टेक एक्सपर्ट्स और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, दुनिया में ऐसे कई बिजनेस और काम हैं जिन्हें AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता। अगर आप अपना खुद का MSME या लोकल बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इन 10 सेक्टर्स पर दांव लगा सकते हैं।
मशीनें नहीं कर सकतीं यह जमीनी काम (Skilled Local Trades)
प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर, मैकेनिक और कंस्ट्रक्शन ठेकेदारों का काम पूरी तरह से ‘ऑन-साइट’ और अनिश्चित होता है। इन कामों में हर दिन नई और अजीबोगरीब समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मशीनें या रोबोट सीढ़ियां चढ़कर दीवार के अंदर की वायरिंग ठीक करने या तंग जगहों पर पाइप लीकेज रोकने में आर्थिक और तकनीकी रूप से पूरी तरह फेल हैं।
हाथ के हुनर और कला की जीत (Artisanal Crafts)
हाथ से बने सामान की बात ही कुछ और होती है। चाहे वह हैंडलूम हो, कस्टमाइज्ड फर्नीचर, मिट्टी के बर्तन या फिर हाथ से बनी फाइन ज्वेलरी। ग्राहक सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं खरीदते, वे उस कारीगर की मेहनत, कहानी और ‘ह्यूमन टच’ के पैसे देते हैं। AI आपको बेहतरीन डिजाइन का आईडिया तो दे सकता है, लेकिन उस कला को हकीकत में बदलने का काम सिर्फ इंसानी हाथों से ही मुमकिन है।
भरोसे पर टिके पर्सनल केयर और थेरेपी (Touch-Based Services)
क्या आप किसी रोबोट से अपने बाल कटवाना या मसाज कराना पसंद करेंगे? शायद नहीं, क्योंकि सैलून, स्पा, मेकअप आर्टिस्ट या टैटू आर्टिस्ट जैसे काम सीधे तौर पर इंसानी छुअन और भरोसे पर टिके हैं। इसी तरह, मनोवैज्ञानिक (Psychologists), फैमिली काउंसलर या लाइफ कोच का काम भी AI के बस का नहीं है। इंसानी दुख-दर्द, हाव-भाव और भावनाओं को समझने के लिए एक धड़कते हुए दिल की जरूरत होती है, जो किसी चैटबॉट में नहीं होता।
हेल्थकेयर और एजुकेशन में इंसान ही जरूरी
हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर में AI एक बेहतरीन असिस्टेंट बन सकता है, लेकिन वह कभी बॉस नहीं बन सकता। ऑपरेशन थियेटर में मौजूद सर्जन, एनेस्थेटिस्ट या ICU चलाने वाले क्रिटिकल केयर डॉक्टर्स की जगह मशीनें नहीं ले सकतीं। यहां हर पल मरीज की जान का जोखिम होता है, जहां रियल-टाइम नैतिक फैसले लेने पड़ते हैं। वहीं, छोटे बच्चों (Pre-school) या स्पेशल नीड्स वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए जिस इमोशनल बॉन्डिंग और धैर्य की जरूरत होती है, वह कोई एआई स्क्रीन नहीं दे सकती।
हॉस्पिटैलिटी और साइट मैनेजमेंट
साइट पर कंस्ट्रक्शन का काम संभालना, अलग-अलग मजदूरों से डील करना, मौसम बिगड़ने पर तुरंत फैसले लेना और सरकारी इंस्पेक्शन पास कराना- ये सब इंसान ही कर सकता है। इसके अलावा, बुटीक होटल, होमस्टे, या वेडिंग प्लानिंग जैसे हॉस्पिटैलिटी बिजनेस में ग्राहक ‘पर्सनल अटेंशन’ और खास अनुभव के लिए भारी रकम खर्च करते हैं। शादी के मंडप में हुई किसी भी गड़बड़ी को कोई AI टूल नहीं, बल्कि एक वेडिंग प्लानर ही अपनी सूझबूझ से सुलझाता है।
लीडरशिप और क्रिएटिविटी में इंसानी दिमाग ही बॉस
कंपनी के फाउंडर, CEO, सीनियर बिजनेस स्ट्रैटेजिस्ट और B2B सेल्स जैसी भूमिकाओं में लोगों से रिश्ते बनाना, राजनीति समझना और जोखिम भरे फैसले लेना शामिल होता है। इतने बड़े रिस्क एल्गोरिदम के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते। वहीं दूसरी ओर फिल्म डायरेक्टर, ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट, और स्टैंड-अप कॉमेडियन जैसे क्रिएटिव लोगों का काम भी पूरी तरह सेफ है। पब्लिक किस जोक पर हंसेगी या कौन सी कहानी दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देगी, ये सिर्फ इंसानी अनुभव और ‘गट फीलिंग’ से ही तय होता है।









