आजकल छोटे शहरों और कस्बों में ई-रिक्शा (E-Rickshaw) पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीढ़ बन चुके हैं। लेकिन इन रिक्शा चालकों की सबसे बड़ी समस्या है- बैटरी का खर्च।
एक नई लेड-एसिड बैटरी (Lead-acid battery) की कीमत ₹25,000 से ₹40,000 के बीच होती है, जबकि ज्यादा चलने वाली लिथियम बैटरी (Lithium battery) के लिए ₹60,000 से ₹1,20,000 तक खर्च करने पड़ते हैं। हर साल-डेढ़ साल में इतनी बड़ी रकम एक साथ देना किसी भी गरीब ड्राइवर के लिए नामुमकिन सा होता है।
यहीं से शुरुआत होती है ‘बैटरी रेंटल या स्वैपिंग’ (Battery-as-a-Service – BaaS) बिज़नेस की। बड़े शहरों में ChargeUp जैसी कंपनियां यही काम कर रही हैं, लेकिन टियर-2 और टियर-3 शहरों में यह मार्केट पूरी तरह खाली है।
कैसे काम करेगा यह रेंटल मॉडल?
आपको बैटरी बेचनी नहीं है, बल्कि किराए पर देनी है। यह कॉन्सेप्ट बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप कोई दुकान या मकान किराए पर देते हैं।
- डेली रेंटल (Daily Rent): आप ड्राइवर को 8-10 घंटे के लिए फुल चार्ज बैटरी ₹220 से ₹300 प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर दे सकते हैं।
- वीकली रेंटल (Weekly Rent): ₹1,200 से ₹1,600 प्रति सप्ताह का प्री-पेड प्लान (Pre-paid plan)।
- मंथली लीज़ (Monthly Lease): बड़े खिलाड़ियों की तरह आप ₹3,000 से ₹3,600 प्रति माह में बैटरी लीज़ पर दे सकते हैं।
कमाई और प्रॉफिट का पूरा गणित
अगर आप शुरुआत में 3 लेड-एसिड बैटरी (लगभग ₹90,000 निवेश) खरीदते हैं और उन्हें 3 अलग-अलग रिक्शा चालकों को ₹3,000 महीने के हिसाब से किराए पर देते हैं, तो आपकी फिक्स कमाई ₹9,000 महीना होगी।
अगर आप रोटेशनल यूसेज (दिन-रात की शिफ्ट) मैनेज कर लें, तो यही 3 बैटरियां 5 से 6 चालकों को सर्विस दे सकती हैं, जिससे आपकी कमाई ₹15,000 से ₹21,000 प्रति माह तक पहुंच सकती है। लेड-एसिड बैटरी की लाइफ 1 से 1.5 साल होती है। आपका लक्ष्य 12 महीने में अपनी पूरी लागत (Cost Recovery) निकालना होना चाहिए। इसके बाद के 6 महीने की कमाई आपका 100% शुद्ध मुनाफा होगी।
छोटे शहरों में क्यों है 100% सक्सेस की गारंटी?
बड़े स्वैपिंग नेटवर्क छोटे शहरों में नहीं जाते क्योंकि वहां उन्हें हेवी टेक-इंफ्रास्ट्रक्चर (Tech-infrastructure) लगाना महंगा पड़ता है। लेकिन एक लोकल बिज़नेसमैन के तौर पर आप:
- रिलेशनशिप-बेस्ड डील: शहर के 2-3 मेन रिक्शा स्टैंड पर जाकर सीधे चालकों से बात कर सकते हैं।
- चार्जिंग स्टेशन: अपने घर या दुकान पर ही एक छोटा चार्जिंग और मेंटेनेंस पॉइंट बना सकते हैं।
- ऑन-कॉल सपोर्ट: अगर शहर के अंदर किसी की बैटरी फेल होती है, तो आप तुरंत दूसरी बैटरी पहुंचा सकते हैं (जिससे उनका ट्रिप खराब न हो)।
फ्रॉड और चोरी से कैसे बचें?
यह बिज़नेस भरोसे पर चलता है, लेकिन फिर भी रिस्क कंट्रोल (Risk control) बेहद जरूरी है।
- सिक्योरिटी डिपॉजिट: हर ड्राइवर से ₹2,000 से ₹3,000 का एडवांस डिपॉजिट जरूर लें (इसे 2-3 किस्तों में भी लिया जा सकता है)।
- कठोर एग्रीमेंट: हिंदी में एक साफ एग्रीमेंट बनाएं जिसमें ड्राइवर की ID, एड्रेस और गाड़ी का नंबर लिखा हो।
- प्री-पेड नियम: हमेशा पैसा एडवांस में लें (रोज या हफ्ते के हिसाब से)। बाद में लिथियम बैटरी पर आप GPS और IoT लॉक भी लगा सकते हैं।
सिर्फ 1 हफ्ते में शुरू करें अपना पहला ‘पायलट प्रोजेक्ट’
एक साथ लाखों रुपये फंसाने की गलती न करें। सबसे पहले 1 हफ्ता शहर के मेन रिक्शा स्टैंड पर जाएं और कम से कम 10 ऐसे ड्राइवर खोजें जो वन-टाइम पेमेंट से बचना चाहते हैं।
शुरुआत सिर्फ 2 मिड-रेंज लेड-एसिड बैटरी (₹50k-₹80k निवेश) से करें। उन्हें ₹1,400 हफ्ते का प्लान ऑफर करें। एक WhatsApp ग्रुप बनाएं और हर दिन का रिकॉर्ड रखें। 3 महीने बाद अगर आपको लगता है कि चालकों की कमाई बढ़ रही है और आपका पैसा टाइम पर आ रहा है, तब एक लिथियम बैटरी खरीदकर अपना बिज़नेस स्केल (Scale-up) करें।






