खेती-किसानी में सबसे ज्यादा पैसा सिंचाई और महंगे डीजल पर खर्च होता है। राजस्थान के कोटा, बूंदी और झालावाड़ जैसे इलाकों में पानी की जरूरत ज्यादा होती है, लेकिन हर छोटे किसान के पास लाखों रुपये का सोलर पंप (Solar Pump) खरीदने का बजट नहीं होता।
कृषि विशेषज्ञों और एग्री-स्टार्टअप्स (Agri-startups) के अनुसार, इसी समस्या के बीच एक नया और बेहद मुनाफे वाला बिज़नेस मॉडल तेजी से उभर रहा है- ‘Pump-as-a-Service’ (PaaS) यानी सोलर पंप को किराये पर देने का बिज़नेस। अगर आप ग्रामीण इलाके में रहते हैं, तो यह कम लागत वाला बिज़नेस आपको हर महीने शानदार रेवेन्यू दे सकता है।
कैसे काम करता है ‘Pump-as-a-Service’ मॉडल?
इस बिज़नेस का कॉन्सेप्ट बिल्कुल ट्रैक्टर या हार्वेस्टर किराये पर देने जैसा ही है। आपको कोई मशीन बेचनी नहीं है, बल्कि ‘सिंचाई के घंटे’ (Hours of irrigation) बेचने हैं।
इसमें एक मोबाइल सोलर किट तैयार की जाती है, जिसमें पंप, सोलर पैनल, कंट्रोलर और पाइप शामिल होते हैं। इसे एक छोटी ट्रॉली या जुगाड़ गाड़ी पर सेट कर दिया जाता है। जब भी किसी किसान को पानी की जरूरत होती है, आप या आपका ऑपरेटर खेत में जाकर मशीन सेट करता है, तय घंटों तक खेत की सिंचाई करता है और उसी दिन मशीन वापस ले आता है।
किन किसानों को है इसकी सबसे ज्यादा जरूरत?
सरकारी डेटा बताता है कि भारत में 80% से ज्यादा सीमांत (Marginal) किसान हैं, जिनके पास मात्र 1 से 5 एकड़ ज़मीन है। सब्जियों और बागवानी (Horticulture) की खेती करने वाले किसानों को समय पर पानी की सख्त जरूरत होती है। वर्तमान में ये किसान डीजल पंप का इस्तेमाल करते हैं या दूसरों से मशीन मांगते हैं। आपका पोर्टेबल सोलर पंप उनके लिए डीजल के मुकाबले बहुत सस्ता और बिना झंझट वाला विकल्प साबित होगा।
कितनी और कैसे होगी आपकी कमाई?
इस बिज़नेस में आपको एक पारदर्शी और किसान-फ्रेंडली प्राइसिंग मॉडल रखना होगा। आप किसानों से प्रति घंटे, प्रति एकड़ या ‘प्रति सिंचाई’ के हिसाब से चार्ज कर सकते हैं। डीजल पंप के प्रति घंटे के खर्च से अपने रेट को थोड़ा कम रखें, ताकि किसान तुरंत तैयार हो जाएं।
इसके अलावा कमाई बढ़ाने के लिए आप कुछ शानदार ‘ऐड-ऑन’ (Add-ons) दे सकते हैं:
- सीजन पास: 30 से 60 दिन के पीक सिंचाई सीजन के लिए किसानों को एकमुश्त पैकेज बेचें।
- विलेज डे डिस्काउंट: अगर एक ही गांव के 5 किसान एक साथ बुकिंग करते हैं, तो उन्हें छूट दें। इससे आपकी मशीन का ‘यूटिलाइजेशन’ बढ़ेगा और ट्रैवलिंग का खर्च बचेगा।
- एक्स्ट्रा सर्विस: खाली समय में पानी के बड़े टैंक भरने या ड्रिप इरिगेशन के साथ मशीन किराये पर देने का काम भी किया जा सकता है।
PM-KUSUM योजना से कैसे उठाएं डबल फायदा?
केंद्र सरकार की ‘पीएम कुसुम योजना’ (PM-KUSUM) मुख्य रूप से किसानों को सब्सिडी पर सोलर पंप लगाने के लिए दी जाती है। एक बिज़नेसमैन के तौर पर आप उन गांवों में ‘ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस’ (O&M) वेंडर बन सकते हैं जहां यह योजना लागू हो रही है। आप स्थानीय FPO (किसान उत्पादक संगठन) या सहकारी समितियों के साथ पार्टनरशिप कर सकते हैं, जिससे आपको एक साथ दर्जनों किसानों का फिक्स काम मिल जाएगा।
30 दिन का मास्टर एक्शन प्लान
अगर आप इस बिज़नेस को जमीन पर उतारना चाहते हैं, तो एक साथ कई मशीनें खरीदने की गलती न करें।
- पहला कदम: शुरुआत में अपने आस-पास के 3 से 5 गांवों का एक क्लस्टर चुनें।
- दूसरा कदम: सिर्फ 1 पोर्टेबल सोलर यूनिट और एक ट्रेंड ऑपरेटर के साथ काम शुरू करें।
- तीसरा कदम: WhatsApp के जरिए 30 से 50 किसानों की एडवांस बुकिंग शीट तैयार करें।
- चौथा कदम: पहले 2-3 हफ्ते सिर्फ मशीन के काम करने के घंटे और ट्रैवलिंग टाइम को ट्रैक करें। जब एक मशीन दिन में कम से कम 4 से 6 घंटे किराये पर चलने लगे, तभी दूसरी मशीन खरीदें।










