आजकल हर गली-मोहल्ले में लोग इंस्टाग्राम (Instagram), व्हाट्सएप (WhatsApp) और मीशो (Meesho) के जरिए अपना छोटा-मोटा ऑनलाइन बिज़नेस चला रहे हैं। लेकिन इन छोटे सेलर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती है,सस्ते और सुरक्षित तरीके से अपना सामान ग्राहकों तक पहुंचाना।
लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, स्विगी और ज़ोमैटो जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के कारण ‘लास्ट-माइल डिलीवरी’ (Last-mile delivery) की लागत ₹50 से ₹60 प्रति पार्सल तक पहुंच गई है। ऐसे में टियर-2 और टियर-3 शहरों में एक नए और बेहद मुनाफे वाले बिज़नेस मॉडल ने दस्तक दी है, जिसे PUDO (Pickup and Drop-off) कहा जाता है।
कैसे काम करता है यह शानदार बिज़नेस?
इसे ‘इंडिया पोस्ट + लोकल किराना + स्मार्ट टेक’ का बेहतरीन कॉम्बो मान सकते हैं। आपको अपने शहर या घनी आबादी वाले इलाके में एक ‘पिकअप और ड्रॉप पॉइंट’ खोलना है।
इस हब पर छोटे ऑनलाइन सेलर्स (जो दिन में 5 से 20 पार्सल भेजते हैं) अपना सामान ड्रॉप कर सकते हैं। वहीं, Delhivery या Xpressbees जैसी बड़ी कूरियर कंपनियां अलग-अलग घरों में जाने के बजाय, सारे पार्सल एक साथ आपके हब पर ड्रॉप कर देंगी, जहां से ग्राहक अपना सामान खुद कलेक्ट कर लेंगे। इससे कूरियर कंपनियों का पेट्रोल और समय बचता है, और वे खुशी-खुशी आपको कमीशन देती हैं।
कितनी होगी आपकी कमाई?
इस बिज़नेस में कमाई के एक नहीं, बल्कि तीन पक्के जरिए हैं:
- कूरियर कंपनियों से कमीशन: बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियों का ऑफिशियल ‘ड्रॉप पॉइंट’ बनने पर आपको प्रति पार्सल ₹5 से ₹8 तक की फिक्स हैंडलिंग फीस मिलती है।
- छोटे सेलर्स से सब्सक्रिप्शन: आप लोकल बुटीक या गिफ्ट शॉप वालों को ₹499 से ₹1999 तक का मंथली प्लान बेच सकते हैं। या फिर प्रति पार्सल ₹8 से ₹15 तक का सर्विस चार्ज ले सकते हैं।
- कस्टमर से एक्स्ट्रा इनकम: वॉक-इन ग्राहकों के लिए पैकेजिंग सुविधा, लेबल प्रिंटिंग, COD (कैश ऑन डिलीवरी) हैंडलिंग और पार्सल को 3 दिन से ज्यादा स्टोर करने पर स्टोरेज चार्ज से शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है।
लागत और सेटअप का पूरा खर्च
यह बिज़नेस भारी-भरकम निवेश नहीं, बल्कि स्मार्ट प्लानिंग मांगता है। शुरुआत करने के लिए आपको किसी मेन मार्केट, कोचिंग हब (जैसे कोटा) या बड़ी रेजिडेंशियल सोसाइटी के पास 150 से 300 वर्ग फुट (Ground Floor) की एक छोटी सी जगह चाहिए।
अगर आप किराए की दुकान लेते हैं, तो रैक, काउंटर, कंप्यूटर, इंटरनेट, प्रिंटर और बेसिक CCTV कैमरा लगाने का कुल वन-टाइम खर्च सिर्फ ₹30,000 से ₹70,000 के बीच आएगा। आप चाहें तो किसी मौजूदा किराना स्टोर या मोबाइल शॉप के साथ पार्टनरशिप करके भी इस मॉडल को ‘जीरो रेंट’ पर शुरू कर सकते हैं।
छोटे शहरों में क्यों है यह सुपरहिट?
छोटे सेलर्स के पास आमतौर पर GST-रजिस्टर्ड कूरियर टाई-अप नहीं होता है। उनके लिए रिटर्न (Returns) मैनेज करना सबसे बड़ा सिरदर्द है।
आपका यह PUDO सेंटर उन्हें ‘अकाउंट ओपनिंग’ से लेकर पैकेजिंग और आसान रिटर्न ड्रॉप-ऑफ की सुविधा देता है। आपको Blinkit जैसी स्पीड नहीं देनी है, बल्कि ‘स्मॉल सेलर फ्रेंडली’ लॉजिस्टिक्स पार्टनर बनना है। अगर आप अपने इलाके के सिर्फ 50 छोटे सेलर्स का भरोसा जीत लेते हैं, तो यह बिज़नेस हर महीने एक शानदार पैसिव इनकम (Passive Income) जनरेट करके दे सकता है।










