हवाई सफर करने वालों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों से आसमान छू रही फ्लाइट टिकट की कीमतों पर केंद्र सरकार ने लगाम लगा दी है। इंडिगो एयरलाइन्स (IndiGo Airlines) के संकट और फ्लाइट्स कैंसिल होने के बाद मचे हाहाकार के बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने बड़ा फैसला लेते हुए घरेलू उड़ानों के किराए की अधिकतम सीमा (Upper Cap) तय कर दी है।
अगर आप भी आने वाले दिनों में यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब को भारी नुकसान से बचा सकती है। आइए जानते हैं क्या हैं नए रेट और आपको इसका फायदा कैसे मिलेगा।
क्या है पूरा मामला?
दिसंबर 2025 की शुरुआत भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए काफी उथल-पुथल भरी रही। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो, जिसके पास 60% मार्केट शेयर है, को पायलटों की कमी और नए ड्यूटी नियमों (FDTL) के चलते एक ही हफ्ते में 1,600 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ीं।
इसका नतीजा यह हुआ कि हवाई टिकटों के दाम 5 से 10 गुना तक बढ़ गए। दिल्ली-मुंबई की फ्लाइट्स जो आम तौर पर सस्ती होती हैं, उनका किराया 28,000 रुपये तक पहुंच गया। यहाँ तक कि एक मशहूर अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर 54,000 रुपये का बोर्डिंग पास शेयर कर अपनी नाराजगी जाहिर की। त्यौहार और छुट्टियों के सीजन में यात्रियों की इस लूट को देखते हुए सरकार ने इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल किया और किराए को फिक्स कर दिया।
अब कितना देना होगा किराया? (New Price Slabs)
सरकार ने फ्लाइट की दूरी (Distance) के हिसाब से इकोनॉमी क्लास (Economy Class) के लिए अधिकतम किराया तय किया है। यह नियम सभी एयरलाइन्स और बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
दूरी के हिसाब से अधिकतम किराया (Maximum Fare):
- 0 से 500 किमी: ₹7,500
- 500 से 1,000 किमी: ₹12,000
- 1,000 से 1,500 किमी: ₹15,000
- 1,500 किमी से ज्यादा: ₹18,000
महत्वपूर्ण: यह कैप केवल इकोनॉमी क्लास के बेस फेयर पर है। इसमें टैक्स, एयरपोर्ट फीस और बिज़नेस क्लास का किराया शामिल नहीं है। साथ ही, रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (UDAN) वाली फ्लाइट्स पर यह नियम लागू नहीं होगा।
सरकार ने क्यों लिया इतना सख्त फैसला?
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि संकट के समय “मौकापरस्त प्राइसिंग” (Opportunistic Pricing) को रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि सरकार यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जरूरी यात्राएं आम आदमी की पहुंच से बाहर न हो जाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद यह दूसरी बार है जब सरकार ने हवाई किराए पर कैप लगाई है। उस वक्त भी मार्केट को स्थिर करने के लिए ऐसा ही कदम उठाया गया था।
यात्रियों को और क्या राहत मिली?
सिर्फ किराए पर लगाम ही नहीं, बल्कि मंत्रालय ने यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए एयरलाइन्स को सख्त निर्देश भी दिए हैं:
- रिफंड (Refund): जिन यात्रियों की फ्लाइट्स कैंसिल हुई थीं, उन्हें पेंडिंग रिफंड तुरंत प्रोसेस करने का आदेश दिया गया था (जिसकी डेडलाइन 7 दिसंबर रात 8 बजे तक थी)।
- रीशेड़यूलिंग चार्ज (No Rescheduling Fees): अगर आपकी फ्लाइट एयरलाइन की गलती से प्रभावित हुई है, तो नई बुकिंग या बदलाव के लिए एयरलाइन आपसे कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं ले सकती।
- सख्त निगरानी: DGCA को निर्देश दिए गए हैं कि वो रियल-टाइम में किराए पर नजर रखें। अगर कोई एयरलाइन तय सीमा से ज्यादा किराया वसूलती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
कब तक लागू रहेंगे ये नियम?
मंत्रालय के मुताबिक, यह प्राइस कैप तब तक लागू रहेगी जब तक कि हवाई किराए स्थिर नहीं हो जाते या अगला आदेश नहीं आता। इंडिगो ने संकेत दिया है कि उनका ऑपरेशन 15 दिसंबर तक पूरी तरह सामान्य हो सकता है, लेकिन तब तक यात्रियों को इन फिक्स रेट्स का फायदा मिलता रहेगा।
अगर आप टिकट बुक कर रहे हैं, तो ध्यान दें कि ये ‘अधिकतम’ सीमा है। एयरलाइन्स इससे कम किराया तो ले सकती हैं, लेकिन इससे ज्यादा नहीं। अगर आपको इससे महंगा टिकट दिख रहा है, तो आप तुरंत नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।











