरेशन और मेंटेनेंस) जगह-जगह सरकारी और प्राइवेट चार्जिंग स्टेशन लग रहे हैं, लेकिन उन्हें चालू हालत में रखना सबसे बड़ी चुनौती है। आप कमर्शियल बिल्डिंग्स और नेटवर्क ऑपरेटर्स के लिए इन चार्जिंग स्टेशनों के रखरखाव (Preventive Maintenance) का कॉन्ट्रैक्ट ले सकते हैं।
क्लीन एनर्जी और EV सर्विस का यह मार्केट 2030 तक 200 बिलियन डॉलर का होने वाला है। जो उद्यमी आज इस फील्ड में अपना ब्रांड बना लेगा, आने वाले दशक में वही इस इंडस्ट्री पर राज करेगा।










