गलत नोटिस पीरियड आपको लाखों का नुकसान करा सकता है! स्टार्टअप फाउंडर्स के लिए जरूरी गाइड

January 14, 2026 9:44 AM
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कल्पना कीजिए कि आपकी कंपनी का सबसे अहम प्रोजेक्ट संभालने वाला मैनेजर या टॉप सेल्स एग्जीक्यूटिव अचानक आपके केबिन में आए और कहे, “सर, कल से मैं काम पर नहीं आऊंगा।”

अगर आपके पास एक मजबूत ‘नोटिस पीरियड पॉलिसी’ नहीं है, तो यह स्थिति आपके बिजनेस को रातों-रात संकट में डाल सकती है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम और MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) में अक्सर फाउंडर्स प्रोडक्ट और सेल्स पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन HR पॉलिसी और कॉन्ट्रैक्ट्स को ‘कागजी कार्यवाही’ मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

एक सीनियर जर्नलिस्ट और बिजनेस विश्लेषक के तौर पर, मैं आपको बता दूं कि नोटिस पीरियड सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि आपके बिजनेस की निरंतरता (Continuity) बनाए रखने का सबसे बड़ा टूल है। आइए, इस खबर की गहराई में जाते हैं और समझते हैं कि अपने बिजनेस के लिए इसे कैसे डिजाइन करें।

नोटिस पीरियड का असली अर्थ: बिजनेस के नजरिए से

साधारण भाषा में नोटिस पीरियड इस्तीफे और आखिरी कार्य दिवस के बीच का समय है। लेकिन एक उद्यमी (Entrepreneur) के लिए इसका अर्थ है “नॉलेज ट्रांसफर का समय”

जब कोई कर्मचारी जाता है, तो वह अपने साथ सिर्फ अपनी स्किल नहीं, बल्कि आपकी कंपनी का डाटा, क्लाइंट रिलेशन्स और पेंडिंग काम की जानकारी भी ले जाता है। यह 30 या 90 दिन का समय आपको एक ‘बफर’ देता है ताकि:

  1. पुराने कर्मचारी से नए कर्मचारी को काम सौंपा (Handover) जा सके।
  2. आप बिना हड़बड़ी के नया रिप्लेसमेंट ढूंढ सकें।
  3. क्लाइंट्स को भरोसा दिलाया जा सके कि काम नहीं रुकेगा।

एक्सपर्ट एनालिसिस: अपनी कंपनी के लिए नियम कैसे तय करें?

हर कर्मचारी के लिए ‘एक जैसा नियम’ (One size fits all) अब पुराना हो चुका है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपको अपनी टीम के रोल की गंभीरता (Criticality) के हिसाब से नोटिस पीरियड तय करना चाहिए। यहाँ एक व्यावहारिक ढांचा (Framework) है:

1. जूनियर या एंट्री-लेवल रोल्स (15-30 दिन): इन रोल्स में रिप्लेसमेंट आसानी से मिल जाते हैं। यहाँ 90 दिन का नोटिस पीरियड रखना समझदारी नहीं है, क्योंकि कोई भी फ्रेशर तीन महीने इंतज़ार नहीं करेगा। 15 से 30 दिन का समय पर्याप्त है।

2. मिड-लेवल मैनेजमेंट (30-60 दिन): ये वो लोग हैं जो टीम संभालते हैं। इनके जाने से काम का फ्लो बिगड़ सकता है। इसलिए कम से कम 30 से 45 दिन का समय जरूरी है ताकि वे अपनी जिम्मेदारियां ठीक से सौंप सकें।

3. सीनियर लीडरशिप/को-फाउंडर्स (60-90 दिन): CTO, सेल्स हेड या फाइनेंस हेड जैसे पदों के लिए 2 से 3 महीने का नोटिस पीरियड स्टैंडर्ड है। इनका रिप्लेसमेंट ढूंढना मुश्किल होता है और ये कंपनी की रणनीतियों (Strategies) से गहराई से जुड़े होते हैं।

स्टार्टअप्स के लिए ‘गार्डन लीव’ और ‘बायआउट’ का गणित

अक्सर फाउंडर्स इन दो शब्दों में उलझ जाते हैं, लेकिन ये आपके लिए बहुत काम के हैं:

  • सैलरी इन लियू (Buyout Option): अगर कोई कर्मचारी नोटिस पीरियड सर्व नहीं करना चाहता, तो क्या आप उसे रोक सकते हैं? कानूनी तौर पर मुश्किल है। इसलिए कॉन्ट्रैक्ट में लिखें कि वह नोटिस पीरियड के बदले उतनी सैलरी देकर जा सकता है। यह क्लॉज आपको मौद्रिक सुरक्षा (Financial Security) देता है।
  • गार्डन लीव (Garden Leave): मान लीजिए आपका सेल्स हेड आपको छोड़कर आपके सबसे बड़े कॉम्पिटिटर के पास जा रहा है। क्या आप चाहेंगे कि वह अगले 30 दिन आपके ऑफिस में रहे और डेटा ले जाए? नहीं। ऐसी स्थिति के लिए ‘गार्डन लीव’ का क्लॉज होता है—यानी आप उसे सैलरी देंगे, लेकिन उसे ऑफिस आने या काम करने से मना कर देंगे, ताकि डेटा सुरक्षित रहे।

भविष्य के संकेत (Future Implications): मार्केट का बदलता ट्रेंड

भारतीय जॉब मार्केट में अब एक बड़ा बदलाव आ रहा है। टैलेंट वॉर (Talent War) के इस दौर में, बहुत लंबा नोटिस पीरियड (जैसे 90 दिन) हायरिंग में बाधा बन रहा है।

  • भविष्य की चुनौती: जेन-जी (Gen-Z) और मिलेनियल्स फ्लेक्सिबिलिटी पसंद करते हैं। अगर आपकी कंपनी पॉलिसी बहुत सख्त है, तो अच्छे टैलेंट आपसे जुड़ने से कतराएंगे।
  • समाधान: नोटिस पीरियड को ‘नेगोशिएबल’ (बातचीत योग्य) रखें। अगर काम का हैंडओवर 15 दिन में हो गया है, तो कर्मचारी को जबरदस्ती 90 दिन रोकने का कोई मतलब नहीं है। इससे ऑफिस का माहौल खराब होता है।

फाउंडर्स के लिए व्यावहारिक सलाह (Pro-Tips)

  1. ऑफर लेटर में स्पष्टता: “आपसी सहमति” जैसे गोल-मोल शब्दों से बचें। स्पष्ट लिखें— “इस्तीफा देने पर 30 दिन का नोटिस या उतनी बेसिक सैलरी देनी होगी।”
  2. प्रोबेशन का फायदा उठाएं: प्रोबेशन (परखने की अवधि) के दौरान नोटिस पीरियड कम (7 से 15 दिन) रखें। अगर कर्मचारी फिट नहीं है, तो उसे जल्दी रिलीज करना बिजनेस के लिए फायदेमंद है।
  3. कानूनी पहलू: भारत में ‘शॉप्स एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट’ हर राज्य का अलग होता है। अपनी पॉलिसी बनाने से पहले एक बार स्थानीय लेबर लॉ एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।

निष्कर्ष

नोटिस पीरियड सिर्फ कर्मचारी को रोकने का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक सम्मानजनक विदाई (Exit) का रास्ता है। एक स्मार्ट बिजनेसमैन वही है जो आने वाले (Joining) और जाने वाले (Exiting), दोनों रास्तों पर अपना कंट्रोल रखे। अपनी पॉलिसी को पारदर्शी रखें, ताकि न तो कर्मचारी का करियर रुके और न ही आपकी कंपनी की रफ्तार।

Lakshay Pratap

मैं लगभग 4 सालो से ऑनलाइन बिज़नेस और ऑफलाइन बिज़नेस पर काम कर रहा हूँ, और में ऑफलाइन बिज़नेस की सबसे बड़ी समस्या यानी बिज़नेस के लिए जरुरी प्रोसेस और मार्केटिंग पर बहुत ज्यादा फोकस्ड हूँ। मेरे आर्टिकल्स से आपको बहुत फायदा मिलेगा।

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