आजकल टियर-2 और टियर-3 शहरों (जैसे कोटा, इंदौर, पटना) में युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या डिग्री की नहीं, बल्कि ‘जॉब-रेडी’ (Job-ready) होने की है। लाखों छात्र B.Com, BA या पॉलिटेक्निक तो कर लेते हैं, लेकिन उन्हें एक प्रोफेशनल रेज्यूमे बनाना या Naukri और Apna जैसे पोर्टल्स पर सही तरीके से अप्लाई करना नहीं आता।
स्टार्टअप एनालिस्ट्स और एचआर विशेषज्ञों के अनुसार, मार्केट में Rezi या MyPerfectResume जैसे कई AI टूल्स मौजूद हैं, लेकिन वे पूरी तरह से अंग्रेजी में हैं और विदेशी कंपनियों (White-collar jobs) के हिसाब से बने हैं। ऐसे में अगर आप एक स्थानीय “AI Career Buddy” या ‘रोजगार साथी’ सर्विस शुरू करते हैं, तो यह एक बेहद सफल और मुनाफे वाला बिज़नेस साबित हो सकता है।
विदेशी AI टूल्स क्यों हो रहे हैं फेल?
छोटे शहरों के युवाओं को ऐसा DIY (Do it yourself) टूल नहीं चाहिए जहां उन्हें खुद बैठकर अंग्रेजी में प्रॉम्प्ट डालने पड़ें। उन्हें एक ‘Done-For-You’ सर्विस की तलाश है।
इस बिज़नेस का मुख्य नारा ही यही होगा— “हम आपका पूरा जॉब एप्लीकेशन का काम संभालेंगे- रेज्यूमे से लेकर डेली अप्लाई करने तक!” इसमें आप कैंडिडेट से सिर्फ उसकी बेसिक डिटेल हिंदी या आसान अंग्रेजी (Hinglish) में लेंगे, और बैकएंड पर AI का इस्तेमाल करके उनका शानदार ATS-फ्रेंडली (ATS-friendly) रेज्यूमे तैयार कर देंगे।
‘ऑटो-अप्लाई’ (Auto-Apply) से कैसे होगा असली मुनाफा?
इस स्टार्टअप मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘ऑटो-अप्लाई’ सर्विस है। छोटे शहरों के युवाओं के पास रोज़ाना 50 कंपनियों में अप्लाई करने का समय या जानकारी नहीं होती।
आप अपने सिस्टम (Job Agent) के ज़रिए उनके लिए टेलीकॉलिंग, फील्ड सेल्स, जूनियर अकाउंटेंट या डेटा एंट्री जैसे रोल्स के लिए Naukri, Internshala या Shine पर रोज़ाना अप्लाई करेंगे। बदले में आप उन्हें हर हफ्ते WhatsApp पर एक पूरी रिपोर्ट भेजेंगे कि उनकी प्रोफाइल कहां-कहां भेजी गई है। ग्लोबल मार्केट में JobCopilot या LazyApply जैसे टूल्स यही काम करते हैं, लेकिन आपको इसे भारतीय मार्केट के हिसाब से कस्टमाइज़ करना है।
बिज़नेस में कमाई के 3 पक्के तरीके
भारत के टियर-2 मार्केट में आपको कीमत कम और वॉल्यूम (Customer volume) ज्यादा रखना होगा:
- बेसिक रेज्यूमे पैक (₹199–₹299): इसमें आप ग्राहक को एक एटीएस-फ्रेंडली रेज्यूमे, Naukri प्रोफाइल ऑप्टिमाइजेशन और एक कवर लेटर बनाकर देंगे।
- मंथली ‘ऑटो-अप्लाई’ प्लान (₹699–₹999): इस प्लान में आप हर महीने 100 से 200 प्रासंगिक नौकरियों (Relevant jobs) पर उनके लिए अप्लाई करेंगे और WhatsApp पर ट्रैकिंग रिपोर्ट देंगे।
- प्रीमियम एक्सीलरेटर पैक (₹1,999–₹2,999): इसमें ऑटो-अप्लाई के साथ-साथ आप उन्हें 2 मॉक इंटरव्यू और सैलरी निगोशिएशन (Salary negotiation) के लिए शॉर्ट हिंदी PDF या वीडियो गाइड भी देंगे।
कैसे शुरू करें अपना ऑपरेशंस?
इस बिज़नेस को शुरू करने के लिए आपको कोई भारी-भरकम कोडिंग या ऐप बनाने की जरूरत नहीं है। आप सिर्फ WhatsApp Business API और Google Forms के जरिए कस्टमर का डेटा ले सकते हैं।
मार्केटिंग के लिए कोटा जैसे शहरों का मॉडल अपनाएं। लोकल कोचिंग सेंटर्स, स्पोकन इंग्लिश क्लासेस और साइबर कैफे वालों के साथ पार्टनरशिप करें। उन्हें हर नए स्टूडेंट पर कमीशन दें। इसके अलावा, स्थानीय कॉलेजों (B2B College Package) से ₹20,000 से ₹50,000 प्रति बैच का सीधा कॉन्ट्रैक्ट लें, जिससे कॉलेज अपनी ‘प्लेसमेंट सपोर्ट’ सर्विस को प्रमोट कर सकें।
ये गलती कभी न करें
इस सर्विस को बेचते समय कभी भी “100% जॉब की गारंटी” का झूठा वादा न करें। आपका दावा सिर्फ “हर महीने 200 ऑप्टिमाइज्ड एप्लीकेशन और इंटरव्यू कॉल की संभावना बढ़ाना” होना चाहिए। शुरुआत में पहले 50 ग्राहकों को मात्र ₹99 में सर्विस दें, ताकि उनके पॉजिटिव रिव्यू (Testimonials) और इंटरव्यू कॉल्स से आपका ब्रांड तेज़ी से ग्रो कर सके।










