Twitter से निकाले गए, ₹320 करोड़ छीने गए… अब 6,600 करोड़ की AI कंपनी बनाकर की धमाकेदार वापसी!

December 28, 2025 8:18 AM

अक्टूबर 2022 की वह रात याद है जब एलन मस्क (Elon Musk) ने ट्विटर (Twitter) को $44 बिलियन में खरीदा था? डील पूरी होते ही मस्क ने सबसे पहले भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) को फायर कर दिया था। न कोई विदाई समारोह, न कोई ‘थैंक यू’ नोट, बल्कि सिक्योरिटी गार्ड्स उन्हें ऑफिस से बाहर छोड़ने आए।

यही नहीं, मस्क ने उन्हें मिलने वाला लगभग ₹320 करोड़ ($40 million) का सेवरेंस पैकेज देने से भी मना कर दिया। पूरी दुनिया ने देखा कि एक टॉप सीईओ के साथ कैसा सुलूक हुआ। लेकिन पराग चुप रहे। न कोई इंटरव्यू दिया, न सोशल मीडिया पर रोना-धोना किया।

अब 2025 में, पराग अग्रवाल ने ऐसा कमबैक किया है कि पूरी सिलिकॉन वैली हैरान है। उन्होंने ‘Parallel Web Systems’ नाम की एक नई AI कंपनी बनाई है, जिसकी वैल्यूएशन अब ₹6,600 करोड़ ($740 million) से ज्यादा हो गई है।

कैसे हुई वापसी? (The Comeback Story)

ट्विटर से निकाले जाने के बाद, पराग ने छुट्टी नहीं मनाई। उन्होंने पालो अल्टो (Palo Alto) के कैफे में बैठकर कोडिंग शुरू कर दी। वह चुपचाप इंटरनेट के भविष्य के बारे में सोचते रहे। उन्होंने महसूस किया कि इंटरनेट इंसानों के लिए बना है, AI के लिए नहीं।

यहीं से ‘Parallel’ का जन्म हुआ। 2023 में उन्होंने अपनी कंपनी शुरू की और चुपचाप काम करते रहे। न कोई शोर, न कोई बड़ा एलान। उन्होंने 18 महीने तक अपनी टेक्नोलॉजी को परफेक्ट बनाया।

क्या करती है पराग की कंपनी?

आज के AI एजेंट्स (जैसे ChatGPT) को इंटरनेट से ताज़ा जानकारी निकालने में दिक्कत होती है। कभी-कभी वे गलत जानकारी (Hallucinations) देते हैं। पराग की कंपनी Parallel इसी समस्या को सुलझाती है।

  • AI के लिए इंटरनेट: यह इंसानों की तरह लिंक नहीं देता, बल्कि AI को प्रोसेस किया हुआ डेटा देता है।
  • GPT-5 से बेहतर: बेंचमार्क टेस्टिंग में, Parallel के सबसे एडवांस मॉडल ‘Ultra8x’ ने OpenAI के GPT-5 को भी पीछे छोड़ दिया। ‘Deep Research’ जैसे मुश्किल काम में इसकी एक्यूरेसी 58% थी, जबकि GPT-5 की सिर्फ 41%।
  • इंसानों से भी तेज़: एक टेस्ट में Parallel ने इंसानों को 82% बार हराया और GPT-5 को 74% बार।

₹800 करोड़ की फंडिंग और बड़े इन्वेस्टर

नवंबर 2025 में, पराग की कंपनी ने $100 मिलियन (करीब ₹840 करोड़) की फंडिंग उठाई। इसमें Kleiner Perkins और Index Ventures जैसी दिग्गज कंपनियों ने पैसा लगाया है। विनोद खोसला (Vinod Khosla) जैसे अरबपति इन्वेस्टर भी उनके साथ हैं।

आज Parallel का इस्तेमाल बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां कोडिंग, रिस्क एनालिसिस और मार्केट रिसर्च के लिए कर रही हैं। पराग का मानना है कि आने वाले समय में इंटरनेट का इस्तेमाल इंसानों से ज्यादा AI एजेंट्स करेंगे, और उनकी कंपनी उस भविष्य का आधार बनेगी।

सबक: असफलता अंत नहीं है

पराग अग्रवाल की कहानी हमें सिखाती है कि गिरना बुरा नहीं है, गिरकर न उठना बुरा है। पूरी दुनिया के सामने बेइज्जत होने के बाद भी, उन्होंने अपनी काबिलियत पर भरोसा रखा। उन्होंने बदला लेने के बजाय अपनी ऊर्जा कुछ नया बनाने में लगाई। आज वह जिस कंपनी के मालिक हैं, वह शायद भविष्य में ट्विटर से भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो।

सलोनी ठाकर

मैं 3 सालों से सफल उद्यमियों और कंपनियों की कहानियाँ लिख रही हूँ। मैं हर हफ्ते नई-नई प्रेरक कहानियाँ ढूँढकर शेयर करती हूँ। मेरे आर्टिकल्स पढ़कर आप दूसरों की यात्रा से सीख और मोटिवेशन पा सकेंगे।

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