भारत के गांवों में आज भी इमरजेंसी के वक्त सबसे बड़ी समस्या ट्रांसपोर्ट की होती है। पक्की सड़कें न होने और रास्तों के संकरे होने के कारण अक्सर बड़ी एंबुलेंस (जैसे 108 Ambulance) समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पातीं।
ऐसी गंभीर स्थिति में ग्रामीणों को ट्रैक्टर या प्राइवेट जीप का महंगा और असुरक्षित सहारा लेना पड़ता है, जिसमें कई बार जान का जोखिम बन जाता है। इसी बड़ी समस्या को एक शानदार अवसर में बदला है ‘रूरल बाइक एंबुलेंस सर्विस’ (Rural Bike Ambulance Service) ने। यह एक ऐसा ऑन-कॉल स्टार्टअप मॉडल है, जो गांव के युवाओं के लिए रोज़गार का एक बेहतरीन और सम्मानजनक जरिया बन गया है।
कैसे काम करता है यह अनोखा ‘लाइफसेविंग’ मॉडल?
यह कोई आम मोटरसाइकिल नहीं है। इसमें 100 से 150 cc की एक सामान्य बाइक के साइड में एक कवर्ड और गद्देदार स्ट्रेचर (Side-attached carriage) फिट किया जाता है।
इसमें मरीज की सुरक्षा के लिए सपोर्ट सिस्टम और बेसिक फर्स्ट-एड किट मौजूद होती है। गांव के लोग किसी भी इमरजेंसी में आपके हेल्पलाइन या WhatsApp नंबर पर कॉल करते हैं। कार या वैन के मुकाबले यह बाइक ट्रैफिक और खराब रास्तों को चीरते हुए तेजी से मौके पर पहुंचती है और मरीज को सीधे नजदीकी क्लीनिक या अस्पताल (PHC) छोड़ देती है।
निवेश: कितनी आएगी लागत और कैसे होगा सेटअप?
अगर आप इस ‘सोशल एंटरप्राइज’ को शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो इसके लिए आपको लाखों रुपये के भारी बजट की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
- कुल खर्च: एक सेकंड-हैंड बाइक, स्ट्रेचर का मजबूत ढांचा, कैनोपी (छत), और बेसिक ब्रांडिंग को मिलाकर कुल ₹80,000 से ₹1.5 लाख का खर्च आता है।
- RTO के नियम: ध्यान रहे, बाइक के इस मॉडिफिकेशन के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) से ‘इमरजेंसी व्हीकल’ कैटेगरी में अप्रूवल लेना जरूरी है।
- ट्रेनिंग: इस सर्विस को चलाने वाले राइडर के पास ‘बेसिक फर्स्ट-एड ट्रेनिंग’ (First-aid certification) का सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है।
40 हजार की पक्की मंथली कमाई का गणित
यह बिज़नेस सेवा के साथ-साथ आपको शानदार रिटर्न भी देता है। आप दूरी के आधार पर मरीजों से प्रति कॉल ₹300 से ₹800 तक का चार्ज ले सकते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप 4-5 गांवों के क्लस्टर में सर्विस देते हैं और रोज़ाना औसतन 3 से 5 कॉल भी अटेंड करते हैं, तो पेट्रोल और मेंटेनेंस का खर्च निकालकर आसानी से ₹25,000 से ₹40,000 प्रति माह की कमाई की जा सकती है। कमाई को फिक्स करने के लिए आप प्राइवेट डॉक्टरों, क्लिनिक और स्थानीय पंचायत के साथ ‘मंथली कॉन्ट्रैक्ट’ (Monthly Retainer) भी कर सकते हैं, जिससे आपको हर महीने एक बंधी-बंधाई रकम मिलती रहेगी।
इन सरकारी योजनाओं से मिलेगी पूरी फंडिंग
इस शानदार स्टार्टअप को शुरू करने के लिए पैसों की कमी आपके आड़े नहीं आएगी। आप मशीनरी और सेटअप के लिए ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ (Mudra Yojana) या PMEGP स्कीम के तहत बिना गारंटी वाला बिजनेस लोन ले सकते हैं।
इसके अलावा, कई बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां अपने CSR (Corporate Social Responsibility) फंड के जरिए ऐसे ग्रामीण स्वास्थ्य प्रोजेक्ट्स को भारी ग्रांट (Grant) देती हैं। ‘स्टार्टअप इंडिया’ में रजिस्ट्रेशन कराकर आप अपने बिज़नेस को एक नई पहचान दे सकते हैं। यह सिर्फ एक बिज़नेस नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दुर्घटना के शिकार लोगों की जान बचाने वाला एक बेहद पुण्य का काम है।






