आंध्र प्रदेश (AP) में ₹12 हजार करोड़ फूड प्रोसेसिंग निवेश

October 13, 2025 10:53 PM
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भारत में कृषि और उद्योग के बीच जो पुल बन रहा है, वह है Food Processing सेक्टर।
और अब आंध्र प्रदेश (AP) ने ₹12,000 करोड़ के निवेश की घोषणा करके इस पुल को और मजबूत कर दिया है।

यह सिर्फ़ एक निवेश नहीं, बल्कि “किसान से उद्योग तक” की सोच को साकार करने वाला कदम है।
छोटे किसानों, महिला समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए यह खबर हर स्तर पर नए अवसर लेकर आई है।

आंध्र प्रदेश में निवेश की नई कहानी

पिछले 15 महीनों में आंध्र प्रदेश (AP) ने फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में अभूतपूर्व निवेश आकर्षित किया है।

Reliance Industries ने ₹1,700 करोड़ का निवेश करते हुए Orvakal (कर्नूल) में soft drink और fruit juice प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है।
वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने ₹250 करोड़ के डेयरी और कैटल फीड प्रोजेक्ट की शुरुआत की है।
MSMEs ने भी लगभग ₹1,000 करोड़ का निवेश किया है, जिससे 10,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।

राज्य सरकार ने PM Formalisation of Micro-Food Processing Enterprises (PMFME) योजना के तहत subsidies और वित्तीय सहायता दी है, जिससे छोटे उद्यमियों का जोखिम कम हुआ है और नए निवेशक आत्मनिर्भर मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं।

यह मौका आपके लिए भी है – ऐसे करें शुरुआत

लोकल फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट

किसानों के पास छोटे प्रोसेसिंग यूनिट खोलें ,जैसे आम का पल्प,केले की चिप्स,फलो का जैम बनाकर आप बेच सकते हैं।
इससे फलों का मूल्य बढ़ेगा और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट घटेगी।

डेरी और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट

दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर, दही, फ्लेवर मिल्क, घी पर ध्यान दें। ग्रामीण आंध्र प्रदेश (AP) में दूध उत्पादन बढ़ रहा है, यह ब्रांडिंग और पैकेजिंग बिज़नेस के लिए बढ़िया मौका है।

मीट/पोल्ट्री प्रोसेसिंग और कोल्ड चैन

पॉलट्री फार्म के पास छोटे मीट प्रोसेसिंग या पैकिंग फैसिलिटीज खोलें। कोल्ड चैन लोजिस्टिक्स और स्मार्ट पैकेजिंग से आपका ब्रांड अलग नज़र आएगा।

दालों और गेहूं की प्रोसेसिंग करके

दालों की सफाई, पॉलिशिंग और पैकेजिंग के लिए मशीनें लगाएँ।
ब्रांडिंग + रिटेल पैक्स से मुनाफ़ा कई गुना बढ़ सकता है।

फ़ूड वेस्ट यूटिलाइजेशन /बाई प्रोडक्ट

फ्रूट पील्स या पल्प वेस्ट से आर्गेनिक कम्पोस्ट, बायोगैस या एनिमल फीड बनाकर जीरो वेस्ट मॉडल अपनाएँ यह आजकल बहुत ट्रेंड में है।

चुनौतियाँ और सावधानियाँ

  • पर्यावरण और फूड सेफ्टी नियमों (FSSAI आदि) का पालन अनिवार्य है।
  • कच्चे माल की सप्लाई चैन मज़बूत करनी होगी और किसानों से सीधी sourcing पर ध्यान दें।
  • मशीनरी, बिजली और रखरखाव लागत का सही प्रबंधन जरूरी है।
  • मार्केटिंग और रीजनल ब्रैंडिंग में निवेश करें ताकि स्थानीय पहचान मजबूत बने।

निष्कर्ष

आंध्र प्रदेश का यह निवेश सिर्फ़ राज्य का नहीं, बल्कि पूरे भारत के “किसान + उद्योग = समृद्धि” मॉडल का प्रतीक है।
यदि आप समय रहते फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में कदम रखते हैं, सही बिज़नेस प्लान, सब्सिडी लिवरेज और लोकल सोर्सिंग रणनीति अपनाते हैं।
तो यह अवसर आपको अगले स्तर के सफल उद्यमी बना सकता है।

राहुल शर्मा

मैं पिछले 3 सालों से कृषि और एग्री-बिज़नेस की जानकारी लोगों तक पहुँचा रहा हूँ। मैं किसानों और नए एग्री उद्यमियों के लिए उपयोगी व आसान भाषा में आर्टिकल्स लिखता हूँ। मेरे लेख पढ़कर आप खेती और कृषि-व्यापार को बेहतर समझ पाएँगे।

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