भारत में अपना बिज़नेस चलाना या स्टार्टअप शुरू करना कभी आसान नहीं रहा। सबसे बड़ा डर मार्केट या फंडिंग का नहीं, बल्कि ‘कानूनी पचड़ों’ का होता है। एक छोटी सी कागजी गलती या कंप्लायंस में देरी, और सीधे जेल जाने या क्रिमिनल केस का नोटिस आ जाता है।
लेकिन अब इस “कानूनी खौफ” का अंत होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने बिज़नेस और आम नागरिकों की ‘Ease of Living’ को सुधारने के लिए Jan Vishwas Act 2.0 (Jan Vishwas Amendment of Provisions Bill, 2025) का मास्टरस्ट्रोक चला है।
सरकारी ड्राफ्ट और लीगल एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह नया कानून छोटी-मोटी गलतियों के लिए जेल की सज़ा को पूरी तरह खत्म कर देगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस नए बिल से आपके बिज़नेस और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ेगा।
छोटी गलतियों पर अब नहीं होगी जेल
साल 2023 में सरकार ने पहला जन विश्वास कानून लागू किया था, जिसमें 42 कानूनों की 183 धाराओं को डिक्रिमिनलाइज़ (अपराध की श्रेणी से बाहर) किया गया था। अब 2025-26 के इस Jan Vishwas 2.0 वर्ज़न में इसे और भी बड़ा रूप दिया गया है।
लेटेस्ट रिपोर्ट बताती है कि इस बार 16 केंद्रीय कानूनों की 355 धाराओं में सीधे तौर पर बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें से सबसे बड़ी राहत यह है कि 288 धाराओं के तहत अब क्रिमिनल केस नहीं चलेगा। यानी, अगर आपसे कोई टेक्निकल या प्रोसीजरल (कागजी) गलती हो जाती है, तो आपको कोर्ट-कचहरी या पुलिस थाने के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
कैसे काम करेगा नया ‘वार्निंग और फाइन’ सिस्टम?
पहले नियम था कि गलती हुई तो सीधे एफआईआर (FIR) या कोर्ट का समन। लेकिन नए कानून ने इस सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है।
- पहली गलती पर सिर्फ वार्निंग: लगभग 76 तरह के छोटे उल्लंघनों के लिए अब सीधे केस दर्ज नहीं होगा। अधिकारी आपको सिर्फ ‘एडवाइजरी’ या चेतावनी (Warning) देकर सुधार का मौका देंगे।
- क्रिमिनल से सिविल मामला: कई ऐसे नियम थे जिन्हें क्रिमिनल अपराध माना जाता था। अब इन्हें सिविल अपराध में बदल दिया गया है। इसका मतलब है कि पुलिस की जगह प्रशासनिक अधिकारी (Admin Officers) ही मामले को सुलझा सकेंगे।
- लॉजिकल पेनल्टी (Graduated Fines): फाइन का एक नया स्लैब बनाया गया है। पहली बार गलती करने पर बेहद मामूली जुर्माना लगेगा, और अगर कोई बार-बार जानबूझकर गलती करता है, तभी भारी पेनल्टी लगाई जाएगी।
किन बड़े कानूनों और सेक्टर्स पर पड़ेगा सीधा असर?
इस बिल में देश के 16 सबसे अहम कानूनों को शामिल किया गया है, जिनका सीधा वास्ता रोज़मर्रा के बिज़नेस से है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें RBI Act 1934, Motor Vehicles Act 1988, Electricity Act 2003, Drugs & Cosmetics Act 1940, और MSME Development Act 2006 जैसे भारी-भरकम कानून शामिल हैं। सबसे बड़ी राहत ‘Legal Metrology Act 2009’ में मिली है। अक्सर वजन या तौल में मामूली और अनजाने में हुई कमी के लिए छोटे दुकानदारों पर आपराधिक केस ठोक दिया जाता था। अब ऐसे मामलों में सिर्फ आर्थिक जुर्माना लगेगा।
MSME और स्टार्टअप्स की बल्ले-बल्ले
अगर आप एक MSME मालिक या स्टार्टअप फाउंडर हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। बिज़नेस करते समय कई बार अनजाने में (Non-intentional) कंप्लायंस रिपोर्ट भरने में देरी हो जाती है।
पहले इसके लिए संस्थापकों (Founders) को जेल का डर सताता था। Jan Vishwas 2.0 के लागू होने से यह रिस्क काफी हद तक घट जाएगा। अब कारोबारी अपना पूरा फोकस वकीलों की फीस भरने के बजाय, अपने बिज़नेस की ग्रोथ और इनोवेशन पर लगा सकेंगे। वहीं आम नागरिकों के लिए भी ट्रैफिक, म्युनिसिपल और मीटरिंग से जुड़े मामले ज्यादा डिजिटल और पारदर्शी हो जाएंगे।











