शुद्ध पीने का पानी अब सिर्फ शहरों की लग्जरी नहीं रह गया है। भारत के गांवों और कस्बों में भी सेहत को लेकर जागरूकता बहुत तेजी से बढ़ रही है। कुएं और बोरवेल के पानी में बढ़ती मिलावट के कारण अब ग्रामीण इलाकों में भी लोग ‘पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर’ (Packaged Drinking Water) को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बिजनेस विशेषज्ञों के अनुसार, यह बड़ा बदलाव छोटे उद्यमियों के लिए एक बंपर कमाई का मौका लेकर आया है। गांव या पंचायत स्तर पर ’20-लीटर वाटर जार’ (20-litre water jar) सप्लाई का बिज़नेस एक बेहद शानदार और कम लागत वाला स्टार्टअप आइडिया बन चुका है, जो मंदी में भी लगातार मुनाफा देता है।
गांवों में क्यों हिट हो रहा है यह पानी का बिज़नेस?
सरकारी रिपोर्ट्स बताती हैं कि भूजल (Groundwater) का स्तर लगातार गिरने और उसमें कई तरह के रसायनों की मिलावट के कारण गांव के पानी की क्वालिटी खराब हुई है। वहीं ‘जल जीवन मिशन’ जैसे सरकारी अभियानों ने ग्रामीणों को साफ पानी के फायदों के प्रति पहले से कहीं ज्यादा जागरूक कर दिया है।
आजकल ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय (Income) भी बढ़ रही है। ऐसे में गांव के घरों, किराना दुकानों, स्कूलों, अस्पतालों और छोटे ढाबों पर 20 लीटर वाले RO पानी के जार की डेली डिमांड बनी रहती है। लोग जलजनित बीमारियों से बचने के लिए आसानी से इसका मंथली सब्सक्रिप्शन ले रहे हैं।
कैसे करें इस माइक्रो-RO प्लांट की शुरुआत?
इस बिज़नेस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे शुरू करने के लिए आपको करोड़ों रुपये की भारी-भरकम फैक्ट्री नहीं लगानी है। आप 500 से 1000 लीटर प्रति घंटा (LPH) की क्षमता वाला एक ‘माइक्रो-RO’ (Micro-RO) और UV प्यूरिफिकेशन प्लांट लगाकर शुरुआत कर सकते हैं।
इस पूरे सेटअप में मशीन, फिल्टर और इंस्टॉलेशन को मिलाकर औसतन 2 से 5 लाख रुपये का खर्च आता है। इसके साथ ही आपको फूड-ग्रेड प्लास्टिक वाले 20-लीटर के कुछ जार (Tamper-proof caps के साथ) खरीदने होंगे। आप अपने इलाके के हिसाब से ‘ग्राम एक्वा’ या ‘शुद्ध जल’ जैसा कोई भरोसेमंद लोकल ब्रांड नाम रजिस्टर करवा सकते हैं।
हर महीने कितनी होगी पक्की कमाई?
इस बिज़नेस में प्रॉफिट मार्जिन काफी अच्छा होता है क्योंकि इसमें रॉ-मटेरियल (पानी) की लागत बेहद कम है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में एक 20 लीटर के जार की कीमत 25 से 30 रुपये के बीच आसानी से मिल जाती है।
मुनाफे का गणित बिल्कुल साफ है। अगर आप ई-रिक्शा या ऑटो के जरिए आस-पास के 200 से 500 घरों और दुकानों में हर दिन पानी सप्लाई करते हैं, तो बिजली, ट्रांसपोर्ट और स्टाफ का खर्च निकालकर 30,000 से 60,000 रुपये महीने का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) कमाया जा सकता है। जैसे-जैसे डिमांड बढ़े, आप जार की संख्या बढ़ा सकते हैं।
सरकारी लोन और जरूरी लाइसेंस
चूंकि पानी सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा है, इसलिए आपको क्वालिटी से कोई समझौता नहीं करना है। इस बिज़नेस को कानूनी रूप से चलाने के लिए आपको FSSAI रजिस्ट्रेशन और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
अगर आपके पास यह प्लांट लगाने के लिए पूरा बजट नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं है। आप मशीनरी और सेटअप के लिए ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ (Mudra Loan) या PMEGP स्कीम के तहत आसानी से बिजनेस लोन प्राप्त कर सकते हैं। कई बार स्थानीय पंचायतें भी ऐसे समाज-कल्याण वाले प्रोजेक्ट्स के लिए सस्ती दर पर जगह देने में मदद करती हैं।






