D-Mart के साथ बिजनेस करने का मौका: 11वें दिन मिलती है पेमेंट, 300+ स्टोर्स में बिकेगा आपका माल

December 28, 2025 8:12 AM
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भारत में रिटेल का दूसरा नाम ‘D-Mart’ बन चुका है। राधाकिशन दमानी की यह कंपनी अपनी सस्ती कीमतों के लिए जानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ग्राहक बनने के अलावा, आप D-Mart के ‘सप्लायर’ बनकर भी लाखों का बिजनेस कर सकते हैं?

अगर आप कोई प्रोडक्ट बनाते हैं (Manufacturer) या थोक विक्रेता हैं, तो D-Mart आपको पूरे भारत के 300+ स्टोर्स तक सीधी पहुँच दे सकता है। आइए जानते हैं इसका पूरा प्रोसेस और प्रॉफिट का गणित।

क्या है D-Mart का ‘सप्लायर मॉडल’?

D-Mart का बिजनेस मॉडल ‘Everyday Low Price’ पर चलता है। वे बिचौलियों (Middlemen) को हटाकर सीधे मैन्युफैक्चरर्स से माल खरीदते हैं। सप्लायर्स के लिए D-Mart सबसे बेहतरीन क्यों है? इसकी वजह है उनकी पेमेंट पॉलिसी। बाजार में जहां पेमेंट आने में 45-60 दिन लगते हैं, वहीं D-Mart सप्लायर को बिल जमा करने के 11वें दिन पेमेंट कर देता है। यह छोटे व्यापारियों के कैश फ्लो के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

कौन बन सकता है सप्लायर? (पात्रता)

D-Mart में अपना माल बेचने के लिए आपको एक रजिस्टर्ड बिजनेस होना जरूरी है। आपके पास ये डॉक्यूमेंट्स होने चाहिए:

  • GST रजिस्ट्रेशन और पैन कार्ड (अनिवार्य)।
  • कंपनी रजिस्ट्रेशन: (Proprietorship, Partnership या Pvt Ltd)।
  • FSSAI लाइसेंस: अगर आप खाने-पीने का सामान (Food items) बेचते हैं।
  • BIS/ISI मार्क: इलेक्ट्रॉनिक या अन्य स्टैंडर्ड प्रोडक्ट्स के लिए।

किन प्रोडक्ट्स की है डिमांड?

D-Mart में सुई से लेकर बेडशीट तक सब बिकता है। आप इन कैटेगरीज में अप्लाई कर सकते हैं:

  • FMCG: मसाले, तेल, दालें, स्नैक्स।
  • Personal Care: साबुन, शैम्पू, क्लीनर।
  • General Merchandise: क्रॉकरी, खिलौने, स्टेशनरी।
  • Apparel: कपड़े, तौलिए, बेडशीट्स।

रजिस्ट्रेशन का तरीका (Step-by-Step)

D-Mart का वेंडर बनने के लिए आपको किसी दलाल के पास जाने की जरूरत नहीं है।

  1. ऑनलाइन आवेदन: सबसे पहले D-Mart की आधिकारिक वेबसाइट dmartindia.com/partner-with-us पर जाएं।
  2. फॉर्म भरें: अपनी कंपनी की डिटेल, प्रोडक्ट कैटलॉग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की जानकारी दें।
  3. सैंपल सबमिशन: अगर उन्हें आपका प्रस्ताव पसंद आया, तो वे आपसे प्रोडक्ट के 3-5 सैंपल मांगेंगे।
  4. नेगोशिएशन: सैंपल पास होने पर प्राइसिंग तय होगी। याद रखें, D-Mart को रिटेल प्राइस से 30-40% कम दाम (Wholesale Rate) चाहिए होता है।
  5. फैक्ट्री ऑडिट: एग्रीमेंट साइन करने से पहले उनकी टीम आपकी फैक्ट्री का निरीक्षण कर सकती है।

कितना पैसा लगाना होगा? (Investment & Fees)

D-Mart का सप्लायर बनने के लिए इन्वेस्टमेंट आपके प्रोडक्ट पर निर्भर करता है।

  • Slotting Fee: कई बार बड़े रिटेलर्स शेल्फ पर सामान रखने के लिए एक ‘एंट्री फीस’ लेते हैं, जो ₹50,000 से ₹5 लाख तक हो सकती है।
  • मार्जिन: इस बिजनेस में मार्जिन कम (15-25%) होता है, लेकिन वॉल्यूम (बिक्री की मात्रा) बहुत ज्यादा होती है। वे आपसे एक बार में 5,000 से 10,000 यूनिट्स का ऑर्डर दे सकते हैं।

चुनौतियां भी जान लें

D-Mart में एंट्री लेना आसान नहीं है। उनका क्वालिटी चेक बहुत सख्त होता है। अगर आपके प्रोडक्ट की क्वालिटी बैच-दर-बैच बदलती है, तो वे एग्रीमेंट रद्द कर सकते हैं। इसके अलावा, आपको ‘क्रेडिट’ (उधारी) पर काम नहीं करना है, लेकिन आपको बल्क ऑर्डर पूरा करने के लिए बड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता (Capacity) की जरूरत होगी।

अगर आपका प्रोडक्ट दमदार है और रेट सही है, तो D-Mart आपके छोटे बिजनेस को नेशनल ब्रांड बना सकता है।

तेज प्रताप

मैं 2–3 साल से नए-नए बिज़नेस आइडियाज़ और छोटे व्यापार के तरीकों पर रिसर्च कर रहा हूँ। मैं हर हफ्ते नए और आसान बिज़नेस आइडियाज़ ढूँढकर शेयर करता हूँ। मेरे लेख आपको तुरंत अमल करने लायक सुझाव देंगे।

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