बिहार (Bihar) से अक्सर पलायन की खबरें आती हैं, लेकिन दो इंजीनियर दोस्तों ने इस धारणा को बदल दिया है। सैयद फराज और शिशिर शुभम ने अपनी अच्छी-खासी इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी और वापस अपने गृह राज्य लौटकर ‘सफेद सोने’ यानी मखाने (Makhana) का कारोबार शुरू किया।
महज 3 लाख रुपये की छोटी सी पूंजी से शुरू हुआ यह स्टार्टअप ‘Shhe Foods’ आज मखाना इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम बन चुका है। आइए जानते हैं कि कैसे इन दो युवाओं ने बैकएंड बिजनेस मॉडल (Backend Business Model) के जरिए करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी।
क्या है इनका बिजनेस मॉडल?
फराज और शिशिर ने मार्केट को समझा और देखा कि मखाने का बाजार असंगठित है। उन्होंने सीधे खुद का ब्रांड लॉन्च करने (B2C) के बजाय B2B (Business-to-Business) मॉडल चुना।
आसान भाषा में कहें तो, वे दूसरी बड़ी कंपनियों के लिए मखाना प्रोसेस और पैक करते हैं। इसे ‘व्हाइट लेबलिंग’ (White Labelling) कहा जाता है।
- रणनीति: मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पर करोड़ों खर्च करने के बजाय, उन्होंने सप्लाई चेन को मजबूत किया।
- ग्रोथ: 2022 में वे सिर्फ 4 ब्रांड्स को सप्लाई करते थे, जो 2025 तक बढ़कर 41 से ज्यादा देशी और विदेशी ब्रांड्स हो गए हैं। इसमें अमेरिका और दुबई की कंपनियां भी शामिल हैं।
3 लाख से 1.5 करोड़ महीना तक का सफर
सफर की शुरुआत आसान नहीं थी। फराज ने जब 2021 में बेंगलुरु से वापस लौटने का फैसला किया, तो उनके पास ज्यादा पूंजी नहीं थी। दोस्तों से उधार लेकर और छोटी बचत मिलाकर कुल 3 लाख रुपये से काम शुरू किया।
शुरुआत में मशीनों के लिए भी पैसे नहीं थे, तो अपनी इंजीनियरिंग की जानकारी का इस्तेमाल कर उन्होंने खुद एक प्रोटोटाइप मशीन तैयार की। दिन-रात की मेहनत रंग लाई और उनका रेवेन्यू ग्राफ कुछ ऐसे बढ़ा:
- FY23: ₹8.3 लाख
- FY24: ₹45.4 लाख
- FY25: ₹2.5 करोड़ (अनुमानित)
- मौजूदा स्थिति: रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अब लगभग ₹1.5 करोड़ मंथली रेवेन्यू जनरेट कर रही है।
किसानों को कैसे हो रहा फायदा?
इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी ताकत उनका नेटवर्क है। वे बिचौलियों को हटाकर सीधे 2,500 से अधिक मखाना किसानों से जुड़े हैं।
पहले कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण बिहार के 70% किसानों ने मखाना खेती छोड़ दी थी। लेकिन ‘Shhe Foods’ ने उन्हें फिक्स प्राइस और भरोसेमंद खरीद का वादा दिया। नतीजा यह हुआ कि अब लगभग 80% किसान वापस खेती की ओर लौट आए हैं। इससे मिथिलांचल (Mithilanchal) की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई जान मिली है।
भविष्य की तैयारी: रिटेल और एक्सपोर्ट
सप्लाई चेन में अपनी धाक जमाने के बाद, अब कंपनी ने रिटेल मार्केट में भी कदम रखा है। उन्होंने Makhanza, Nutrimix और Maket नाम से अपने खुद के ब्रांड्स लॉन्च किए हैं।
ये प्रोडक्ट्स अब लखनऊ, वाराणसी और बेंगलुरु जैसे शहरों के 80 से ज्यादा स्टोर्स में उपलब्ध हैं। फराज का लक्ष्य अगले दो सालों में कंपनी को ₹200 करोड़ के टर्नओवर तक ले जाना है। यह कहानी साबित करती है कि अगर सही रणनीति हो, तो बिना फंडिंग के भी बड़ा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है।ता है।











