साल 2026 की शुरुआत ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) के लिए एक बड़ी चेतावनी लेकर आई है। IMF और World Bank के हालिया डेटा के अनुसार दुनिया के कई बड़े देश भारी कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं।
हालात ऐसे हैं कि इन देशों की कुल कमाई से ज्यादा इनके ऊपर कर्ज का मीटर दौड़ रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, सरकारी कर्ज का बढ़ता स्तर वैश्विक विकास दर के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ गरीब देश ही कर्ज लेते हैं, लेकिन इस लिस्ट में अमेरिका और जापान जैसे सुपरपावर देशों का नाम सबसे ऊपर है।
आइए समझते हैं कि ‘डेब्ट-टू-जीडीपी’ (Debt-to-GDP) का यह पूरा गणित क्या है और दुनिया के किन देशों पर दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा है।
क्यों अहम है Debt to GDP रेशियो?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, किसी देश की आर्थिक सेहत का असली अंदाजा सिर्फ रुपयों या डॉलर में लिए गए कर्ज से नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए ‘डेब्ट-टू-जीडीपी रेशियो’ देखा जाता है। इसका मतलब है कि किसी देश की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) के मुकाबले उस पर कितना प्रतिशत कर्ज है।
अगर यह रेशियो बहुत ज्यादा हो जाए, तो देश का बजट बिगड़ जाता है, डिफ़ॉल्ट का खतरा बढ़ जाता है और बुनियादी ढांचे या सामाजिक योजनाओं के लिए पैसे नहीं बचते। UNCTAD की चेतावनी के अनुसार, 2026 तक विकासशील देशों को हर साल 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज चुकाना होगा, जो एक बहुत बड़ा संकट है।
दुनिया के 10 सबसे कर्जदार देश (IMF 2025-26 रिपोर्ट)
| रैंक | देश | कर्ज (Debt-to-GDP Ratio) | मुख्य कारण |
|---|---|---|---|
| 1 | सूडान | ~250% | युद्ध, पुराने अंतरराष्ट्रीय कर्ज |
| 2 | जापान | ~230% | बुजुर्ग आबादी, लगातार सरकारी स्टिमुलस |
| 3 | सिंगापुर | ~175–179% | बड़े एसेट्स के साथ सुरक्षित सरकारी कर्ज |
| 4 | ग्रीस | ~142–147% | पुराने आर्थिक संकट का असर |
| 5 | बहरीन | ~141–143% | तेल पर अत्यधिक निर्भर अर्थव्यवस्था |
| 6 | इटली | ~136–137% | धीमी आर्थिक वृद्धि |
| 7 | मालदीव | ~132% | पर्यटन पर निर्भरता, बाहरी कर्ज |
| 8 | अमेरिका | ~122–125% | भारी सरकारी खर्च और स्टिमुलस पैकेज |
| 9 | सेनेगल | ~123% | इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े लोन |
| 10 | फ्रांस | ~116–117% | वेलफेयर स्कीम्स और सामाजिक खर्च |
नोट: ये आंकड़े IMF के 2025–26 अनुमानित Debt-to-GDP Ratio पर आधारित हैं।
भारत इस लिस्ट में कहाँ है?
IMF के 2025–26 के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया के सबसे ज्यादा कर्जदार देशों में टॉप पर नहीं है। भारत का Debt-to-GDP Ratio लगभग 80–81% के आसपास है और इसी आधार पर भारत की रैंक करीब 31वें से 35वें स्थान के बीच आती है।
इसका मतलब है कि भारत टॉप 30 कर्जदार देशों की लिस्ट से बाहर है। आसान शब्दों में समझें तो भारत पर कर्ज है, लेकिन यह कई बड़े देशों जैसे जापान या अमेरिका जितना ज्यादा नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अच्छी आर्थिक वृद्धि (लगभग 6–7%) के कारण फिलहाल देश की कर्ज स्थिति संतुलित मानी जा रही है।
ये हैं दुनिया के 10 सबसे ज्यादा कर्जदार देश
IMF के 2025-26 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो टॉप 10 कर्जदार देशों की लिस्ट काफी हैरान करने वाली है। इसमें युद्ध की मार झेल रहे देशों से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तक शामिल हैं:
- सूडान (~250%): यह अफ्रीकी देश भयंकर युद्ध और पुराने बकाए के कारण लिस्ट में सबसे ऊपर है। इसकी जीडीपी से ढाई गुना ज्यादा इस पर कर्ज है।
- जापान (~230%): बुजुर्ग होती आबादी और लगातार स्टिमुलस पैकेजेस (Stimulus spending) के कारण जापान का कर्ज उसकी कमाई के दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।
- सिंगापुर (~175-179%): यह देश तीसरे नंबर पर जरूर है, लेकिन जानकारों के मुताबिक इसका कर्ज बड़े एसेट्स (संपत्ति) से सुरक्षित है, इसलिए यहां जोखिम कम है।
- ग्रीस (~142-147%): पुराने आर्थिक संकट की मार से ग्रीस अभी तक पूरी तरह उबर नहीं पाया है।
- बहरीन (~141-143%): अपनी अर्थव्यवस्था के लिए पूरी तरह तेल पर निर्भर होने के कारण इस देश का कर्ज लगातार बढ़ रहा है।
- इटली (~136-137%): सुस्त आर्थिक विकास और धीमी ग्रोथ के चलते इटली यूरोप के सबसे कर्जदार देशों में से एक है।
- मालदीव (~132%): पर्यटन पर निर्भर इस देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों के कारण भारी कर्ज लेना पड़ा है।
- अमेरिका (~122-125%): सरकारी खर्चों और भारी स्टिमुलस पैकेज के कारण अमेरिका इस लिस्ट में आठवें नंबर पर है।
- सेनेगल (~123%): इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लिए गए भारी-भरकम लोन ने इस देश को कर्ज के जाल में फंसा दिया है।
- फ्रांस (~116-117%): वेलफेयर स्कीम्स और सामाजिक खर्चों के कारण फ्रांस पर कर्ज का भारी दबाव है।
अमेरिका और चीन का ‘एब्सोल्यूट डेब्ट’ में दबदबा
अगर प्रतिशत की जगह हम ‘कुल कर्ज’ (Absolute Debt) की बात करें, तो समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं। कुल रुपयों या ट्रिलियन डॉलर्स के मामले में अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार है। इसके बाद जापान और चीन का नंबर आता है। चीन का डेब्ट-टू-जीडीपी रेशियो 80-90% के आसपास है, लेकिन वहां के रियल एस्टेट संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रखी है।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
दुनियाभर में मचे इस हाहाकार के बीच भारत की स्थिति काफी मजबूत और सुरक्षित है। वर्तमान में भारत का ‘डेब्ट-टू-जीडीपी’ रेशियो 80-85% के आसपास है। भारत की तेज विकास दर इस कर्ज को आसानी से बैलेंस कर रही है।
सरकार इस कर्ज का इस्तेमाल एमएसएमई (MSME) लोन, एग्री-सब्सिडी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने में कर रही है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरें (Interest rates) भविष्य में भारतीय कंपनियों के लिए फंडिंग को थोड़ा महंगा कर सकती हैं।
भारतीय स्टार्टअप्स और बिजनेस को सलाह दी जाती है कि वे इस ग्लोबल अस्थिरता के बीच फिनटेक या एक्सपोर्ट के जरिए अपनी फंडिंग में विविधता लाएं। दुनिया भर के कर्ज संकट के बीच भारत की यह स्थिरता निवेशकों के लिए एक शानदार मौके की तरह काम कर रही है।
दुनिया के सबसे कर्जदार देशों से जुड़े सवाल
दुनिया का सबसे कर्जदार देश कौन सा है?
IMF के 2025–26 के आंकड़ों के अनुसार सूडान दुनिया का सबसे कर्जदार देश है। इस देश का कर्ज उसकी कुल अर्थव्यवस्था (GDP) से लगभग ढाई गुना ज्यादा है।
भारत पर कितना कर्ज है?
भारत सरकार के बजट 2026–27 के अनुसार मार्च 2026 के अंत तक भारत पर कुल सरकारी कर्ज लगभग $2.37 ट्रिलियन (करीब ₹197 लाख करोड़) है। यह कर्ज ज्यादातर देश के अंदर से लिया गया है। अगर GDP के हिसाब से देखें तो भारत का Debt-to-GDP Ratio लगभग 80–81% के आसपास है।
अमेरिका पर कितना कर्ज है?
जनवरी 2026 तक अमेरिका पर कुल सरकारी कर्ज लगभग $38.52 ट्रिलियन पहुंच चुका है। अमेरिका का Debt-to-GDP Ratio लगभग 122–125% के आसपास माना जाता है, यानी उसकी अर्थव्यवस्था के मुकाबले कर्ज काफी ज्यादा है।
दुनिया के 10 सबसे कर्जदार देश कौन से हैं?
IMF के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के सबसे ज्यादा कर्ज वाले देशों में सूडान, जापान, सिंगापुर, ग्रीस, बहरीन, इटली, मालदीव, अमेरिका, सेनेगल और फ्रांस शामिल हैं।
भारत कर्ज के मामले में दुनिया में कितने नंबर पर है?
IMF के 2025–26 के अनुमान के अनुसार भारत लगभग 31वें से 35वें स्थान के बीच आता है।
किसी देश पर ज्यादा कर्ज क्यों हो जाता है?
जब कोई देश ज्यादा सरकारी खर्च करता है, युद्ध होता है या अर्थव्यवस्था कमजोर होती है, तो सरकार को ज्यादा कर्ज लेना पड़ता है।








